उत्तराखंड में 6 महीने के लिए हड़ताल प्रतिबंधित: ESMA लागू !

Share your love

ब्यूरो ऑफिस, लोकजन टुडे

उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अगले 6 महीने के लिए सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कार्मिक विभाग ने उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम, 1966 (उत्तराखंड राज्य में यथा प्रवृत्त), जिसे आमतौर पर ESMA (Essential Services Maintenance Act) कहा जाता है, लागू कर दिया है।

यह आदेश 30 जुलाई 2026 को जारी किया गया और तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

आदेश की आधिकारिक जानकारीजारीकर्ता: कार्मिक विभागअधिकारी: सचिव कार्मिक शैलेश बगोली

कानूनी प्रावधान: उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम, 1966 की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन राज्यपाल के आदेश से जारीअवधि: अधिसूचना जारी होने की तिथि से 6 महीने तक

प्रभाव: राज्याधीन सभी सेवाओं में किसी भी प्रकार की हड़ताल पूरी तरह वर्जित

क्यों लगाया गया ESMA?

सरकार का कहना है कि यह कदम लोकहित में उठाया गया है। मुख्य कारण इस प्रकार हैं:आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना (स्वास्थ्य, बिजली, पानी, परिवहन आदि)।चारधाम यात्रा चल रही है। यात्रा के दौरान किसी भी तरह की बाधा से बचने के लिए। मानसून सक्रिय है। आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में कोई व्यवधान न आए।

विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा अपनी मांग को लेकर आंदोलन और हड़ताल की संभावना को देखते हुए एहतियाती कदम।

ESMA क्या है ?

ESMA (Essential Services Maintenance Act) यानी अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम एक ऐसा कानून है, जिसके जरिए सरकार आवश्यक सेवाओं में हड़ताल पर रोक लगा सकती है। इसका उद्देश्य आम जनता को मिलने वाली जरूरी सरकारी सेवाओं को बाधित होने से बचाना है।

इस कानून के तहत: हड़ताल को अवैध घोषित किया जा सकता है।उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों/संगठनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। गिरफ्तारी और अन्य दंडात्मक प्रावधान लागू हो सकते हैं।

किसे प्रभावित करेगा?

राज्य सरकार के अधीन सभी विभागों के कर्मचारी, निगम, स्थानीय निकाय और अन्य राज्याधीन सेवाओं से जुड़े कर्मी कर्मचारी संगठन और यूनियन

नोट: यह प्रतिबंध सिर्फ राज्याधीन सेवाओं पर लागू है। केंद्रीय कर्मचारियों पर इसका सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

पृष्ठभूमि

हाल के दिनों में प्रदेश के कई कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर सक्रिय थे। देहरादून नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जैसी घटनाएं भी सामने आई थीं। सरकार ने इन संभावित आंदोलनों को देखते हुए पहले से ही रोक लगाने का फैसला लिया।आगे की स्थितिआदेश के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

कर्मचारी संगठन इस फैसले पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं। 6 महीने बाद स्थिति के अनुसार सरकार नया फैसला ले सकती है।


Discover more from Lokjan Today

Subscribe to get the latest posts sent to your email.