सौ रुपए के स्टैंप पेपर पर एक करोड़ का समझौता! तो अब एसटीएफ दर्ज करेगी अपहरण का मुकदमा?
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रिपोर्ट: लोकजन डेस्क \ समय: 04:00pm\ देहरादून
सुपर एक्सक्लूसिव, लोकजन टुडे, आईजी के वाहन में बैठे पुलिस कर्मियों द्वारा प्रापर्टी डीलर से एक करोड़ रुपए लूटने के मामले ने अब दिलचस्प मोड़ ले लिया है। विश्वस्त सूत्रों की माने तो आरोपियों ने रजिस्टर्ड हलफनामा तैयार करवा लिया है जिसमे पूर्व में हुई घटना में लूट जैसी कोई बात ही नहीं लिखी गयी है बल्कि जिस बैग में नोटों की बात हो रही है वो नोटों से नहीं भरा हुआ था बल्कि उसमे आरोपी पुलिसकर्मीयो के कपडे और जरुरी सामान थे जो पीड़ित उन्हें लौटाने आया था और नामजद आरोपी शर्मा ने ही अपने मित्र पुलिस कर्मियों को जिस क्लब में बुलाया था उसका कारण भी ये ही बताया गया है कि उक्त बैग को वापिस करने के लिए ही अपने मित्रो को बुलाया गया था लेकिन किसी कारन वश वो बैग लौटाना भूल गए और वो बैग गलती से पीड़ित की गाडी में रखवा दिया गया था और इसी गफलत में पूरा मामला बिगड़ गया.. इस जवाब के बाद से जांच एजेंसी को गुमराह किया जाने का प्रयास जारी है
लेकिन विश्वस्त सूत्रों की माने तो जांच एजेंसी किसी भी लीपापोती पर भरोसा नहीं करेगी ताजा जानकारी के मुताबिक पुलिस लूटकांड मामले में आज हुई पूछताछ में सभी ने आरोपो को नकारा। जानकारी ये भी मिल रही है कि दोनों पक्षों की तरफ से शपथ पत्र दाखिल किया जा सकता है। जिससे या तो मामले को सुलझा लिया जा सकता है या फिर लीपापोती की जा सकती है। घटना का रुख मोड़ने और मामले को खत्म करने की जुगत भी हो सकती है।
दरअसल इसदरअसल इस हाईप्रोफाइल लूटकांड की साजिश डब्ल्यूआइसी में रची गई। डब्ल्यूआइसी एक राजनैतिक दल के बड़े नेता के करीबी का है। प्रापर्टी डीलर अनुरोध पंवार ने अपनी तहरीर में साफ कहा है कि उन्हें अनुपम शर्मा ने पेमेंट के लिए डब्ल्यूआइसी में बुलाया था। वहां अनुपम व अन्य लोगों के साथ काफी देर तक बैठे रहे। जब वहां से निकले तो डब्ल्यूआइसी का मैनेजर अर्जुन पंवार ही काले रंग का बैग लेकर उनकी कार में रखने आया था। सवा हाईप्रोफाइल लूटकांड की साजिश डब्ल्यूआइसी में रची गई। डब्ल्यूआइसी एक राजनैतिक दल के बड़े नेता के करीबी का है। प्रापर्टी डीलर अनुरोध पंवार ने अपनी तहरीर में साफ कहा है कि उन्हें अनुपम शर्मा ने पेमेंट के लिए डब्ल्यूआइसी में बुलाया था। वहां अनुपम व अन्य लोगों के साथ काफी देर तक बैठे रहे।
जब वहां से निकले तो डब्ल्यूआइसी का मैनेजर अर्जुन पंवार ही काले रंग का बैग लेकर उनकी कार में रखने आया था। सवाल उठता है कि अनुरोध यह खुद बैग लेकर अपनी कार तक क्यों नहीं गया। क्यों अर्जुन पंवार बैग लेकर उनकी कार तक आया था। क्या बैग बेहद भारी था। यदि ऐसा था तो निश्चित तौर पर उसमें मोटी रकम थी। यहां गौर करने वाली एक और बात है कि कुछ दिन पहले ये बात भी आ रही थी कि यह रुपये एक प्रत्याशी हैं, यदि उसका नाम खोलेगा तो राजनीति में भूचाल आ जाएगा। शायद यही वजह है कि प्रकरण की जांच उत्तराखंड पुलिस की सबसे बड़ी जांच एजेंसी को सौंपी गई है।
जिसकी जांच और पल—पल की कार्रवाई पर पुलिस महकमे से लेकर आला अधिकारियों, नेताओं और आम लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
डीआइजी एसटीएफ रिधिम अग्रवाल ने बताया कि रविवार को डब्ल्यूआइसी के मैनेजर से लंबी पूछताछ की जा चुकी है। अब साक्ष्य जुटाने और वारदात में संलिप्त अन्य चेहरों के बारे में जानकारी मिलने पर उससे दोबारा पूछताछ की जाएगी। वारदात और उसकी साजिश में जो भी शामिल होगा, उसके खिलाफ सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
मुकदमे के वादी अनुरोध पंवार देहरादून के प्रॉपर्टी डीलर हैं। उन्हें बीते चार अप्रैल की रात अनुपम शर्मा नाम के व्यक्ति ने राजपुर रोड स्थित डब्ल्यूआइसी में पेमेंट के लिए बुलाया। अनुरोध वहां पहुंचे और अनुपम और वहां के मैनेजर अर्जुन पंवार से मिले। इस बीच उनके परिचित अनुपम शर्मा रकम से भरा बैग उनके पास लेकर आ गए। अर्जुन बैग लेकर अनुरोध को पार्किंग में खड़ी उनकी कार तक छोड़ने गया।
अनुरोध कार लेकर वहां से निकल पड़े। रात दस बजे के करीब होटल मधुवन के पास उन्हें सफेद रंग की स्कॉर्पियों से पीछा कर रहे पुलिसकर्मियों ने रोक लिया और चुनाव में चेकिंग का हवाला देकर रकम लूट ली। इसके बाद अनुरोध को डरा—धमका कर भगा दिया।
अनुरोध ने अगले दिन यानी पांच अप्रैल को इसकी पुलिस के उच्चाधिकारियों से शिकायत की। पांच दिन की प्रारंभिक जांच के बाद मामले में डालनवाला कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत किया गया।
शासन ने पुलिस से तलब की रिपोर्ट…

उत्तराखंड शासन ने हाईप्रोफाइल लूटकांड का संज्ञान लेते हुए पुलिस मुख्यालय से रिपोर्ट तलब की है। साथ ही अब तक की जांच में सामने आए तथ्यों और उस पर की गई कार्रवाई से भी अवगत कराने को कहा है। बता दें हाईप्रोफाइल लूटकांड की वारदात को चार अप्रैल की रात को अंजाम दिया गया था। पांच अप्रैल को दून पुलिस को वारदात की भनक लगी। चार दिन के मंथन के बाद लोकसभा चुनाव के मतदान के एक दिन पहले यानी दस अप्रैल को मुकदमा दर्ज किया गया। दून पुलिस के पास यह केस महज 48 घंटे ही रहा। 12 अप्रैल को मामले की जांच एसटीएफ के सुपुर्द कर दी गई। मतदान के बाद लगातार अवकाश के चलते शासन ने अब सोमवार को पुलिस मुख्यालय ने पूरे घटनाक्रम पर रिपोर्ट तलब की है।
पुलिसकर्मियों पर होगी कार्रवाई
शनिवार को पुलिस लाइन से गायब हुए पुलिसकर्मी सोमवार को नाटकीय घटनाक्रम में पुलिस लाइन पहुंच तो गए, लेकिन एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने कहा कि सवाल यह है कि वह किसकी अनुमति से पुलिस लाइन से बाहर गए। इस बारे में सीओ पुलिस लाइन जया बलूनी को जांच सौंपी गई है। उनकी रिपोर्ट आने के बाद तीनों पर कार्रवाई की जाएगी।
एसटीएफ ने आरोपित पुलिसकर्मियों के लिए बयान
आइजी कार्यालय की स्कार्पियो से हुए हाईप्रोफाइल लूटकांड में एसटीएफ ने आखिरकार आरोपित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज कर ही लिए। इसके बाद मुख्य साजिशकर्ता अनुपम शर्मा से भी लंबी पूछताछ की गई। वहीं, मुकदमे के वादी प्रापर्टी डीलर अनुरोध पंवार से भी एसटीएफ ने घटनाक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी ली। आरोपितों को किसी भी सूरत में अब देहरादून जिले से बाहर न जाने की चेतावनी दी गई है।
शनिवार को पुलिस लाइन से फरार हुए निलंबित और हाईप्रोफाइल लूटकांड के आरोपित पुलिसकर्मियों ने नाटकीय तरीके से आमद करा ली। इसके कुछ ही घंटों के भीतर एसटीएफ ने तीनों को अपने दफ्तर बुलाया और बारी—बारी से सभी के बयान लिए। डीआइजी एसटीएफ रिधिम अग्रवाल ने बताया कि दारोगा दिनेश नेगी, सिपाही मनोज अधिकारी व हिमांशु उपाध्याय से अलग—अलग पूछताछ की गई, लेकिन सभी ने आरोपों को नकारा।
सूत्रों की मानें तो जब एसटीएफ ने उन्हें आइजी की सरकारी स्कार्पियो के साथ तीनों की फुटेज दिखाई तो वह चुप्पी साध गए। वहीं, तीनों की कॉल डिटेल भी उन्हें दिखाई गई, जिसमें दारोगा दिनेश नेगी की अनुपम शर्मा से वारदात के दिन और उससे कई दिन पहले से कई बार बात होने की पुष्टि हो रही थी। इसके बाद एसटीएफ ने अनुपम शर्मा को तलब कर उससे एक—एक कर एक दर्जन से अधिक सवाल किए।
सूत्रों की मानें तो उसने भी आरोपों को नकारने का खेल किया, लेकिन जब सीसीटीवी फुटेज और सीडीआर दिखाई गई तो वह भी खामोश हो गया। इन सबसे पूछताछ के बाद एसटीएफ ने डालनवाला कोतवाली में लूट का मुकदमा दर्ज कराने वाले प्रापर्टी डीलर से घटनाक्रम के बारे में जानकारी मांगी। यहां उन्होंने जो कुछ बताया, वह मुकदमे की तहरीर में कही गई बातों की तस्दीक करती है।

विश्वस्त सूत्र तो ये भी बता रहे कि अगर नामजद लूट के आरोपियों ने अगर मामले को घुमाने का प्रयास किया तो एसटीएफ अब एक नया मुकदमा दर्ज कर सकती है जिसमे आरोपियों पर अपहरण और अधिकारी की गाडी का दुरूपयोग कर पीड़ित को अपनी गाडी में जबरदस्ती बैठाया और अपनी झूठी आई डी बताकर पीड़ित को मानसिक रूप से प्रताणित किया और पीड़ित की एफआईआर के मुताबिक पीड़ित की गाडी से बैग लेने वाली बात पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी चल रही है
मौजूद हैं तकनीकी साक्ष्य
डीआइजी एसटीएफ रिधिम अग्रवाल के मुताबिक, अनुपम शर्मा समेत तीनों पुलिसकर्मियों से पूछताछ की गई है। सभी ने फिलहाल आरोपों से इंकार किया है, लेकिन हमारे पास वारदात को लेकर पूरे तकनीकी साक्ष्य मौजूद हैं। सभी को देहरादून छोड़ कर न जाने की हिदायत दी गई है।
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