विधानसभा चुनाव से हरदा को सता रहा गिरफ्तारी का डर, बोले- आप मेरी रक्षा करना

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देहरादून: आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व सीएम हरीश रावत को अंदेशा है कि कहीं स्टिंग प्रकरण की जांच कर रही सीबीआई उन्हें गिरफ्तार न कर ले। हरीश रावत ने बीजेपी और अमित शाह पर वार करते हुए एक लंबी पोस्ट लिखी है।

हरदा लिखते हैं- आदरणीय अमित शाह जी ने एक चर्चित आमसभा की। मुझको बहुत सारी बातें कहकर नवाज गये। उन्होंने दो चुनौतियां सार्वजनिक रूप से मुझको दी। उन चुनौतियों में, एक चुनौती में धमकी भी छिपी है और दो गलत बयानियां कर गये, बिल्कुल सफेद झूठ परोस गये। मेरा भी उत्तराखंडी स्वभाव है, फिर मैंने स्टिंग के मामले में कहा है कि मैं उत्तराखंडी गंगलोड़ हूं, लुढ़क सकता हूं, दूर तक घिसटते हुये जा सकता हूं, घिस-घिस करके मिट्टी में मिल सकता हूं, लेकिन मुझे कोई तोड़ नहीं सकता। सीबीआई के माध्यम से मुझे तोड़ने का प्रयास हो रहा है, कोशिश है कि मुझे जेल में डाला जाय।

हरदा ने आगे लिखा- खैर उत्तराखंड न्याय करेगा, भगवान केदार जी न्याय करेंगे। मैंने कुछ भी ऐसा नहीं किया है, जिससे लोकतंत्र या उत्तराखंड पर कलंक लगता हो। हाँ मैंने, लोकतंत्र को बचाया जरूर है। लोकतंत्र और संसदीय लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष किया और मुझे भगवान की कृपा से न्याय भी मिला है।

पूर्व सीएम आगे लिखते हैं- अमित शाह जी को मालूम है कि दोनों स्टिंग, जो मेरा हुआ है और जो भाजपा रूपी सत्तारूढ़ दल का हुआ है, उसका बाप एक ही है और भाजपा की जो वर्तमान सरकार है, उसका बाप भी वही व्यक्ति है जिसने दोनों स्टिंग किये हैं। क्योंकि स्टिंग के गर्भ से ही वर्तमान भाजपा सरकार पैदा हुई है तो दोनों स्टिंग, मेरे स्टिंग को भी और जो भाजपा का स्टिंग किया गया है उसको भी बन्नू स्कूल ग्राउंड देहरादून में बड़े से स्क्रीन पर मुनादी करके दिखाया जाए और उत्तराखंड पर फैसला छोड़ दिया जाए कि भ्रष्टाचार वास्तविक अर्थों में कहां होता दिखाई दे रहा है! मेरे पास तो पत्रकार का बाना पहने हुये एक व्यक्ति आया, ताजमहल, लालकिला, सब कुछ खुद खरीद करके मेरी झोली में डालने का वादा कर रहा था।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि मैंने भी कह दिया कि यदि ऐसा करते हो तो मैं अमेरिका के फेडरल बैंक का खजाना आपके नाम पर कर दूंगा। वो मौखिक जमा-खर्च बेच रहा था और मैं मौखिक जमा-खर्च अदा कर रहा था, खैर फैसला जनता के ऊपर छोड़ता हूं। कैसी अजीब विडंबना है जिन्होंने दलबदल किया वो, विधायक और मंत्री बने। जिन्होंने दल-बदल करवाया, पैसा देकर के विधायकों को खरीदा उनकी सरकार बनी और हरीश रावत, जिसने संसदीय लोकतंत्र व संवैधानिक कानून की रक्षा के लिए जिंदगी लगा दी, उसको सीबीआई का मुकदमा झेलना पड़ रहा है तो तीन ही जगह मैं न्याय की गुहार लगा सकता हूं, भगवान केदार के पास लगा सकता हूं, अपने ईष्ट देवता के पास लगा सकता हूं और जनता-जनार्दन उत्तराखंड के पास लगा सकता हूं।

आखिर में हरदा लिखते हैं- फैसला आप पर छोड़ता हूं मुझे तो भुगतना ही है, क्योंकि मैं 2016 में भी भाजपा की आंख की किरकिरी था और आज भी आंख की किरकिरी हूं। यदि मैं, उत्तराखंड के लोगों की आंख की किरकिरी हूँ तो मुझे निकालकर के बाहर फेंक देना और यदि आपको लगता है कि मैं आपके लिए खड़ा हूं, आपके लिए लड़ा हूं, आपके लिए लडूंगा तो फिर इस भाजपा रूपी अहंकार जो बन्नू स्कूल देहरादून में गरजा है, उससे मेरी रक्षा भी आप ही को करनी पड़ेगी। एक चुनौती तो मैंने निवेदित कर दी है, अन्य चुनौतियों पर मैं दूसरी बार आपसे बात करूंगा। “जय हिंद, जय उत्तराखंड”।


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