दिल्ली में हुई सबकी मुलाक़ात! लूट के आरोपी और पीड़ित पलटेंगे?

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1 करोड़ की लूट के हाई वोल्टेज ड्रामे को तकरीबन १० दिन बीत चुके है STF के हाथ अभी तक खाली है जबकि जांच ट्रांसफर हुए तीन दिन बीत चुके है हाई वोल्टेज ड्रामा अपने चरम पर है… इस खबर में सवाल कई खड़े होते है जो इन सब बातो पर सोचने पर मजबूर करते है कि यंहा विश्वस्त सूत्रों कि जानकारी एकदम सटीक बैठती है और खबर ये भी आ रही है जब से आरोपी पुलिस वालो पर मुकदमा दर्ज हुआ है तभी से सभी फरार चल रहे है यानि बिना किसी आधिकारिक सुचना दिए गायब है जो इस बात को बल देती है कि दाल में कुछ काला है या दाल ही पूरी काली है सेटिंग का खेल शुरू के साथ ख़त्म भी हो चूका है बस केस पलटने के बयान आने बाकी है…. 

 सवाल नंबर 1
आई जी साहब की गाडी का दुरूपयोग कैसे धड़ल्ले से चल रहा था..न जाने आई जी साहब की गाडी से कितने अनैतिक कार्यो को अंजाम दिया गया होगा ये तो एक गंभीर जांच का मामला है
सवाल नंबर 2
क्या पुलिस का होनहार दरोगा जिसके पास अपने बैच में सर्वाधिक मैडल है जिसमे पूर्व में डीजीपी साहब ने भी २ मैडल दिए थे पर भी सवालिया निशान खड़े करता है क्या ये भी सेटिंग बाजी से अर्जित किये गए.        

आपको ये जानकार काफी हैरानगी होगी कि तीनो लूट के पुलिस आरोपी, फूटबाल के खिलाडी है और शुरू से ही उत्तराखंड पुलिस के लिए सभी साथ में खेलते आये है और भी मजेदार बात हाल ही में कुछ समय पहले उत्तराखंड पुलिस ने लूट के आरोपी दरोगा को फुटबॉल टीम का मैनेजर बनाकर भेजा था और उस टीम में सभी आरोपी पुलिस मौजूद थे..तो क्या ऐसे ही कारनामो के चलते दरोगा जी होनहार की लिस्ट में शामिल हो गए तो क्या इन्हे मनमानी करने से पूर्व किसी की अनुमति की जरुरत ही नहीं थी शायद इसीलिए आईजी साहब की गाडी से ऐसे कई अनैतिक कार्यो को अंजाम दिया गया होगा हैरानगी की बात तो ये भी है बिना एंट्री किये गाडी कैसे पुलिस लाइन से बहार गयी और कई घंटे बीत जाने के बाद भी किसी को कानो कान खबर भी नहीं…गज़ब की सेटिंग थी
सवाल नंबर 4
नामजद अपराधी अनुपम शर्मा ने ऐसा कौन सा लालच दे दिया कि लूट के आरोपी दरोगा ने जरा भी नहीं सोचा कि इस कुकर्म से विभाग में और विभाग की.. जनता के सामने क्या स्थिति होगी लेकिन आज के हालात तो पुलिस के लिए काफी दयनीय है इस खबर से पुलिस का काफी मनोबल टुटा है और जनता के विश्वास को भी ख़ासा आघात पंहुचा है
सवाल नंबर 5
जब पीड़ित ने रकम ही नहीं देखी तो कैसे मान लिया गया कि बैग में रकम १ करोड़ थी तो क्या पुलिस को पीड़ित ने बताया था कि उसका और नामजद शर्मा का लेन देन तभी पुलिस ने १ करोड़ की रकम पर भरोसा किया
सवाल नंबर 6
जब पीड़ित ने ही रकम नहीं देखी और उसकी लूट हो गयी ये कैसे संभव है..

सूत्र तो यंहा तक बता रहे है कि आरोपी नामजद अनुपम शर्मा के विधिक जानकारों ने आरोपी को इससे बचने के लिए रास्ता भी ढूंढ लिया है पीड़ित द्वारा कराई गयी एफआईआर को ही सबसे बड़ा जवाब माना जा रहा है जो कि आने वाले समय में पुलिस के ऊपर लगे लूट के आरोप को सिरे से नकार दिया जाएगा जानते है कैसे…नामजद आरोपी ये बात कभी नहीं स्वीकार करेगा कि उसने पीड़ित को १ करोड़ की रकम दी है जब रकम ही नहीं दी तो लूट कैसी..

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार दिल्ली में सभी की मीटिंग हो चुकी है और आने वाले समय में इस मामले में सिर्फ आई जी साहब की गाडी का दुरूपयोग में मामला चलेगा पीड़ित को अच्छे से समझा दिया गया है…जो आने वाले समय में दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा… लेकिन इस घटनाक्रम में अगर सबसे जायदा किसी कि फजीहत हुई है तो वो है हमारी मित्र पुलिस और हम और आप.. क्या पुलिस की छवि धूमिल करने वालो को समाज माफ़ करेगा..क्या पुलिस अपने आरोपी दरोगा और सिपाहियों पर भरोसा जाता पायेगा किसी ने सही कहा है कि एक मछली पुरे तालाब को गन्दा कर देती है …जरा सोचिये उन ईमानदार पुलिसकर्मियो का क्या गुनाह जो अपनी नौकरी ईमानदारी से कर रहे है..


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