औली में शाही शादी की अनुमति देकर फंसी सरकार, अब हाईकोर्ट में देना पड़ रहा है जवाब

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लोकजन टुडे, देहरादूनः नैनीताल हाईकोर्ट ने औली में 200 करोड़ की शाही शादी के मामले में सुनवाई हुई। कोर्ट की खंडपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार, डीएम चमोली एवं पर्यावरण कंट्रोल बोर्ड से 10 दिन में शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए है। साथ ही कोर्ट ने वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालिया जूयोलोजी, नीम फारेस्ट रिसर्च जी बी पंत हिमालयन सस्टेनेबल डेवलपमेंट विवेकानंद इंस्टिट्यूट अल्मोड़ा व् फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट को पार्टी बनाते हुए 2 सप्ताह के भीतर अपना जवाब कोर्ट के समक्ष पेश करने को कहा मामले की अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद नियत की गई है। आपको बता दे रक्षित जोशी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्यन्यायधीश की खंडपीठ ने पूर्व में डीएम चमोली, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूरी शादी की मोनिटरिंग कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे, जिसमे कहा गया था इस शादी से औली में पर्यावरण को खतरा है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ में काशीपुर के रक्षित जोशी की जनहित या याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट पेश की और बोर्ड मेंबर सेक्रेट्री कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने प्रदूषण बोर्ड द्वारा दायर शपथपत्र से संतुष्घ्ट न होकर उनसे दोबारा विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि शादी होने से पहले और उसके बाद औली में दो सौ मजदूर वहां थे जिनके लिए कोई टॉयलेट व अन्य की व्यव्स्था नहीं थी। शादी के दौरान वहां बारिश हुई थी, इनके द्वारा की गयी गन्दगी सीधे धौली गंगा में बहकर चली गयी। अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि शादी में पॉलीथिन से निर्मित वस्तुओं का प्रयोग किया गया। सफाई आदि के लिए जेसीबी मशीनों का प्रयोग किया गया। कोर्ट ने प्रदूषण बोर्ड से पूछा है कि 320 टन कूड़े का निस्तारण कैसे किया गया। क्या जैविक व अजैविक कूड़ा अलग किया या नहीं। धौली गंगा सहित उसके आस पास के जल श्रोतों को कितना नुकशान हुआ। कोर्ट ने प्रदूषण बोर्ड की आदेश दिए हैं कि वह दुबारा से जाँच करे कि वहाँ कितना पर्यावरण को नुकशान हुआ है इसके लिए जितना भी पैसा लगेगा वे उसका बिल जिला जिला अधिकारी चमोली को दें।
याचिकर्ता ने अपनी जनहित याचिका में इसकी जाँच कराने के लिए आज एफआराई, निम, वाडिया इंस्टिट्यूट व जियोलॉजिकल सर्वे आफ इण्डिया को पक्षकार बनाने की भी मांग की है। जिस पर कोर्ट ने इनको पक्षकार बनाया है। जिससे पता चल सके की औली बुग्याल है या नहीं शादी से वहां पर्यावरण को कितना नुकशान हुआ है। इसकी सही जनकारी कोर्ट को मिल सके। काशीपुर निवासी अधिवक्ता रक्षित जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड के औली बुग्याल में उद्योगपति के बेटों की शादी 18 से 22 जून तक होने जा रही है जिसमें मेहमानों को लाने ले जाने के लिए करीब 200 हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था की गई। इन हेलीकॉप्टरों से पर्यावरण को खतरा होगा साथ ही बुग्यालों और क्षेत्र में रहने वाले जंगली जानवरों को भी खतरा होगा। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट की खण्डपीठ द्वारा दिए गए पूर्व के आदेश की अनदेखी की जा रही है, जिसमें कोर्ट ने पहाड़ी क्षेत्रों में बुग्याल आदि में किसी भी प्रकार की गतिविधि में प्रतिबंध लगाया था।


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