क्यों कह रहे हैं आंदोलनकारी आज है धिक्कार दिवस

Share your love

कुलदीप रावत

उत्तराखंड राज्य निर्माण की पहली शहादत,, खटीमा गोली कांड,, की 25वीं बरसी को आज राज्य आंदोलनकारियों ने याद करते हुए शहीद हुए आंदोलनकारियों को देहरादून के शहीद स्मारक में श्रद्धांजली दी। राज्य आंदोलनकारियों ने खटीमा कांड की 25वीं बरसी पर अभी तक दोषियों को सज़ा ना मिलने का आक्रोश जताते हुए धिक्कार दिवस का नाम दिया। धिक्कार दिवस पर सैकड़ों की संख्या में राज्य आंदोलनकारी शहीद स्मारक देहरादून में एकत्रित हुए और शहीदों की शहादत को याद किया।

1 सितम्बर 1994 को खटीमा गोलीकांड में अलग राज्य की लड़ाई लड़ रहे 7 आंदोलनकारियों ने अपनी शहादत दी थी, पुलिसकर्मियों द्धारा राज्य आंदोलनकारियों पर गोलियां चलाई गई थीं। 1 सितम्बर का दिन राज्य आंदोलनकारियों की शहादत का दिन है क्योंकि इस दिन खटीमा में उत्तराखंड को अलग राज्य की मांग कर रहे लोगों पर फायरिंग की गई थी।
राज्य आंदोलनकारियों का कहना है की भले ही शहादत के बाद हमें सन 2000 में अलग राज्य मिला लेकिन खटीमा गोलीकांड के दोषियों को कोई भी सरकार सज़ा नहीं दिला पाई है, साथ ही राज्य आंदोलनकारियों का ये भी कहना है की जिस राज्य की अवधारणा को लेकर लोग सड़कों पर भूखे प्यासे निकले थे,, वो राज्य की अवधारणा कहीं नज़र नहीं आती है। आंदोलनकारियों ने खटीमा गोलीकांड को याद करते हुए कहा की दोषियों को अभी तक सज़ा ना मिलने से वो आहत हैं और इसी वजह से 25वीं बरसी को आज धिक्कार दिवस का नाम दिया है।


Discover more from Lokjan Today

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *