राम को जानना है तो राम सा बनना होगा

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अयोध्या: पूरा देश अभी राम लला के स्वागत मे लगा हुआ है। 22 जनवरी वह दिन है, जिस दिन राम लला अपनी अयोध्या मे फिर से विराजमान होंगे। भगवान राम के स्वागत मे सभी रमे हुए है। जय श्री राम के नारों से अंबर गुँज रहा है। लेकिन क्या आप वाकई मे जानते है की असल मे राम है कौन ?

संयम और संघर्ष
राम जी राज घराने मे जन्मे थे। सारे ठाट बाट मे , लेकिन फिर भी अपने राजतिलक के मात्र एक दिन पहले उन्हे राज मुकुट के बदले , वनवास को चुनना पड़ा। माता कैकई के एक बार कहने से ही वे राजपाट को त्याग,वनवास चल दिए। एक बार भी विद्रोह नहीं किया। इतना संयम और त्याग कोई और कर सकता है क्या। शयाद नहीं

जीवन में कभी- कभी हालात इस तरह हमारे विपरीत हो जाते हैं कि हम हार मान जाते हैं, और तुरंत ही उन हालातों के वश में हो जाते हैं। हम बिलकुल भी संयम नहीं रख पाते । जबकि उस समय सबसे अधिक आवश्यकता ही संयम और धैर्य रखने कि होती है। ऐसा समय भगवान श्री राम के जीवन में भी कई बार आया।

सीता हरण, रावण मरण
14 वर्ष के वनवास के दौरान जब लंका नरेश रावण,सीता माता हरण कर ले गया। तब लंका जाने के मार्ग में, समुद्र सबसे बड़ा अवरोध बना हुआ था। कोई और दूसरा मार्ग नहीं होने के कारण सभी चिंता में डूबे हुए थे कि आखिर इस मार्ग को कैसे पार किया जाएगा। भगवान श्री राम के लिए तो वैसे, कुछ भी मुश्किल नहीं था, वो चाहते तो पल भर में समुद्र को सूखा देते परंतु उन्होंने ऐसा न करते हुए धैर्य और संयम से उस समय काम लिया।

लक्ष्मण जी चाहते थे की समुद्र को सूखा कर आगे बड़ा जाए, परंतु भगवान राम ने ऐसा नहीं किया और समुद्र से विनती की,आगे का मार्ग देने की। कुछ समय बाद समुद्र ने खुद ही आगे का मार्ग बताया। यह भगवान श्री राम के धैर्य और संयम का ही परिणाम था की उन्हें हर जगह विजय प्राप्त हुई।

सफलता हासिल करने के लिए हमे सबसे पहले जीवन में संयम और धैर्य को अपनाना होगा।

ज्ञान का सम्मान
रावण,प्रभु राम का दुश्मन था। इसके पश्चात भी रावण के मृत्यु शय्या मे होने पर प्रभु राम ने लक्ष्मण को रावण से ज्ञान लेने को कहा। राम जी को यह करते देखकर सब हतप्रभ थे। रावण बहुत बड़ा ज्ञानी और सबसे बड़ा शिव भक्त था। जिसके कारण ही श्री राम ने लक्ष्मण को उनसे ज्ञान लेने को कहा।

वनवास खत्म होने के बाद भी राम ने कई कष्ठों को झेला। उन्हे राजपाट तो मिला लेकिन अपनी प्राणप्रिया यानि सीता माँ को वनवास जाना पड़ा। राम ने कई कष्ठों को झेला है। फिर भी राम के मुख पर कभी भी चिंता की रेखा नहीं रही। उनकी राज्य मे कोई व्यक्ति कभी भी दुखी नहीं रहा। और यही वजह है की आज राम लला के वापस अयोध्या मे,विराजमान होने पर पूरे भारत मे उत्सव मनाया जा रहा है ।

राम उत्सव मनाने के साथ साथ राम के जीवन से सीखना भी जरूरी है। तभी असल मायने मे हम राम भक्त कहलाएंगे।


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