एसएसपी देहरादून की सटीक रणनीति का दिखा असर; क्षेत्राधिकारी सहसपुर की थाना सेलाकुई टीम ने तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास की आड़ में ठगी करने वाला ढोंगी बाबा किया गिरफ्तार !

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संवाददाता :करन सहगल

बाईट: एसएसपी देहरादून

देहरादून पुलिस के ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना सेलाकुई पुलिस ने लोगों को अनिष्ट और भूत-प्रेत का भय दिखाकर ठगी करने वाले एक शातिर ‘ठग बाबा’ को गिरफ्तार किया है।

आरोपी के पास से पुलिस ने ठगे गए आभूषणों को गलाकर बनाया गया 150 ग्राम सोने का बिस्कुट (बार) और गहने बेचकर कमाए गए 5 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।

आखिर क्या था मामला और कैसे हुआ खुलासा?

शहीद किशन थापा मार्ग, सेलाकुई की रहने वाली ओशीन गुंरग (पत्नी अनीश गुरुग) ने 31 मई 2026 को थाना सेलाकुई में महंत राहुल थापा के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, करीब ढाई महीने पहले राहुल थापा ने महिला और उसके परिवार को किसी बड़े अनिष्ट का डर दिखाया। इस डर को दूर करने के लिए उसने घर पर अनुष्ठान का ढोंग रचा और धोखाधड़ी से पीड़ित परिवार का 65 तोला सोना गायब कर दिया।

शिकायत की प्राथमिक जांच में तथ्यों की पुष्टि होने के बाद, दिनांक 9 जून 2026 को थाना सेलाकुई पर आरोपी महंत राहुल थापा के विरुद्ध बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए और शीघ्र अनावरण हेतु एसएसपी देहरादून ने क्षेत्राधिकारी सहसपुर के नेतृत्व में सेलाकुई थाने की दो अलग-अलग टीमों का गठन किया। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने नामजद अभियुक्त राहुल थापा पुत्र गिरीश थापा, निवासी तेलपुरा अटक फॉर्म, सेलाकुई को हिरासत में लिया जिसने कड़ी पूछताछ होने पर अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर 150 ग्राम वजनी सोने का बिस्कुट और 5 लाख रुपये नकद बरामद कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में हुआ चौंकाने वाला खुलासा; ऐसे देता था वारदात को अंजाम

पूछताछ में आरोपी राहुल थापा ने बताया कि वह 2013 से पण्डिताई, माता की चौकी लगाने और भविष्य देखने का काम कर रहा था। कुछ समय से ज्यादा पैसे कमाने के लालच में उसने अमीर शिष्यों को ठगने की एक खौफनाक योजना बनाई।

▶️ आधी रात को फेंकता था टोटके की पोटली: आरोपी रात के अंधेरे में अपने शिकार के घर के बाहर चुपके से काले कपड़े में उड़द की दाल, रोली, लौंग और नींबू जैसी जादू-टोने की सामग्री की पोटली फेंक आता था।

▶️अगली सुबह फोन पर डराना: अगले दिन वह खुद फोन कर कहता कि मुझे सपना आया है कि आपके घर पर किसी ने बड़ा टोना-टोटका किया है।

▶️हाथ की सफाई से उड़ाता था जेवर: पीड़िता ओशीन गुंरग के मामले में भी उसने ऐसा ही किया। 1 मार्च 2026 की रात उसने पोटली फेंकी और अगले दिन वीडियो कॉल पर उसे ढूंढवाया। फिर घर पहुंचकर अनुष्ठान के नाम पर एक संदूक मंगवाया। पूजा के दौरान उसने ओशीन और उसकी मां के सारे जेवर एक पोटली में रखवाकर संदूक में डलवा दिए। इसके बाद मां-बेटी को चावल देकर छत की परिक्रमा के लिए भेज दिया और खुद मौका पाकर जेवर उड़ा लिए। उसने संदूक बंद कर मंदिर में रखवा दिया और कहा कि इसे 62 दिन बाद ही खोलना।

वीडियो कॉल और सम्मोहन का जाल​

ओशीन गुरुंग अभियुक्त की दूर की रिश्तेदार थी। अभियुक्त जानता था कि वह अपने माता-पिता की इकलौती बेटी है और उसके पास भारी मात्रा में सोने के आभूषण हैं। योजना के तहत उसने 1 मार्च 2026 की रात ओशीन के घर के बाहर काली पोटली फेंकी।

अगली सुबह (2 मार्च) फोन कर उसने ओशीन को गेट के पास जाने को कहा। ओशीन ने गेट पर पोटली देख वीडियो कॉल के जरिए उसे बाबा को दिखाया। इसके बाद बाबा तुरंत उसके घर पहुंच गया और अनिष्ट का खौफ दिखाकर अनुष्ठान शुरू कर दिया।

छत की परिक्रमा के बहाने पार कर दिए जेवर​

पूजा के दौरान ढोंगी बाबा ने ओशीन और उसकी मां के सारे आभूषण एक पोटली में बंधवाकर एक संदूक के अंदर रखवा दिए। इसके बाद उसने मां-बेटी को कुछ चावल के दाने देकर छत की परिक्रमा करने के लिए भेज दिया। मौका पाकर उसने संदूक से सारे जेवर निकाल लिए और संदूक बंद कर दिया। पूजा खत्म होने पर उसने संदूक को मंदिर में रखने और इसे पूरे 62 दिनों के बाद खोलने की हिदायत दी, ताकि उसे भागने का पूरा समय मिल सके।

पुलिस के लिए बड़ी चुनौती, आगे की रिमांड की तैयारी

​चूंकि घटना करीब तीन महीने पुरानी थी, इसलिए पुलिस के लिए सबूत और बरामदगी जुटाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। पुलिस अब अभियुक्त की पुलिस कस्टडी रिमांड(PCR) लेने की तैयारी कर रही है ताकि शेष आभूषणों को भी बरामद किया जा सके। पुलिस अभियुक्त के पुराने आपराधिक इतिहास और उसके मददगारों/सहयोगियों की भी सघन जांच कर रही है।

चूंकि यह घटना करीब तीन महीने पुरानी थी, इसलिए पुलिस के लिए सबूत और बरामदगी जुटाना एक बड़ी चुनौती थी। पुलिस का कहना है कि शेष आभूषणों की बरामदगी के लिए आरोपी की पुलिस कस्टडी रिमांड ली जाएगी। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस ठगी में राहुल थापा के साथ और कौन-कौन से सहयोगी शामिल थे और उसने पूर्व में किन-किन लोगों को अपना शिकार बनाया है।

इस ढोंगी का भंडाफोड़ करने वाली पुलिस टीम में क्षेत्राधिकारी सहसपुर अनुज कुमार, थानाध्यक्ष सेलाकुई लोकपाल परमार, वरिष्ठ उपनिरीक्षक विवेक भण्डारी, उपनिरीक्षक कृपाल सिंह, कॉन्स्टेबल सहसपाल, कॉन्स्टेबल इरशाद, कॉन्स्टेबल वीर सिंह और कॉन्स्टेबल अमित कुमार शामिल थे।

इसके साथ से एसओजी देहरादून से उपनिरीक्षक संदीप लोहान, हैड कॉन्स्टेबल चमन कुमार, हैड कॉन्स्टेबल किरन कुमार, कॉन्स्टेबल ललित, कॉन्स्टेबल आशीष, कॉन्स्टेबल देवेन्द्र एवं कॉन्स्टेबल सौरभ शामिल थे।


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