आ भी जाओ पापा…मासूमो की गुहार क्या सुनेंगे मुख्यमंत्री जी
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रिपोर्ट कुलदीप रावत देहरादून
उत्तराखण्ड में इन दिनों सोशल मीडिया में कुछ ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं। जिन्हें देखकर और सुनकर हर कोई भावुक हो जा रहा है सरकार के इस नकारात्मक रवैए का खामियाजा इन आंदोलन कर्मी के परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। इन वीडियों में आपातकालीन सेवा 108 के पूर्व कर्मियों के परिजनों ने मार्मिक लहज़े में अपील की है। पिछले 70 दिनों से नौकरी और भविष्य की लड़ाई में पूर्व कर्मचारियों के बच्चों का भविष्य भी अंधेरे में नज़र आ रहा है।
जब इन कर्मचारियों ने लड़ाई शुरू की तो इन्हें इस बात का इल्म नहीं था कि सरकार उनको पूरी तरह से दरकिनार कर देगी। आज 108 सेवा के ये सभी पूर्व कर्मी सड़क पर आ गए हैं अब वो न तो घर जाना चाहते हैं और न ही अपने साथियों को छोड़ना।
काशीपुर के अजय सिंह के परिजन अब इन्हें वापस बुलाकर कोई और काम करने की सलाह दे रहे हैं। इनके बच्चे भी घर बुलाया रहे कि बस अब बहुत हो गया घर वापस आ जाओ। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो और परिजनों की इस पुकार को सुनकर किसी का भी कलेजा बाहर आ जाये। बच्चों की छुट्टियां खत्म हो गयी है और स्कूलों में फीस भी जमा करनी है। लेकिन परिजनों के पास पैसे और धैर्य समाप्त हो गया है। अजय सिंह का कहना है कि अब की मुंह लेकर अपने घर जाएं।
दरअसल उत्तराखण्ड में आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 के 717 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। साथ ही मार्च और अप्रैल का वेतन भी रोक लिया गया था। कर्मचारी बकाया वेतन और 108 सेवा का संचालन करने वाली नई कंपनी ‘कैंप’ में खुद को समायोजित करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों के परिजन शुरू से उनके साथ ही है। देहरादून के ओम कपूर ब्लड प्रेशर के मरीज हैं और पत्नी और बच्चे के साथ धरने पर बैठे हैं। 108 का कोई भी कर्मचारी अपनी लड़ाई बीच में छोड़कर नहीं जाना चाहता। बच्चों की फीस कैसे भरेंगे और अपना आगे का भविष्य कैसा होगा कुछ भी तय नहीं है।
उत्तराखंड में 108 आपातकालीन सेवा की शुरूआत 15 मई 2008 को दस गाड़ियों से हुई थी जिनकी संख्या वर्तमान में बढ़कर 139 तक पहुंच चुकी है। सरकार ने अब इस सेवा के संचालन की जिम्मेदारी नई कम्पनी को दे दी है। नई कम्पनी ने पुराने कर्मियों को दरकिनार कर उनमें से अधिकांश को सेवा से निकाल दिया है। अब नई कंपनी में समायोजन की मांग को लेकर आपाताकालीन एंबुलेंस सेवा 108 के 717 पूर्व कर्मचारी 70 दिनों से धरने पर बैठे हैं। इन कर्मचारियों ने सरकार से आर-पार की लड़ाई तेज कर दी है। इन कर्मियों में काफी संख्या में महिला कर्मचारी भी हैं। ऐसी ही एक महिला कर्मचारी सभी साथियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। कर्मचारियों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर इच्छा मृत्यु की भी मांग की है।
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