फर्जी शस्त्र लाइसेंस धारकों पर उत्तराखंड एसटीएफ का बड़ा एक्शन: रुद्रपुर से मुख्य आरोपी सौरभ अग्रवाल सहित दो गिरफ्तार, भारी मात्रा में स्वचालित हथियार व कारतूस बरामद !

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संवाददाता :करन सहगल

माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड के कड़े निर्देशों और पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री दीपम सेठ के कुशल मार्गदर्शन में अवैध हथियारों के फर्जी लाइसेंस धारकों के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में एसटीएफ ने कल देर रात एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए रुद्रपुर क्षेत्र से दो मुख्य अभियुक्तों को भारी मात्रा में अवैध स्वचालित हथियारों, कारतूसों और फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के साथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में पूर्व में दर्ज मुकदमे का नामजद और फरार चल रहा मुख्य आरोपी सौरभ अग्रवाल भी शामिल है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, एसटीएफ उत्तराखंड द्वारा बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए संदिग्ध शस्त्र लाइसेंसों की सत्यता की जांच की जा रही थी। इस जांच के उपरांत 4 जून 2026 को जनपद उधमसिंह नगर के काशीपुर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। इसी विवेचना के क्रम में बीते 10 जून 2026 की रात को एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में काशीपुर क्षेत्र से एक स्विफ्ट कार से 04 अवैध हथियार और 237 कारतूस बरामद किए थे। यह कार और हथियार मुकदमे के नामजद आरोपी सौरभ अग्रवाल, गौरव अग्रवाल और दीप्ति अग्रवाल के पाए गए थे, जिसके बाद से ही आरोपी फरार चल रहे थे।

एसएसपी एसटीएफ की मॉनिटरिंग में गठित विभिन्न टीमें फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही थीं। इसी क्रम में 11 जून 2026 की देर रात को गोपनीय इनपुट के आधार पर एसटीएफ ने रुद्रपुर रोडवेज के पास घेराबंदी कर मुख्य अभियुक्त सौरभ अग्रवाल (पुत्र राकेश कुमार अग्रवाल, निवासी काशीपुर) और उसके ड्राइवर अमित पाल (पुत्र प्रमोद पाल, निवासी कटोराताल, काशीपुर) को हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान इनके कब्जे से 01 पंप एक्शन बंदूक ऑटोमैटिक (12 बोर), 01 पिस्टल ऑटोमैटिक (30 बोर), 01 पिस्टल ऑटोमैटिक (32 बोर), 08 विभिन्न बोर के जिंदा कारतूस और दो जाली (कूटरचित) शस्त्र लाइसेंस बरामद किए गए। पूछताछ में खुलासा हुआ कि 10 जून को पकड़ी गई स्विफ्ट कार को ड्राइवर अमित पाल ने सबूत मिटाने और साक्ष्यों को छुपाने की नियत से काशीपुर की एक पार्किंग में छुपा दिया था। एसटीएफ ने अमित पाल के पास से उस कार की चाबी भी बरामद कर ली है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) एसटीएफ ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट के खिलाफ एसटीएफ की कई टीमें लगातार कार्य कर रही हैं। अब तक इस संबंध में विभिन्न जनपदों में 3 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें संलिप्त 7 अभियुक्तों को जेल भेजा जा चुका है। पुलिस ने अब तक कुल 12 अवैध शस्त्र, 315 कारतूस और कई फर्जी लाइसेंस बरामद करने में सफलता प्राप्त की है। एसएसपी ने साफ किया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई अन्य चौंकाने वाले और सनसनीखेज खुलासे हुए हैं, जिसके आधार पर सूचनाएं विकसित की जा रही हैं और जल्द ही अन्य अवैध शस्त्र धारकों के खिलाफ भी सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

एसटीएफ के अनुसार, उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए ऐसे हजारों शस्त्र लाइसेंसों और उनके धारकों का सघन सत्यापन कार्य जारी है। जांच के दौरान मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे भी लगातार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के लिए एक बेहद गंभीर खतरा हैं, जिसे देखते हुए उत्तराखंड पुलिस “जीरो टॉलरेंस” की नीति के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है।

कार्रवाई करने वाली एसटीएफ उत्तराखंड टीम में निरीक्षक विकास चौधरी, निरीक्षक अरुण कुमार, निरीक्षक एम०पी० सिंह, उप-निरीक्षक विपिन चन्द्र जोशी, उप-निरीक्षक कृष्ण गोपाल मठपाल, हेड कांस्टेबल क्रमशः रविन्द्र सिंह बिष्ट, महेन्द्र गिरी, सुरेन्द्र सावंत, संजय कुमार, कांस्टेबल सोनू पाण्डे एवं सर्विलांस विंग से किशन चन्द्र शर्मा शामिल रहे।


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