पूरा देश जहां गर्मी की तपिश में उत्तराखंड में फट रहे बादल
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उत्तराखंड में बीते कई दिनों से लोग गर्मी से बेहाल थे लेकिन बिती रात से उत्तराखंड मेें मौसम ने करवट ली और प्रदेश के कई इलाकों में झमाझम बारिश हुई जिससे लोगों को गर्मी से जरूर निजात मिली । मौसम निदेशक विक्रम सिह ने बताया कि आगामी कुछ दिनों में प्रदेश में तापमान में गिरावट आएगी जिससे कि लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की संभावना है ।
कब फटतेे हैं बादल
बादल फटना बारिश का एक चरम रूप है। इस घटना में बारिश के साथ कभी कभी गरज के साथ ओले भी पड़ते हैं। सामान्यतरू बादल फटने के कारण सिर्फ कुछ मिनट तक मूसलाधार बारिश होती है लेकिन इस दौरान इतना पानी बरसता है कि क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। बादल फटने की घटना अमूमन पृथ्वी से १५ किलोमीटर की ऊंचाई पर घटती है। इसके कारण होने वाली वर्षा लगभग १०० मिलीमीटर प्रति घंटा की दर से होती है। कुछ ही मिनट में २ सेंटी मीटर से अधिक वर्षा हो जाती है, जिस कारण भारी तबाही होती है।
मौसम विज्ञान के अनुसार जब बादल भारी मात्रा में आद्रता यानि पानी लेकर आसमान में चलते हैं और उनकी राह में कोई बाधा आ जाती है, तब वो अचानक फट पड़ते हैं, यानि संघनन बहुत तेजी से होता है। इस स्थिति में एक सीमित इलाके में कई लाख लीटर पानी एक साथ पृथ्वी पर गिरता है, जिसके कारण उस क्षेत्र में तेज बहाव वाली बाढ़ आ जाती है। इस पानी के रास्ते में आने वाली हर वस्तु क्षतिग्रस्त हो जाती है। भारत के संदर्भ में देखें तो हर साल मॉनसून के समय नमी को लिए हुए बादल उत्तर की ओर बढ़ते हैं, लिहाजा हिमालय पर्वत एक बड़े अवरोधक के रूप में सामने पड़ता है।
आईए आपको आकडों के जरिए समझाते है कि कब – कब बादल फटने से भारी तबाही हुई
अवधि वर्षा स्थान दिनांक
1 मिनट 1.9 इंच (48.26 मि॰मी॰) लेह, जम्मू और कश्मीर, भारत 06 अगस्त 2010
1 मिनट 1.5 इंच (38.10 मि॰मी॰) बरोत, हिमाचल प्रदेश, भारत 26 नवम्बर 1970
5 मिनट 2.43 इंच (61.72 मि॰मी॰) पोर्ट बेल्स, पनामा 29 नवम्बर 1911
15 मिनट 7.8 इंच (198.12 मि॰मी॰) प्लम्ब पॉइंट, जमैका 12 मई 1916
20 मिनट 8.1 इंच (205.74 मि॰मी॰) कर्टी-दे-आर्गस, रोमानिया 7 जुलाई 1947
40 मिनट 9.25 इंच (234.95 मि॰मी॰) गिनी, वर्जीनिया, संयुक्त राज्य अमेरिका 24 अगस्त 1906
10 मिनट उपलब्ध नहीं केदारनाथ, उत्तराखंड, भारत 16 जून 2013
15 मिनट उपलब्ध नहीं केदारनाथ, उत्तराखंड, भारत 17 जून 2013
बादल फटने और बिजली गिरने के घटना से बचने के लिए कर सकते है ये उपाय
1- इस दौरान जंगल में पेड़ के नीचे न खड़े हो ।
2- बिजली के खंबों और वृक्षों से दूर रहें ।
3- धात्विक वस्तुओं से भी दूरी बनाए रखें।
4- विद्युत् उपकरणों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
5- आपातस्थिति को छोड़कर मोबाइल, टेलीफोन का उपयोग नहीं नहीं करना चाहिए।
6- विद्युत सुचालक वस्तुओं जैसे फोन, धातु के पाइप, स्टोव आदि से दूर रहना चाहिए।
7- किसी पहाड़ी की चोटी पर खड़े न रहें।
8- किसी जल स्रोत में तैर या नहा रहे हो तो उससे निकल कर भूमि पर आ जाए।
9- यदि आपके सिर के बाल खड़े हो रहे हो तो आपके आसपास खतरा हो सकता है। किसी अनहोनी से बचने के लिए अपने हाथों से बालों को ढ़क कर सिर को घुटनों में छुपा लें।
10- विद्युत से बचाव के लिए भवनो, सार्वजनिक इमारतों के ऊपर तड़ित चालक लगवाना चाहिए।
11- घर की खिड़कियों को पूरा बंद कर दें।
12- जंगल में होने पर निचले स्थान या घाटी क्षेत्र में रहें, लेकिन वहां आकस्मिक बाढ़ से भी सावधान रहें।
बादल फटने और बिजली गिरने के घटना से बचने के लिए हमें इनके प्रति जनमानस को जागरूक करना होना ताकि वह इन घटनाओं से निपटने के लिए तैयार रहें और जान-माल की हानि को कम से कम कर सकें।
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