हरिद्वार में कुंभ के कार्यों में देरी से संत समाज में उबाल, आज शाम सीएम से करेंगे मुलाकात

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लोकजन टुडे, देहरादूनः हरिद्वार में होने वाले महाकुंभ 2021 को लेकर अभी तक हरिद्वार में कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। इससे अखाड़ा परिषद में काफी नाराजगी है। अब इसे लेकर शनिवार की शाम करीब पांच बजे अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की अध्यक्षता संत मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। संतों का कहना है कि एक ओर जहां अब कुंभ में समय बेहद कम बचा है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। इससे उनकी चिंता भी बढ़ रही है।
दरअसल ऐसा नहीं है कि सरकार कार्यों में जान बूझकर देरी कर रही हो। इसकी वजह आचार संहिता भी है। बताते चलें कि सरकार ने 2021 में होने वाले हरिद्वार कुंभ की तैयारियों के लिए जिलेभर में नौ सौ करोड़ के काम होने हैं। इनमें से 218 कार्यों की मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एंपावर्ड कमेटी ने मंजूरी भी दे दी थी। इसी बीच मार्च में चुनाव आचार संहिता लगने से स्वीकृति कार्यों का शासनादेश (जीओ) जारी नहीं हो पाया और यह सभी कार्य लटक गए।
कुंभ योजना के कार्य दिसंबर 2020 तक पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। जनवरी 2021 में कुंभ का स्नान होना है। सबसे अधिक समय पुलों के निर्माण में लगता है। एक पुल को तैयार होने में लगभग 12 से 18 महीने का समय लगता है। पांच पुलों में एक मुख्यमंत्री की घोषणा का धनौरी पुल भी है जिसकी कंसलटेंसी भी हो चुुकी परंतु जीओ नहीं हुआ है। इसके अलावा चार पुुल हरिद्वार शहर में बनने हैं। इनमें कनखल में बस्तीराम पाठशाला से बैरागी कैंप, दक्षद्वीप से बैरागी कैंप, विश्व कल्याण आश्रम से बैरागी कैंप और मातृ सदन से बैरागी कैंप के बीच बनना है। इन पुलों की डीपीआर बनाने के लिए धनराशि भी स्वीकृत हो चुकी थी। लेकिन आचार संहिता लगते ही काम अटक गए।
हरकी पैड़ी कांगड़ा मंदिर तक घाट का विस्तारीकरण और गंगा में पार्किंग से चंडी चौक तक तीस मीटर चौड़ा आस्था पथ, कांगड़ी में घाट का निर्माण होना है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता दीपक कुमार ने बताया कि अभी सबकुछ शासन स्तर पर है जब तक जीओ नहीं हो जाता है तब तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती है।
हालांकि इस सब पर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि कुंभ संबंधी प्राथमिकता के कार्यों की स्वीकृतियां चुनाव आचार संहिता से पहले दी जा चुकी हैं। उनके स्तर कोई स्वीकृति अटकी हुई नहीं है। चुनाव आचार संहिता खत्म होते ही सरकार का फोकस कुंभ योजना के कार्यों को तत्परता से कराना होगा। इस बीच अब संत समाज का प्रतिनिधिमंडल आज शाम सीएम से मिलेगा, इसके बाद तय किया जाएगा कि आखिर सरकार संतों की नाराजगी दूर करने को क्या कुछ करती है।


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