नीट यूजी फर्जी दस्तावेज मामला: देहरादून पुलिस ने किया एमबीबीएस में अवैध दाखिला दिलाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, 2 आरोपी गिरफ्तार !

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संवाददाता: करन सहगल

देहरादून पुलिस ने नीट यूजी-2025 में फर्जी दस्तावेजों (कूटरचित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र) के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस का दाखिला कराने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के 02 प्रमुख अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

गत 13 सितंबर 2026 को थाना रायपुर एवं थाना क्लेमेंटाउन पर ‘अपनी सरकार’ पोर्टल के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र हेतु ऑनलाइन आवेदन करने तथा जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के संबंध में तहरीरें प्राप्त हुई थींजिनके आधार पर थाना रायपुर पर बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया तथा थाना क्लेमेंटाउन पर भी मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएनएस के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया।

एसएसपी देहरादून ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्रीमती जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी (SIT) का गठन किया। एसएसपी के स्पष्ट निर्देशों और मार्गदर्शन में एसआईटी ने त्वरित, निष्पक्ष और गहन जांच करते हुए आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

एसएसपी देहरादून के कुशल नेतृत्व, तत्परता और अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के चलते इस गंभीर और संवेदनशील मामले की परते बेहद कम समय में खुल सकीं।

एसआईटी की ताबड़तोड़ कार्रवाई…

एसएसपी देहरादून के कड़े रुख के बाद हरकत में आई एसआईटी टीम ने सभी संबंधित दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। अभ्यर्थियों के ऑनलाइन दिए गए पते गलत पाए जाने पर टीम ने सीधे शिक्षण संस्थानों में जाकर पड़ताल की, जिससे अभियुक्तों के वास्तविक मूल पतों का सुराग मिला।साक्ष्य संकलन के बाद एसआईटी ने 02 संदिग्धों—रूपेश पंडित एवं अरविंद कुमार को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की, जिसके बाद दोनों की गिरफ्तारी की गई।

45 लाख प्रति सीट में डील, 20-20 लाख का एडवांस……

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि मुख्य आरोपी रूपेश पंडित पिछले 5 वर्षों से मेरठ में ‘मिकोडो (MECODO) पाठशाला’ नाम से एजुकेशन कंसल्टेंसी चला रहा था और कमीशन पर देश-विदेश की यूनिवर्सिटीज में एडमिशन कराता था। दूसरा अभियुक्त अरविंद कुमार अपनी बेटी और परिचितों के 2 अन्य बच्चों को एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के लिए रूपेश के संपर्क में आया था। रूपेश ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से एडमिशन कराने के नाम पर प्रति सीट ₹45 लाख में सौदा तय किया था, जिसमें से ₹20-20 लाख एडवांस के तौर पर ले लिए गए थे। इसके बाद फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाकर अभ्यर्थियों को विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाया गया।

एसएसपी देहरादून की सख्ती

एसएसपी देहरादून ने स्पष्ट किया है कि एसआईटी प्रकरण से जुड़े सभी पहलुओं और नेटवर्क की गहनता से विवेचना कर रही है। फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी अभियुक्तों के विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


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