वन मंत्री की जिद के आगे ट्टसरकार’ ने टेके घुटने, सड़क निर्माण की दी अनुमति

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लोकजन टुडे, देहरादूनः राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ओर से जारी गाइड लाइन के बाद लालढांग—चिलरखाल वन मोटर मार्ग पर चल रहे पुल निर्माण कार्य पर शासन की ओर से लगाई गई रोक को हटा दिया गया है। वन महकमे ने वन व वन्य जीवों की सुरक्षा के र्षिं्टिगत निर्माण कार्य में लगी रोक को हटा दिया।

सनद रहे कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से जारी अनुमति के बाद लालढांग—चिलरखाल वन मोटर मार्ग पर चार पुलों के निर्माण को उत्तराखंड शासन ने अनुमति जारी की। निर्माण कार्य जोरों पर था, इस बीच राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से जारी एक गाइड लाइन के साथ ही सड़क निर्माण का मुद्दा राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में पहुंच गया, जिसके बाद शासन ने निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी। बुधवार को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और एनटीसीए की दो—सदस्यीय टीम ने लालढांग—चिलरखाल वन मोटर मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया व मार्ग निर्माण को लेकर आज तक हुई कवायद का भी विस्तृत ब्योरा एकत्र कर दिल्ली वापस लौट गई।

इधर, शासन स्तर पर लगातार इस वन मोटर मार्ग पर बंद पड़े निर्माण कार्य को शुरू किए जाने के लिए रास्ता तलाशने के प्रयास जारी रहे। गुरूवार को इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई, जिसमें सड़क को लेकर अहम निर्णय लिए गए। गुरूवार को हुई बैठक के उपरांत शुक्रवार को प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने इस संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिया। जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि लालढांग—चिलरखाल वन मोटर मार्ग के सुर्ढ़िंीकरण का कार्य पारिस्थितिकीय रूप से पूर्णतः पोषणीय है, जिस कारण भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस लेने की जरूरत नहीं थी। बताया कि मार्ग में वृक्षों का पातन न होने, मार्ग निर्माण से भूमि कटाव रूकने व कल्वर्ट व क्रास ड्रेनेज निर्माण से वर्षाकाल में वन्यजीवों के साथ ही वन र्किमयों भी सुगमता से बरसाती नदियों को पार कर पाएंगे। प्रमुख वन संरक्षक के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि निर्माण कार्यों पर रोक लगाया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है।

प्रमुख संरक्षक की ओर से आदेश जारी होने के बाद इस वन मार्ग पर निर्माण कार्यों में लगी रोक हट गई है। निर्माण कार्यों पर लगी रोक हटते ही सड़क पर पुल निर्माण कार्य पुनः शुरू हो गया है।


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