सरकारी शराब का धंधा चौपट, अवैध शराब का धंधा चोखा

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तनुज वालिया(9997086454) हरिद्वार, लोकजन टुडे

लोकजन टुडे, हरिद्वारः आम तौर पर हरिद्वार का नाम आते ही दिमाग में धार्मिक नगरी की बात आती है, लेकिन धरातल पर ऐसा नहीं है। यही कारण है कि धार्मिक नगरी होने के बावजूद इससे सटे इलाकों में शराब व मांस की बिक्री होती है। इसके चलते सरकार ने भी यहां पर शराब की दुकानें खोलना चाहती है। हालांकि सरकार को इस बार यूपी में सस्ती शराब होने से झटका लगा है। यानि कोई भी ठेकेदार हरिद्वार में दुकानें नहीं खोलना चाहता है। इसका कारण यह भी है कि यहां पर शराब को लेकर कई संस्थाएं समय समय पर विरोध भी करती आ रही हैं। देशी शराब की 78 दुकानों के सापेक्ष केवल 42 दुकानों की ही लगी बोली। अंग्रेजी शराब की 52 मे से 32 दुकानें ही खुलीं। राज्य सरकार को 124 करोड़ का हुआ घाटा। जनपद से सटे यूपी में शराब सस्ती होना भी है प्रमुख कारण माना जा रहा है।

आम लोगों का मानना है कि जिले में शराब के बढ़े हुए दाम के कारण जनता पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से शराब खरीद रही है। इस कारण सरकार को राजस्व में खासा नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही इलाके में कई ऐसी देशी और अंग्रेजी शराब की दुकानें हैं, जो अभी तक शराब व्यापारियों द्वारा बिक्री के लिए ठेके पर नहीं ली गई हैं।
सेहत के लिए भले ही शराब नुकसानदेह हो लेकिन राजस्व के लिहाज से शराब सरकार के लिए बहुत फायदेमंद है। इन दिनों धर्मनगरी में तस्वीर बिल्कुल उलट है। जिले के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में यहां के मुकाबले शराब काफी सस्ती है। इस कारण हरिद्वार में शराब की बिक्री पर भारी असर पड़ रहा है। हरिद्वार में देशी शराब की कुल 78 और अंग्रेजी शराब की 52 दुकानें हैं। इनमें से देशी शराब की 42 और अंग्रेजी शराब की 32 दुकानों पर ही शराब बिक्री हो रही है। बाकी दुकानें शराब कारोबारियों ने अभी तक ठेके पर नहीं उठाई हैं। इसके चलते सरकार को 124 करोड़ रुपए का घाटा सहना पड़ना रहा है। जिला आबकारी अधिकारी अशोक मिश्रा ने बताया कि सरकार ने शराब से राजस्व इकट्ठा करने के लिए 362 करोड़ का लक्ष्य रखा था लेकिन दुकान का ठेका नहीं होने के कारण 238 करोड़ का भी राजस्व प्राप्त हुआ है, वहीं घाटे को लेकर विभाग का कहना है कि उत्तर प्रदेश में शराब यहां के मुकाबले काफी सस्ती मिल रही है।

इसके कारण लोग हरिद्वार की बजाए उत्तर प्रदेश के जिलों से खरीद रहे हैं। यही नहीं यहां पर अवैध तरीके से शराब की बिक्री भी धड़ल्ले से होती है। इसका उदाहरण पिछले दिनों जिस प्रकार से जहरीली शराब से लोगों की जानें गईं थी उससे समझा जा सकता है कि अवैध शराब का धंधा कितना फलफूल रहा है। बताते चलें कि दो दिन पहले भी मां गंगा जागृति सेवादल के कार्यकर्ताओं ने गंगा घाटों पर सफाई अभियान चलाया। अभियान के दौरान गंगा घाट पर बड़ी संख्या में गांजे की पुड़िया और शराब की 250 खाली बोतलें मिली।
मां गंगा जागृति सेवादल के कार्यकर्ताओं ने सफाई अभियान के दौरान रोड़ी बेलवाला घाट के समीप शराब की 250 खाली बोतलें और 300 पुड़िया गांजे की बरामद की। इस दौरान कुछ लोगों को मौके पर ही घाट पर बैठकर शराब पीते हुए पकड़ा। जिसमें कार्यकर्ताओं को शराबियों के बीच मारपीट हो गई। जिसमें कार्यकर्ता कमल शर्मा घायल हो गया। हालांकि इसके बाद शराबी युवक को छोड़ दिया गया। टीम के अध्यक्ष अजय जोशी और संरक्षक अनुज वालिया ने कहा कि गंगा घाटों नशे का सामना बिकना शर्मनाक है। प्रशासन से पहले भी नशे पर रोक लगाने की अपील की गई थी, लेकिन आश्वासन मिलने के बाद भी कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। अभियान में अनुज अंथवाल, राजू कश्यप, अमित कश्यप, अजय मोदी, कमल शर्मा, अंकित प्रजापति, अमित मुल्तानिया, अंकुश, प्रशांत, वीरु सोलंकी, राहुल कश्यप, अरुण सैनी, शालू, राधिका, सौरभ, रोहित, कोकेन, अशोक नवानी, सोनी कुमार, अर्जुन सिंह, अभिषेक राजपूत आदि शामिल रहे।


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