सीधी भर्ती में आरक्षण के रोस्टर पर रेखा आर्य को मिला यशपाल का साथ…

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LokJan Today(देहरादून): सीधी भर्ती में आरक्षण के रोस्टर पर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य को कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य का साथ मिला है। दोनों मंत्रियों ने सीधी भर्ती के आरक्षण में रोस्टर को लेकर गठित समिति के अध्यक्ष मदन कौशिक के सामने रोस्टर में किए गए बदलाव को लेकर अपना विरोध जताया और पूर्व की व्यवस्था के अनुसार ही रोस्टर में अनुसूचित जाति को पहले स्थान पर रखने की पैरवी की। इस पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा है कि समिति की जल्द ही बैठक होगी, जिसमें राज्यमंत्री रेखा आर्य द्वारा सुझाए गए सेवानिवृत्त अधिकारी की राय भी ली जाएगी।

उत्तराखंड में इस समय सीधी भर्ती और पदोन्नति में आरक्षण के मसले पर माहौल गर्माया हुआ है। सीधी भर्ती में आरक्षण के रोस्टर में किए गए बदलाव पर भी कर्मचारी संगठन आमने-सामने हैं। सरकार ने बीते वर्ष आरक्षण के रोस्टर में बदलाव करते हुए सामान्य वर्ग को पहले स्थान पर रखते हुए अनुसूचित जाति को छठवें स्थान पर रखा है। पूर्व में अनुसूचित जाति को पहले स्थान पर रखा हुआ था।

इस मामले में हुए हंगामे के बाद सरकार ने इसके परीक्षण के लिए मंत्रिमंडल की तीन सदस्यीय उप समिति का गठन किया। इस समिति में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, सुबोध उनियाल और राज्य मंत्री रेखा आर्य शामिल हैं। इस समिति की बैठक में रेखा आर्य ने शिरकत नहीं की।

इस बैठक में समिति के सदस्य सुबोध उनियाल व रेखा आर्य नहीं पहुंचे थे। सुबोध उनियाल किसी जरूरी काम से बाहर थे तो रेखा आर्य ने समिति के अधिकारियों में अनुसूचित जाति के अधिकारी को भी शामिल करने की पैरवी करते हुए बैठक में आने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कार्मिक विभाग द्वारा जारी किए गए कार्यवृत्त पर भी सवाल उठाए।

सुझाए गए अधिकारी का नाम समिति में शामिल न होने से खफा राज्यमंत्री रेखा आर्य ने मामले में कार्मिक विभाग पर मनमर्जी चलाने का आरोप तक लगा डाला। इसके बाद राज्य मंत्री रेखा आर्य ने कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के साथ कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा और पूर्व की व्यवस्था को बहाल रखने को कहा।

मंत्रिमंडलीय उप समिति के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सोमवार को केवल दोनों पक्षों की राय जानने के लिए बुलाया गया था। जिस अधिकारी का नाम राज्यमंत्री रेखा आर्य ने सुझाया, उनसे भी इस मसले पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद समिति की संस्तुति को कैबिनेट के सम्मुख लाया जाएगा। उन्होने कहा कि सरकार की मंशा है कि सबके हित सुरक्षित रहें।


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