कोरोनेशन अस्पताल की बदहाली पर भड़के संवेदनशील डीएम डॉ. आशीष चौहान; लावारिस मरीज के लिए साक्षात ‘देवदूत’ !

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संवाददाता: करन सहगल

अपनी कर्तव्यनिष्ठ, त्वरित और जन-सरोकारी प्रशासनिक शैली के लिए प्रसिद्ध देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार की रात ठीक 8:00 बजे जिला कोरोनेशन अस्पताल का अचानक औचक निरीक्षण किया।

जिलाधिकारी के इस औचक कदम से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रबंधन की भारी लापरवाही, गंदगी और घोर अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं। जनता के स्वास्थ्य और अधिकारों के प्रति बेहद संवेदनशील जिलाधिकारी ने इस बदहाली पर गहरी नाराजगी जताते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल सख्त दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की एक संयुक्त जांच समिति गठित कर तत्काल रिपोर्ट तलब की है।

मरीज के लिए साक्षात ‘देवदूत’ बने डॉ. आशीष चौहान

अस्पताल के सर्जरी वार्ड में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान एक लावारिस और बेसहारा मरीज के लिए साक्षात ‘देवदूत’ बनकर पहुंचे। उस समय मरीज की हालत अत्यंत नाजुक थी और उसका शुगर लेवल गिरकर 40 से भी कम हो चुका था, लेकिन अस्पताल का कोई भी स्टाफ उसकी सुध लेने वाला नहीं था।

मरीज के चारों ओर गंदगी का अंबार था और बासी खाने की प्लेटें सड़ रही थीं। जिलाधिकारी ने बिना एक पल गंवाए अपनी त्वरित निर्णय क्षमता का परिचय दिया और प्रशासनिक सक्रियता दिखाते हुए तड़पते हुए मरीज को तत्काल आपातकालीन जीवन रक्षक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। डीएम की इस तत्परता ने न केवल एक बेसहारा की जान बचाई, बल्कि सरकारी तंत्र को संवेदनशीलता का अनूठा पाठ भी पढ़ाया।

आईसीयू में उमस, रजिस्टर खाली और पीआरओ पर गिरी गाज

जिलाधिकारी जब सबसे पहले आईसीयू वार्ड में पहुंचे, तो वहां की स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी। जीवन रक्षक माने जाने वाले आईसीयू में मानक के विपरीत एयर कंडीशनर बंद पड़ा था, जिसके कारण जीवन और मौत से जूझ रहे मरीज उमस और सफोकेशन (घुटन) से बेहाल थे। बेहद संवेदनशील और मुस्तैद जिलाधिकारी के बार-बार निर्देश देने के बावजूद अस्पताल के पीआरओ (PRO) ने एसी चालू कराने में कोई तत्परता नहीं दिखाई। पीआरओ की इस घोर संवेदनहीनता पर कड़ा रुख अपनाते हुए डीएम डॉ. आशीष चौहान ने उनके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी किए और सीएमएस से स्पष्टीकरण मांगा। इसके अतिरिक्त, आईसीयू के स्टॉक रजिस्टर में 29 जून से दवाओं का कोई विवरण दर्ज नहीं था, सिस्टर इंचार्ज आकस्मिक अवकाश पर थीं और कार्मिकों के उपस्थिति रजिस्टर में भी भारी खामियां पाई गईं।

गंभीर मरीज को अनावश्यक रेफर करने पर जताई सख्त नाराज़गी

इसके बाद जिलाधिकारी ने अस्पताल के बाल रोग कक्ष, पुरुष, महिला और सर्जरी वार्डों का भी गहन निरीक्षण किया, जहां अव्यवस्थाएं चरम पर मिलीं। पुरुष वार्ड में लीवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित एक ऐसे मरीज को जबरन अन्यत्र रेफर करने की तैयारी की जा रही थी, जिसका इलाज इसी अस्पताल में आसानी से होकर वह रिकवर हो सकता था। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये और अनावश्यक रेफरल पर डीएम ने अस्पताल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। इसके साथ ही, मरीज को ओढ़ने के लिए फटी हुई कंबल दी गई थी, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उन्होंने अस्पताल मैटर्न से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा और सभी फटे कंबलों को तुरंत नष्ट करने का आदेश दिया।

अस्पताल की लिफ्ट की दुर्दशा देखकर भी जिलाधिकारी का पारा चढ़ गया, जहां चारों तरफ पान की पीक और गंदगी पसरी हुई थी, तथा सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरा तक नहीं लगाया गया था। हद तो तब हो गई जब महिला शौचालय में पुरुष यूरिनल लगा मिला, जिस पर जिलाधिकारी ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर तीव्र रोष व्यक्त किया। जिलाधिकारी के औचक आगमन की भनक लगते ही प्रशासनिक अमले के पहुंचने से मात्र पांच मिनट पहले वार्डों में आनन-फान में पोछा लगाकर कमियों को छुपाने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे डीएम की पारखी नजरों ने पकड़ लिया।

व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश, मरीजों से लिया सीधा फीडबैक

जनता को उत्कृष्ट और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सीएमओ और सीएमएस को संयुक्त रूप से अस्पताल की इन सभी परिलक्षित कमियों और व्यवस्थागत खामियों को तत्काल युद्धस्तर पर दूर करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने खुद वार्डों में जाकर एक-एक मरीज से आत्मीयता से बात की, उनका कुशलक्षेम जाना और अस्पताल से मिल रही सुविधाओं का सीधा फीडबैक लिया। इस दौरान आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी मनीष शर्मा सहित अस्पताल के अन्य चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।


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