अब खुल जाएगा अस्पताल!

लोकजन टुडे, देहरादून

आपने अक्षय कुमार जॉनी लीवर की एक फिल्म जरूर देखी होगी जिसमें एक कोर्ट केस जीतने के बाद अक्षय कुमार के हिस्से में रोड रोलर आता है हालांकि वह खराब होता है मैकेनिक जो की जॉनी लीवर है उन्हें जब बुलाया जाता है तो वह यही कहते हैं अभी सही कर देता हूं और यह डायलॉग वह इतनी बार कहते हैं ठीक करने की जगह रोड रोलर के पुर्जे सब खराब कर देते हैं…

ऐसा ही कुछ वाक्या इन दिनों उत्तराखंड के एक प्राइवेट अस्पताल के सीज होने के बाद देखने को मिल रहा है….

जिस अस्पताल में कुछ दिन पहले आग लगी, जहां एक महिला की दर्दनाक मौत हुई, जहां मानव संवेदनाएं झुलस गईं और पूरे प्रदेश में आक्रोश की लहर दौड़ गई, उस अस्पताल को सरकार ने बंद कर दिया। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल स्वयं मौके पर पहुंचे, निरीक्षण किया और हालात देखकर अस्पताल का लाइसेंस निलंबित करते हुए जांच पूरी होने तक उसे सीज कर दिया।लेकिन अब एक नई खबर बाजार में तैर रही है।

खबर यह है कि अस्पताल का प्रतिनिधि बनकर एक प्राइवेट ठेकेदार इन दिनों पूरी सक्रियता में हैं। दरवाजे खटखटा रहे हैं, सिफारिशों के पुल बना रहे हैं, फोन घुमा रहे हैं और जहां भी दो लोग मिल जाएं, वहीं घोषणा कर रहे हैं “अब खुल जाएगा अस्पताल!”

उनका आत्मविश्वास देखने लायक है। जांच किस मोड़ पर है, रिपोर्ट क्या कहती है, जिम्मेदारी किसकी तय होगी, यह सब बाद की बातें हैं। फिलहाल उनका दावा इतना मजबूत है कि लगता है मानो जांच समिति भी उनसे ही पूछकर रिपोर्ट लिखेगी।लोग बताते हैं कि अस्पताल की ओर से उन्हें सभी सुख-सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन कहते हैं कि इंसान की इच्छाओं का कोई अंत नहीं होता। इसलिए अब वह अपने हिस्से का दायरा और बढ़ाने के लिए विशेष प्रयासों में जुटे हुए हैं।उधर आम जनता अभी भी यह सोच रही है कि जिस हादसे में एक परिवार उजड़ गया, उसके दोषियों की जवाबदेही तय होगी या नहीं। लेकिन इधर कुछ लोगों को पूरी चिंता इस बात की है कि अस्पताल के ताले कब खुलेंगे।

स्थिति ऐसी है कि मानो अस्पताल का नाम ही बदलकर “अब खुल जाएगा अस्पताल” रख दिया गया हो।

सुबह चाय की दुकान पर पूछो “क्या हाल है?

जवाब आता है “अब खुल जाएगा अस्पताल।”

दोपहर में मिलो “अब खुल जाएगा अस्पताल।”

शाम को फिर मिलो “अब खुल जाएगा अस्पताल।”

मानो प्रदेश की सारी समस्याओं का समाधान इसी एक वाक्य में छिपा हो।अब देखना यह होगा कि संघ, संगठन और सरकार में दखल रखने का दावा करने वाले यह महाशय अपनी भविष्यवाणी को कब तक सच साबित कर पाते हैं।

क्योंकि फिलहाल तो वे जहां भी जा रहे हैं, एक ही संदेश दे रहे हैं “अब खुल जाएगा अस्पताल!”

और जनता चुपचाप यह देख रही है कि आखिर पहले खुलता क्या हैजांच की फाइल, जिम्मेदारी की परतें, या फिर… अस्पताल।


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