इन्वेस्टमेन्ट के नाम पर करोड़ो की धोखाधड़ी करने वाला साइबर अभियुक्त को गाजियाबाद से किया गया गिरफ्तार !

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लोकजन टुडे ब्यूरो

मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड के देवभूमि उत्तराखण्ड को अपराध मुक्त बनाये रखने के मिशन के अन्तर्गत पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड, श्री दीपम सेठ के दिशा निर्देशन में अजय सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ उत्तराखण्ड द्वारा साइबर अपराध पीड़ितो को त्वरित न्याय दिलाने तथा अपराधिक घटना में संलिप्त साइबर अपराधियों पर प्रभावी कार्यवाही के निर्देश निर्गत किये गये हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ, अजय सिंह द्वारा जानकारी दी गई कि एक प्रकरण पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर निवासी नागरिक द्वारा साइबर ठगी के संबंध में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि अक्टूबर से दिसम्बर 2025 तक अज्ञात व्यक्तियों (कथित रजत वर्मा व मीना भट्ट आदि) द्वारा वादी को एक लिंक के माध्यम से “71 Wealth Enhancement” नामक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़कर प्रतिदिन 5% से अधिक मुनाफा कमाने का झांसा देकर (कथित मीना भट्ट) द्वारा लिंक https://app.dbscoopreation.com के माध्यम से Internal Equity Account में रजिस्ट्रेशन करवाकर विभिन्न बैंक खातों/UPI के माध्यम से निवेश के नाम पर वादी के साथ कुल ₹1,31,76,000/- (एक करोड़ इकतीस लाख छिहत्तर हजार रुपये) की धोखाधड़ी की गई । कुछ समय पश्चात शिकायतकर्ता को स्वयं के साथ साइबर ठगी होने का आभास हुआ, जिस पर शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत दर्ज करायी गयी । शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून पर आईटी एक्ट पंजीकृत किया गया ।

प्रकरण की गम्भीरता के दृष्टिगत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एस0टी0एफ0 उत्तराखण्ड द्वारा अभियोग के शीघ्र अनावरण हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये । साईबर क्राईम पुलिस द्वारा घटना में प्रयुक्त बैंक खातों रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बरों व्हाट्सअप की जानकारी हेतु सम्बन्धित बैंकों, सर्विस प्रदाता कम्पनियों, मेटा कम्पनी से पत्राचार कर डेटा प्राप्त किया गया। प्राप्त डेटा के विश्लेषण से जानकारी मे आया कि साईबर अपराध अभियुक्त को चिन्ह्ति करते हुये अभियुक्त की तलाश जारी की । साईबर टीम द्वारा विधिक प्रावधानों के अन्तर्गत प्रकाश में आये अभियुक्त अरवाज सैफी पुत्र मोहम्मद सलीम निवासी C-66, DLF Colony, दिलशाद गार्डन गाजियाबाद उत्तर प्रदेश के रूप में की गई जो अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी इन्वैस्टमैन्ट ग्रुप बनाकर लोगों से निवेश के नाम पर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा था। अभियुक्त के खाते में उक्त धोखाधड़ी से सम्बन्धित 10 लाख रुपये जमा कराये गये है, प्रारम्भिक पूछताछ में अभियुक्त ने साईबर अपराध हेतु जिस बैंक खातों का प्रयोग किया गया है उसमें मात्र 02 माह में कुल 2 करोड़ रूपयों का लेन-देन होना प्रकाश में आया है तथा अभियुक्त के कब्जे से घटना में प्रयुक्त SMS Alert मोबाइल नम्बर व ईमेल आईडी में प्रयुक्त 02 मोबाइल नम्बर बरामद किये गये । जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित बैंक खाते के विरुद्ध उत्तराखण्ड सहित देश के 09 राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं । जिसके सम्बन्ध में जानकारी हेतु अन्य राज्यों की पुलिस के साथ संपर्क किया जा रहा है ।

*गिरफ्तार अभियुक्त का नाम पता–*
अरवाज सैफी पुत्र मोहम्मद सलीम निवासी C-66, DLF Colony, दिलशाद गार्डन गाजियाबाद उत्तर प्रदेश उम्र 31 वर्ष

*बरामदगी*
1- 01 मोबाईल फोन VIVO
2- 02 सिम कार्ड

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एस0टी0एफ0 उत्तराखण्ड अजय सिंह द्वारा जनता से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट एक स्कैम है जो वर्तमान में पूरे भारत वर्ष में चल रहा है, कोई भी सी0बी0आई0 अफसर, मुम्बई क्राईम ब्रान्च, साइबर क्राइम, IT या ED अफसर या कोई भी एजेंसी आपको व्हाट्सएप के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट करने हेतु नोटिस प्रेषित नहीं करती है। साथ ही कोई व्यक्ति आपको फर्जी दस्तावेज, अवैध सामग्री आदि के नाम पर आपको डरा धमका रहा है या पैसों की मांग कर रहा है तो इस सम्बन्ध में STF साइबर थानों में अतिशीघ्र अपनी शिकायत दर्ज करायें। उक्त सम्बन्ध में ज्यादा से ज्यादा जागरुक हों। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार के लोक लुभावने अवसरों फर्जी साइट धनराशि दोगुना करने व टिकट बुक करने वाले अंनजान अवसरो के प्रलोभन में न आयें । किसी भी प्रकार के ऑनलाईन कम्पनी की फ्रैन्चाईजी लेने, यात्रा टिकट आदि को बुक कराने से पूर्व उक्त साईट का स्थानीय बैंक, सम्बन्धित कम्पनी आदि से पूर्ण वैरीफिकेशन व भली-भाँति जांच पड़ताल अवश्य करा लें तथा गूगल से किसी भी कस्टमर केयर का नम्बर सर्च न करें व शक होने पर तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन से सम्पर्क करें । अगर आपको ऐसी ही कोई कॉल या मैसेज आए तो इसकी शिकायत जरूर करें। सरकार ने साइबर और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए संचार साथी वेबसाइट पर चाक्षु पोर्टल लॉन्च किया है।

आप इस तरह की घटना की शिकायत 1930 साइबरक्राइम हेल्पलाइन पर या http://www.cybercrime.gov.in पर भी दर्ज करा सकते हैं।


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