वनाग्नि रोकथाम के लिए समय से तैयारी करें सुनिश्चित : चम्पावत डीएम मनीष कुमार !

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लोकजन टुडे ब्यूरो

जिला स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समिति की बैठक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संपन्न

जनपद में जिला स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समिति की बैठक जिलाधिकारी मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला सभागार में आयोजित की गई। बैठक में आगामी वनाग्नि सत्र को दृष्टिगत रखते हुए वनाग्नि की रोकथाम एवं नियंत्रण को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में अवगत कराया गया कि जनपद में कुल 62,098 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्रफल है, जिसे वनाग्नि से सुरक्षित रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

जिलाधिकारी ने विकासखंड स्तर पर गठित वनाग्नि समितियों को और अधिक प्रभावी बनाने, कंट्रोल बर्निंग को वैज्ञानिक ढंग से किए जाने व इसकी सूचना समय पर आमजन तक पहुंचाने तथा विभिन्न विभागों के मध्य अंतरविभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि फरवरी माह के प्रथम सप्ताह में अग्नि सुरक्षा सप्ताह का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा। इसके अंतर्गत विद्यालयों में बच्चों के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक सशक्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जनपद में वर्तमान में 82 फायर क्रू स्टेशन स्थापित हैं।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि वनाग्नि काल से पूर्व सभी तैयारियाँ पूर्ण कर ली जाएँ। मॉडल फायर क्रू स्टेशन की अवधारणा को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू किया जाए तथा सभी अग्निशमन उपकरणों को कार्यशील स्थिति में रखा जाए।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि नई घास प्राप्त करने के उद्देश्य से वनों को जलाना, पैदल मार्गों से पिरूल हटाने हेतु आग लगाना अथवा निजी भूमि में आड़ा जलाना जैसे कार्य वनाग्नि के प्रमुख कारण हैं। ऐसे मिथकों के प्रति व्यापक जनजागरूकता बढ़ाने तथा लोगों को इन गतिविधियों से पूर्णतः परहेज करने हेतु प्रेरित करने पर विशेष बल दिया गया। अवगत कराया गया कि 31 मार्च के बाद जनपद में आड़ा जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

बैठक में डिस्ट्रिक्ट फायर प्लान 2026–27 पर भी विस्तार से चर्चा की गई तथा वनाग्नि रोकथाम हेतु रणनीतियों को अंतिम रूप दिया गया।

जिलाधिकारी ने कहा “वनाग्नि एक व्यक्ति से लग सकती है, लेकिन उसे रोकना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने वनाग्नि नियंत्रण में जनभागीदारी को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए की फायर सीजन से पूर्व पशुओं हेतु पेयजल एवं चारे की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, वन विभाग द्वारा चाल-खाल की सफाई, पेयजल व्यवस्था एवं आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, फायर इमरजेंसी मैनेजमेंट के अंतर्गत प्रशिक्षित चिकित्सक, मेडिकल सुविधा एवं फायर टेंडरों की समयबद्ध तैनाती की जाए, सड़कों के किनारे कटे पेड़ों, सिल्लियों एवं अन्य ज्वलनशील सामग्री को हटाया जाए।

साथ ही कंट्रोल बर्निंग से पूर्व इसकी सूचना अनिवार्य रूप से वन विभाग द्वारा साझा की जाए, पेड़ों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु विशेष अभियान चलाया जाए, संवेदनशील एवं अति-संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) एवं प्रशिक्षण कराया जाए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी. एस. खाती, विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, उपजिलाधिकारी अनुराग आर्या, एसडीओ फॉरेस्ट सुनील कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।


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