नीट यूजी 2025 फर्जी दस्तावेज मामला: देहरादून एसएसपी की त्वरित रणनीति लाई रंग, SIT ने एमपी से दबोचा तीसरा आरोपी !

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संवाददाता : करन सहगल

बाइट: एसएसपी देहरादून

एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र सिंह डोभाल की कुशल कार्यशैली, जीरो टॉलरेंस नीति और सख्त नेतृत्व के चलते नीट यूजी 2025 (MBBS) में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ जारी है।

​मामला 13 सितंबर 2026 को सामने आया था, जब थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में अपनी सरकार पोर्टल के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने की शिकायतें दर्ज हुई थीं। धोखाधड़ी की गंभीरता को भांपते हुए SSP प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने तत्काल जांच को प्राथमिकता दी और पुलिस अधीक्षक ग्रामीण (1) श्रीमती जया बलोनी के कुशल नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया।

एसएसपी के कड़े निर्देशों के चलते एसआईटी ने इलेक्ट्रॉनिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया जिसके परिणामस्वरूप 21 सितंबर 2026 को गिरोह के दो आरोपी (रूपेश पंडित एवं अरविंद कुमार) पहले ही सलाखों के पीछे पहुंचा दिए गए थे और रूपेश की निशानदेही पर मेरठ से ₹8 लाख की नकदी भी बरामद हुई थी।

एसआईटी की लगातार की जा रही पारदर्शी विवेचना और सबूत जुटाने की रणनीति के तहत मध्य प्रदेश के भोपाल में ‘MBBS WAY’ नाम से कंसल्टेंसी ऑफिस चलाने वाले धीरज कुमार श्रीवास्तव का नाम प्रकाश में आया।

एसएसपी के दिशानिर्देश पर सक्रिय हुई पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी धीरज श्रीवास्तव को वाहन (संख्या: MP-04-Y-0655) के साथ धर दबोचा। वाहन की तलाशी के दौरान बरामद ₹5,58,100 की नकदी के संबंध में पूछताछ करने पर आरोपी ने स्वीकार किया कि यह राशि उसे मुख्य आरोपी रूपेश पंडित द्वारा फर्जी स्वतंत्रता सेनानी कोटा लगाकर एमबीबीएस में एडमिशन कराने के एवज में कमीशन के रूप में मिली थी।

पूछताछ में बड़ा खुलासा: तहसील स्तर की ‘सेटिंग’ से बनता था फर्जी प्रमाण पत्र

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था। आरोपी अरविंद ने अपनी बेटी और परिचितों के बच्चों के कम अंकों के बावजूद दाखिले के लिए रूपेश और धीरज से संपर्क किया था। इसके बाद तहसील और कचहरी स्तर पर साठगांठ का फायदा उठाकर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर उत्तराखंड का फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार करवाया गया और अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाया गया।​

एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल का सख्त संदेश​

मामले की लगातार निगरानी कर रहे एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा क्षेत्र में इस प्रकार का भ्रष्टाचार और मेधावी छात्रों के हक पर डाका डालने वाले गिरोहों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। एसआईटी हर एक पहलू की गहराई से जांच कर रही है और इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य अधिकारियों, दलालों व साठगांठ करने वालों के खिलाफ भी बीएनएस की सख्त धाराओं में दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बताते चलें कि उक्त मामले में अब तकतीनों अभियुक्तोंसे ₹13,58,100 नकद (धीरज से ₹5.58 लाख तथा रूपेश की निशानदेही पर ₹8 लाख)​ तथा 01 टाटा नेक्सन कार बरामद हो चुकी है।

गिरफ्तार करने वाले पुलिस टीम में वरिष्ठ उप निरीक्षक भरत सिंह रावत, अतिरिक्त उप निरीक्षक सुशील बलोनी, हेड कांस्टेबल सोबन सिंह राणा एवं कांस्टेबल किशन पाल शामिल थे.l


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