“इनसाइड स्टोरी” क्यों “खण्डूड़ी है जरूरी” उठ रही आवाज फिर से उत्तराखंड में
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देहरादून:
विधानसभा बैक डोर भर्ती में अपने साहसिक निर्णय पर अडिग रहने के लिए विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खण्डूड़ी इन दिनों खूब चर्चा में है l पहले साहसिक निर्णय लेते हुए सभी बैक डोर कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाते हुए साहसिक फैसले का परिचय दिया l फिर उच्च न्यायालय की एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अपने फैसले को सही ठहराया।

अपने पिता से कड़क छवि और इमानदारी ऋतु भूषण खण्डूड़ी को विरासत में मिली है l यही कारण है आज उत्तराखंड में एक बार फिर से यह आवाज उठ रही है कि
“खण्डूड़ी है जरूरी “
लगातार विधानसभा अध्यक्ष की छवि के ग्राफ में बढ़ोतरी के चलते अब वह अपने ही पार्टी के बड़े नेताओं के निशाने पर भी आ गई है l राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऋतु भूषण खण्डूड़ी भविष्य में उत्तराखंड की मुख्यमंत्री बन सकती है।
लेकिन विधानसभा भर्ती बैक डोर मामले में अकेली विधानसभा अध्यक्ष को ही इसका पूरा क्रेडिट नहीं जाता है l बैक सपोर्ट में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस पर कार्रवाई करने का अनुरोध किया था और वह भी तब जब स्वयं उनके अपने सलाहकार और उनके रिश्तेदार विधानसभा मैं बैक डोर से भर्ती किए गए हो, लेकिन उसके बावजूद भी मुख्यमंत्री ने जीरो टॉलरेंस और ईमानदार सरकार का मुख्य सेवक का परिचय देते हुए न्याय संगत फैसला लिया l वैसे विधानसभा बैक डोर भर्ती मामले में विपक्ष के द्वारा पुष्कर सिंह धामी पर भी खूब प्रहार किया गया लेकिन कहीं ना कहीं अकेले पुष्कर पर ही निशाना क्यों l
विचलन की तो उत्तराखण्ड में परंपरा रही है
बल्कि धामी ने नई लकीर खींचकर विधानसभा में बैकडोर एंट्री पर लगवाया प्रभावी अंकुश
उत्तराखंड विधानसभा में तदर्थ भर्ती को विचलन से मंजूरी कोई 2022 में पहली बार नहीं दी गई। राज्य के लगभग हर सीएम के कार्यकाल में ये मंजूरियां दी गईं। ऐसा कोई हम नहीं कह रहे, बल्कि स्पीकर ऋतु खंडूड़ी की बनाई डीके कोटिया समिति की रिपोर्ट और खुद विधानसभा के हाई कोर्ट में दाखिल किए गए काउंटर में इस हकीकत का विस्तार से जिक्र किया गया है।
सबसे पहली बार 2001 में तत्कालीन सीएम नित्यानंद स्वामी ने 53 पदों पर तदर्थ भर्ती को विचलन से ही मंजूरी दी। इसके बाद कांग्रेस सरकार में सीएम एनडी तिवारी ने तो विचलन से तदर्थ भर्ती को मंजूरी देने का रिकॉर्ड ही बना दिया। उन्होंने 2002 में 28, वर्ष 2003 में 05, वर्ष 2004 में 18, वर्ष 2005 में 08, वर्ष 2006 में भी जाते जाते 21 पदों को मंजूरी दी।
इसके बाद वर्ष 2007 में सीएम बने बीसी खंडूड़ी ने भी कुर्सी संभालने के महज कुछ महीने के भीतर ही 27 पदों पर तदर्थ भर्ती को मंजूरी दी। तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने भी यही परंपरा जारी रखी l
एकमात्र पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ही ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जिन्होंने विधानसभा बैक डोर भर्ती में नियमानुसार भर्ती करने को कहा था और बैक डोर भर्ती को मंजूरी नहीं दी थी।
जो मुख्यमंत्री बनते ही पुष्कर सिंह धामी के द्वारा दे दी गई थी l
फिलहाल उत्तराखंड में इन दिनों पार्टी के अंदर ही खींचातानी चल रही है l एक धड़े के द्वारा यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि बहुत जल्दी उत्तराखंड में कुछ बदलाव देखा जा सकता है जिसके चलते कई नेता एक बार फिर अपनी-अपनी लॉबिंग में लग गए हैं और कुर्सी की लड़ाई फिर से अंदर खाने शुरू हो गई है ।
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