जरा सोचिए 3 घंटे की रियायत भारी ना पड़ जाए?

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उत्तराखंड को लॉक दान करना और उसका पूरी तरह से पालन कराना उत्तराखंड सरकार के लिए ऐतिहासिक के साथ सराहनीय कदम है लेकिन इसमें सबसे बड़ी खामी यह है कि सुबह 7:00 से 10:00 बजे की रियायत देना भला एक तरफ तो आप पूरे दिन घर में कैसे रहने की बात करते हैं वही सुबह 7:00 बजे से 10:00 बजे तक पूरा शहर सड़क पर अपनी दैनिक रोजमर्रा की चीजें खरीदने सड़क पर आ जाता है… अरे साहब के लॉक डाउन की जरूरत क्या है जब सुबह सवेरे पूरा शहर एक दूसरे से मिल लेता है फिर उन्हें कैद करने की जरूरत क्या है यह रियायत भारी ना पड़ जाए सरकार को?  राज्य सरकार को इस और अपना ध्यान आकर्षण करना चाहिए कि लोगों को उनके घर बैठे सुविधाएं कैसे मिले ना कि राज्य सरकार अपने स्तर पर से बोझ उतार के लोगों के सर पर डाल दें अरे साहब राज्य के मुखिया आप हैं यह जिम्मेदारी भी आपकी बनती है कि आप जनता को तमाम दिक्कतों से बचाएं दिक्कत एक और भी आखिर मुख्यमंत्री कहां-कहां अपनी जिम्मेदारियां निभाई क्योंकि उनके पास ऐसे काबिल लोगों की कमी है जो ऐसी जिम्मेदारियां उठा सके जबकि सरकार को चाहिए इलाके के उन दुकानदारों को चिन्हित करें और उन दुकानदारों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए कि वहां पर रह रहे लोगों पूरे घर तक सामान पहुंचे ना कि जनता बाहर निकले तभी तो होगा लॉक डाउन का असर नहीं तो सब बेकार है जरा सोचिए? यंहा  सरकार से गुजारिश है कि खाने-पीने के सामान की 3 घंटे की रियायत को बंद कर देना चाहिए बल्कि यह जिम्मेदारी सरकार को अपने हाथ में लेनी चाहिए कि लोगों के घर में जरुरी सामान पहुंचे या इलाके की दुकानदारों को यह जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब राज्य सरकार की करी कराई मेहनत पर पानी फिर जाए, कहने को तो है लॉकडाउन लेकिन ऐसे लॉक डाउन का फायदा क्या है जिस भीड़भाड़ के संपर्क में ना आने की बातें कहकर लॉक डाउनलोड लाया गया क्या वह पूरा हो पा रहा है? बड़ा सवाल राज्य सरकार को सोचना चाहिए कि वाकई हम खतरे की तरफ तो नहीं बढ़ रहे? अन्यथा यह महामारी की रोकथाम करना बड़ा ही मुश्किल हो जाएगा यह तो वही बात हुई दिन रात पूरी सख़्ती लेकिन सुबह फिर वही भीड़-भाड़ इलाके में घूम घूम कर सामान खरीदने की मजबूरी…कोरोना वायरस को आप आमंत्रण दे रहे हैं या उससे बचने के लिए उपाय कर रहे हैं मुख्यमंत्री जी इलाकों की जिम्मेदारी के लिए अपने मेयर की टीम का सहारा क्यों नहीं लेते? जबकि नगर निगम की पार्षदों की टीम को इस कार्य की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी कि कालोनी वासी और अपने वार्ड मैं रह रहे सभी लोगों के घर तक जरूरी सामान पहुंचाना सुनिश्चित करें यह बेहतर विकल्प होता बजाए सुबह 7:00 बजे से लेकर 10:00 बजे तक बाजार को खोलने से… मुख्यमंत्री जी यह विभाग आपके पास है और जिम्मेदारी भी आप ही की बनती है हमारी सलाह यह है कि आप अच्छी टीम का निर्माण करें जिस जनता को कोरोना वायरस जैसी महामारी से बचने में मदद करें ना कि कोरोना वायरस को आमंत्रण करने में? अभी तो हम लोग बचे हुए हैं शायद…अगर ऐसे ही हम भीड़ भाड़ में रोज मिलते रहेंगे तो लॉक डाउन का कोई फायदा नहीं होगा माननीय मुख्यमंत्री जी आपसे दरख्वास्त है जरा इस तरफ भी अपना ध्यान आकर्षण करें…. 


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