सुपर एक्सक्लूसिव! राजधानी में तीन आईपीएस के शीतयुद्ध में आरोपियों की मौज !

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लोकजन टुडे: अभिषेक सिन्हा, देहरादूनः पुलिस की कार्यप्रणाली पर वैसे तो समय समय पर सवाल उठते ही रहते हैं, लेकिन ताजा प्रकरण हाईप्रोफाइल लूटकांड का है। इस मामले में शुरुआत से ही तमाम रंग देखने को मिले। हालांकि सूत्रों के मुताबिक इस मामले में अब तक जो कुछ होता रहा, उसके पीछे राजधानी में अलग—अलग पदों पर तैनात तीन आईपीएस अफसरों के बीच चल रहा शीतयुद्ध माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस केस में जो कुछ दांव पेंच इन तीनों अफसरों ने चले उसका पूरा लाभ इस हाईप्रोफाइल लूट कांड के आरोपियों को मिली। यही कारण है कि इस कांड के मुख्य साजिशकर्ता अनुपम शर्मा को गत दिवस जिला जज की अदालत से जमानत मिल गई है। अब इससे अन्य आरोपियों को भी उम्मीद जग गई है कि उनको भी इसी के आधार पर जमानत मिलनी चाहिए। बहरहाल हम आपको बताते चलें कि जिस प्रकार से अप्रैल में चुनाव के दौरान एक प्रापर्टी डीलर से पुलिसकर्मियों ने लूटपाट की थी उसे लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इस केस में जो कुछ हुआ वह कुछ ऐसा है। विवेचना में अब तक यह साफ नहीं हो पाया कि लूटे गए बैग में कितनी रकम थी। चारों आरोपियों को रिमांड पर लेने के बाद भी उनसे सच नहीं उगलवा सकी। इसी का सीधा फायदा आरोपी उठाने लगे हैं।
बता दें कि आईजी की सरकारी गाड़ी में सवार तीन पुलिसकर्मियों ने चार अप्रैल की रात प्रॉपर्टी डीलर अनुरोध पंवार से आचार संहिता की आड़ में बैग छीन लिया था। इसमें मोटा कैश होने की बात बताई गई थी। पंवार साफतौर से यह नहीं बता पाए थे कि बैग में कितनी रकम थी। पंवार ने डालनवाला कोतवाली में लूट का मुकदमा दर्ज कराया था कि तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों ने कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा के इशारे पर उसके साथ लूटपाट की है।
एसएसपी ने प्राथमिक जांच के बाद दारोगा दिनेश नेगी, कांस्टेबल हिमांशु उपाध्याय और मनोज अधिकारी को निलंबित कर दिया था। बाद में एसटीएफ ने साक्ष्यों के आधार पर निलंबित तीनों पुलिसकर्मियों के अलावा कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा को जेल भेज दिया था। हालांकि एसटीएफ आरोपियों के पास से किसी तरह की बरामदगी नहीं कर पाई थी। आरोपी बैग में नगदी न होने की बात कहकर घटना को नया मोड़ देने में काफी हद तक कामयाब रहे हैं। इसके बावजूद जिस प्रकार से इस केस में तीनों ही आईपीएस ने एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए कार्य किए उसी का नतीजा है कि आरोपियों को बचाने का प्रयास चल रहा है। इस मामले में आरोपी पुलिसकर्मी भी हिरासत से गायब भी रहे। इससे समझा जा सकता है कि अफसरों के शीत युद्ध मेें कानून व्यवस्था का बेडागर्क हो रहा है।


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