इच्छाधारी नागनागिन की रहस्यमई पूजा ।

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सिद्धपीठ माँ अटरिया देवी मंदिर में होते है आज भी चमत्कार

राजीव रूद्रपुर – आपको इस कलयुग में एक ऐसे मंदिर से रूबरू कराते है जहा आज भी पूर्णिमा कि रात को आता है इच्छा धारी नागनागिन का जोड़ा , जी हाँ आपको बता दे उत्तराखंड के जनपद उधमसिंह नगर के रुद्रपुर के एक मंदिर में माँ के दर्शन करने आता है यह इच्छाधारी नागनागिन का जोड़ा, हालंकि इस मंदिर में जिस पूर्णिमा कि रात को यह जोड़ा माँ के दर्शन के लिए आता है उस रात 11 बजे से ही भक्तो के दर्शन को रोक दिया जाता है क्यों कि मान्यता है कि इस नागनागिन के जोड़े को देखना मना है ,

उत्तराखंड एक ऐसा प्रदेश जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है जहा देवी देवताओ ने वास किया वही उधमसिंह नगर जनपद के रुद्रपुर के माँ अटारिया देवी मंदिर का भी अपना एक इतिहास है इस मंदिर कि स्थापना रुद्रपुर के राजा रुद्रप्रताप सेन ने कराया था , एक दिन राजा अपनी रियासत में भ्रमण पर निकले, राजा जब वापस लौट रहे थे तभी राजा ने एक पेड़ के नीचे और कुंए के पास आराम करने के लिए रुक गए , राजा को कुंए से आवाज़ आई मुझे बाहार निकालो और मेरे मंदिर कि स्थापना कराई , राजा ने अपने सिपाहियों कि मदद से कुंए से माँ कि सोने कि प्रतिमा को बाहर निकाला और एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया , जंगलो के बीच माँ कि प्रतिमा को कई बार डकेतो के द्वारा भी चोरी करने का प्रयास किया गया लेकिन माँ कि शक्ति के चलते डकेत मंदिर से बाहर ही नहीं निकल सके , जिसके बाद नवरात्रों में होली के 15 दिन बाद यहाँ माँ अटारिया देवी का मेला लगता है और माँ कि प्रतिमा को कड़ी सुरक्षा के बीच में भारतीय स्टेट बैंक से डोली में विराज मान कर लाया जाता है और माँ कि प्रतिमा को मंदिर में स्थापित कर 15 से 20 दिन चलने वाले मेले में आने वाले श्रधालुओ के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच दर्शन कराये जाते है ,

इस मंदिर कि मान्यता है है कि इस मंदिर में कुछ सालो पहले एक बुडा बब्बर शेर भी दर्शनों को आया करता था और दर्शन करके चला जाया करता था लेकिन अब आबादी बढ़ने और जंगलो का कटान होने के बाद अब शेर का भी आना बंद हो गया , जब इस मंदिर में शेर आया करता था तो किसी भी श्रद्धालु को बिना कोई नुकसान पहुचाये माँ के दर्शन करने जंगल में लौट जाया करता था , वही इस शेर के साथ ही एक इच्छा धारी नागनागिन का जोड़ा भी कई वर्षो से खास पूर्णिमा कि रात को माँ के दर्शनों को आता है,

इस इच्छाधारी नाग नागिन के जोड़े के बारे में बताया जाता है कि यह जोड़ा मंदिर में माँ के दर्शन और पूजा अर्चना के लिए आता है , जहा श्रधालुओ के लिए इस मंदिर में कपाट 24 घंटे खुले रहते है , वही पूर्णिमा की रात को मंदिर के कपाट श्रधालुओ के लिए सिर्फ 11 बजे तक के लिए ही खोले जाते है , क्यों 12 बजे से शुरू होती है नागनगिन की पूजा , इसी लिए मंदिर से माइक के द्वारा सुचना और चेतावनी दी जाती है कि मनिदर को खाली कर दे , और मंदिर से बाहार हो जाए , सब श्रधालुओ को बाहार करने के बाद मंदिर कि साफ़ सफाई कराई जाती है और मंदिर में पूजा अर्चना कि सामग्री मंदिर में रख दी जाती है , ताकि नाग नागिन का जोड़ा बिना रोक टोक माँ कि पूजा अर्चना कर सके , पुजारियों का कहना है नाग नागिन कि पूजा अर्चना के अवशेष सुबह मंदिर के कपाट खोलने पर मिलते है , इस मंदिर में देश ही नहीं विदेशो से भी श्रद्धालु यहाँ माँ के दरबार में अपनी मनोकामना मांगने आते है , यहाँ मांगी गयी हर मुराद माँ के आशीर्वाद से पूरी होती है ,


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