महिलाओं की सुरक्षा के लिए “सखी वन स्टॉप सेंटर” होगा और सक्रिय, डीएम आशीष चौहान ने दिए त्वरित सहायता के निर्देश

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संवाददाता : करन सहगल

पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय और सुरक्षा प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी देहरादून ने ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी व सक्रिय बनाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि संकट में फंसी किसी भी महिला को सहायता मिलने में जरा भी देरी नहीं होनी चाहिए।

त्वरित सहायता और संवेदनशीलता पर जोर

समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सखी वन स्टॉप सेंटर पर आने वाली हर शिकायत का निपटारा संवेदनशीलता और तत्परता से किया जाए। केंद्र को निर्देश दिए गए हैं कि वे पुलिस, स्वास्थ्य और विधिक (कानूनी) सहायता टीमों के साथ मिलकर 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहें, ताकि आपातकालीन स्थिति में पीड़ित महिला तक तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

क्या है ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’?

यह केंद्र विभिन्न प्रकार की हिंसा (जैसे घरेलू हिंसा, उत्पीड़न या शोषण) से पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे कई महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान करता है:

० आपातकालीन बचाव और आश्रय: संकट के समय महिलाओं को सुरक्षित स्थान और अस्थाई आश्रय देना।

० चिकित्सीय सहायता: घायल या पीड़ित महिलाओं को तुरंत इलाज की सुविधा।

० कानूनी और मनोवैज्ञानिक परामर्श: कानूनी कार्रवाई के लिए मुफ्त विधिक सलाह और मानसिक संबल देने के लिए काउंसलिंग।

लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वन स्टॉप सेंटर के कामकाज की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि इसकी सक्रियता और उपयोगिता धरातल पर बनी रहे। प्रशासन का उद्देश्य जिले की हर महिला को यह भरोसा दिलाना है कि संकट के समय वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।


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