जानिये किसे गोद लेना पडेगा कुपोषित बच्चो को ? कुपोषित बच्चो की अब होंगी जिम्मेदारी

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कुलदीप रावत,  लोकजन टुडे

उत्तराखंड मैं कोई भी बच्चा कुपोषण का शिकार नहीं रह पाएगा यह दावा है मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने उत्तराखंड के अधिकारी और मंत्रियों को निर्देश दिए हैं सभी अधिकारी और मंत्री राज्य में एक-एक कुपोषित बच्चों को गोद ले और उनकी देखरेख करें
आधुनिकता के इस दौर में आज भी हमारे समाज में कुपोषण का होना किसी दीमक से कम नहीं है। आज भी बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। उत्तराखंड सरकार ने इस महामारी से निपटने के लिए सूबे के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। जिसके तहत अधिकारी कुपोषित बच्चो को गोद लेंगे देशभर में कुपोषण एक गंभीर समस्या है।क्योकि एक रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया में भारत एक ऐसा देश है जहां हर साल कुपोषण से लगभग 10 लाख बच्चों की मौत होती है। एक सर्वे के मुताबिक़ भारत में कुछ स्लम एरिया के बच्चे आज भी कुपोषण का शिकार होकर अपनी जान गवां रहे हैं। अगर इन क्षेत्रों में ध्यान दिया जाए तो ये आंकड़े कम किये जा सकते हैं। इस गंभीर महामारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं। जिस पर राज्यों ने काम करना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को निर्देश दिए हैं कि अधिकारी राज्य के कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी देखभाल करें। ताकि बच्चों की स्टेटस रिपोर्ट आसानी से मिल सके।


उत्तराखंड महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 1600 बच्चे अति कुपोषण जबकि 17000 कुपोषण के शिकार हैं। जिनके लिए मुख्यमंत्री के आदेश के बाद इस सितंबर महीने में बच्चों को गोद लेने का कार्यक्रम रखा गया है। ये कार्यक्रम पूरे महीने चलाया जाएगा। इसके तहत मुख्य सचिव से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों को एक-एक बच्चे को गोद लेने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही आंगनबाड़ी में कार्य करने वाली महिलाओं को ख़ास तौर पर कुपोषण से निपटने के लिए ट्रेनिंग दी जायेगी ताकि अपने-अपने क्षेत्र के बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सके। साल 2019 की बात करें तो इस साल राहत की बात ये रही कि कुपोषण के लिए किये गए सर्वे में भारत में कुपोषित बच्चो में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
उत्तराखण्ड में अति कुपोषण और कुपोषण के शिकार बच्चों की देखभाल के लिए सरकार ने जो कदम उठाया है वो सराहनीय है। इस तरह के कार्यक्रम इस बात की भी तस्दीक करते हैं कि सरकारें इस महामारी के प्रति गंभीर हैं।


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