काशीपुर में एसटीएफ और पुलिस का बड़ा ज्वाइंट ऑपरेशन: स्विफ्ट कार से भारी मात्रा में अवैध हथियारों का जखीरा और 237 कारतूस बरामद, 7 फर्जी लाइसेंस जब्त !

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संवाददाता :करन सहगल

बाईट: एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह

माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड के “अपराध मुक्त उत्तराखंड” के विजन और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशन में अवैध हथियारों के फर्जी लाइसेंस धारकों के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।

कल देर रात एक बड़े ज्वाइंट ऑपरेशन में उत्तराखंड एसटीएफ और जनपद ऊधमसिंह नगर पुलिस ने काशीपुर क्षेत्र से भारी मात्रा में अवैध शस्त्रों का जखीरा, कारतूस और फर्जी लाइसेंस बरामद करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि एसटीएफ को काशीपुर के कटोराताल क्षेत्र में एक स्विफ्ट कार (संख्या UK18P 5046) के भीतर भारी मात्रा में अवैध हथियार ले जाए जाने का एक अत्यंत गोपनीय इनपुट प्राप्त हुआ था। सूचना मिलते ही एसटीएफ प्रमुख द्वारा त्वरित रूप से टीम का गठन कर स्थानीय पुलिस को साथ लेकर छापेमारी के निर्देश दिए गए। संयुक्त टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए रात में ही संदिग्ध स्विफ्ट कार को अपने कब्जे में ले लिया। कार की तलाशी लेने पर उसके भीतर से 01 पम्प एक्शन बन्दूक (12 बोर), 01 सेमी ऑटोमैटिक राइफल (.22 बोर), 01 सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल (.32 बोर), और 01 रिवाल्वर (.32 बोर) सहित कुल 04 अत्याधुनिक अवैध हथियार, 04 मैगजीन, 237 विभिन्न बोर के जिंदा कारतूस तथा 07 फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किए गए।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बरामद किए गए सभी अवैध शस्त्र, कारतूस, कूटरचित लाइसेंस और वाहन इस मामले में नामजद अभियुक्तों के हैं। अभियुक्तों की पहचान सौरभ अग्रवाल, गौरव अग्रवाल (दोनों पुत्रगण राकेश अग्रवाल) तथा सौरभ अग्रवाल की पत्नी दीप्ति अग्रवाल के रूप में हुई है, जो सभी काशीपुर के मूल निवासी हैं। एसटीएफ ने बरामद सभी सामग्रियों को काशीपुर कोतवाली ले जाकर दाखिल करा दिया है तथा अभियुक्तों के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई तेजी से संचालित की जा रही है।

‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अब तक 5 आरोपी जेल में

यह संपूर्ण कार्रवाई बीते दिनों 04 जून 2026 को एसटीएफ द्वारा बाहरी राज्यों से उत्तराखंड में स्थानांतरित होकर आए शस्त्र लाइसेंसों की सत्यता जांच के उपरांत काशीपुर कोतवाली में दर्ज कराए गए मुकदमे (FIR No 213/2026) की विवेचना के क्रम में हुई है। यह मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4), 338, 336(3), 340, 61(2), 3(5) और 111 के अंतर्गत पंजीकृत है। एसएसपी एसटीएफ ने स्पष्ट किया कि अब तक इस फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले के तहत विभिन्न जनपदों में कुल 3 अभियोग दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें संलिप्त 5 मुख्य अभियुक्तों को जेल भेजा जा चुका है।

अपराधियों को एसएसपी एसटीएफ की कड़ी चेतावनी

एसएसपी एसटीएफ ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बाहरी राज्यों से फर्जी तरीके से लाइसेंस बनवाकर और फिर उसे उत्तराखंड में स्थानांतरित कराकर इस्तेमाल करने वाले तमाम अपराधी अब स्पेशल टास्क फोर्स के रडार पर हैं। उन्होंने अपील की कि ऐसे फर्जी शस्त्र धारक कानून के शिकंजे से बचने के लिए अभी भी अपने अवैध वेपन पुलिस के समक्ष सरेंडर कर सकते हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था के लिए एक अत्यंत गंभीर खतरा हैं, जिसे देखते हुए उत्तराखंड पुलिस “जीरो टॉलरेंस” की नीति के तहत अपराधियों के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। वर्तमान में राज्य भर में ऐसे हजारों स्थानांतरित लाइसेंसों और उनके धारकों का सघन सत्यापन अभियान जारी है।

📢 एसटीएफ द्वारा आम जनता से भी यह अपील की गई है कि यदि किसी भी व्यक्ति को फर्जी अथवा संदिग्ध शस्त्र लाइसेंसों के संबंध में कोई भी सूचना प्राप्त होती है, तो वे तत्काल एसटीएफ के मोबाइल नंबर 9412029536 पर सूचित करें। सूचना देने वाले नागरिक का नाम और पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।

इस सफल ऑपरेशन को धरातल पर उतारने में निरीक्षक अरुण कुमार, निरीक्षक एम0पी0सिंह, कांस्टेबल गुरवंत सिंह, कांस्टेबल मोहित वर्मा एवं कांस्टेबल सोनू पाण्डे शामिल थे।


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