चारधाम यात्रा में बार-बार हेलीकॉप्टर हादसे, जोशीमठ दुर्घटना ने फिर उठाए हवाई सुरक्षा पर सवाल !

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लोकजन टुडे, देहरादून

देहरादून। चमोली के जोशीमठ क्षेत्र में शुक्रवार को हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड में हेली सेवाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बदरीनाथ से देहरादून लौट रहे ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से पायलट समेत छह लोगों की जान चली गई। यह चारधाम यात्रा मार्ग पर हुआ पहला बड़ा हादसा नहीं है। इससे पहले भी केदारनाथ और बदरीनाथ सेक्टर में कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनकी जांच में मौसम के गलत आकलन और उड़ान संबंधी मानकों की अनदेखी जैसी गंभीर बातें सामने आई थीं।

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) के पिछले मामलों से जुड़ी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2015 से 2025 के बीच चारधाम सेक्टर में आठ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं और एक गंभीर घटना दर्ज की गई। इनमें पांच हादसे जानलेवा साबित हुए।

पहले भी कई परिवारों पर टूट चुका है दुखों का पहाड़

अक्टूबर 2022 में केदारनाथ से गुप्तकाशी जा रहा आर्यन एविएशन का बेल-407 हेलीकॉप्टर गरुड़ चट्टी के पास पहाड़ी से टकरा गया था। हादसे में पायलट सहित सात लोगों की मौत हुई थी। जांच में सामने आया कि मौसम खराब होने और बादलों के नीचे उतरने के बावजूद उड़ान जारी रखी गई।

जून 2025 में केदारनाथ घाटी के गौरीकुंड क्षेत्र में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में भी सात लोगों की जान गई थी । जांच में तेजी से बदलते मौसम, उड़ान जारी रखने के फैसले और घाटी में पायलट के सीमित अनुभव जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना गया। मौसम संबंधी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध न होना भी चिंता का विषय रहा।

इसी तरह मई 2025 में उत्तरकाशी के गंगनानी के पास हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से छह लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2017 में बदरीनाथ हेलीपैड के पास केस्टरेल एविएशन का हेलीकॉप्टर भी टेकऑफ के तुरंत बाद हादसे का शिकार हो गया था।

सुरक्षा के नए इंतजाम, फिर भी क्यों नहीं थम रहे हादसे?

लगातार सामने आई दुर्घटनाओं के बाद हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए। वर्ष 2026 के यात्रा सीजन के लिए हेलीकॉप्टरों में ट्रैकिंग डिवाइस, मौसम की निगरानी के लिए सीलोमीटर और एयर ट्रैफिक कंट्रोल जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया।पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने वाले पायलटों के लिए न्यूनतम 750 घंटे के हिल फ्लाइंग अनुभव और संचालन क्षमता को 70 प्रतिशत तक सीमित रखने जैसे प्रावधान भी किए गए।इन तमाम व्यवस्थाओं के बीच जोशीमठ में हुई ताजा दुर्घटना ने फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नियमों का जमीनी स्तर पर सही ढंग से पालन हो रहा है?

ऑरेंज अलर्ट के बीच उड़ान, अब जांच से खुलेगी हादसे की वजह

जोशीमठ हादसे को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बावजूद हेलीकॉप्टर ने बदरीनाथ से उड़ान भरी थी। हालांकि, यूकाडा (UCADA) का कहना है कि उड़ान के समय बदरीनाथ में मौसम साफ था, लेकिन घाटी में अचानक बादल छा गए।अब AAIB और DGCA की जांच में मौसम की स्थिति, पायलट का अनुभव, हेलीकॉप्टर के रखरखाव और निर्धारित सुरक्षा मानकों के पालन सहित तमाम पहलुओं की पड़ताल की जानी है। एहतियात के तौर पर संबंधित कंपनी के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े का संचालन रोक दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

हर हादसे के बाद जांच, लेकिन सबक कितना सीखा?

चारधाम यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवाएं श्रद्धालुओं के लिए सफर आसान बनाती हैं, लेकिन पहाड़ी इलाकों में पल-पल बदलता मौसम उड़ान को चुनौतीपूर्ण बना देता है। ऐसे में केवल सुरक्षा नियम बनाना ही काफी नहीं, उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।पिछली दुर्घटनाओं के बाद जांच हुई, खामियां सामने आईं और सुधार के निर्देश भी दिए गए। इसके बावजूद हादसों का सिलसिला थम नहीं सका।अब जोशीमठ हादसे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और पहले की जांच रिपोर्टों से मिले सबक सुरक्षा व्यवस्था में कितने प्रभावी ढंग से लागू किए गए।


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