उत्तराखंड में टूटा मिथक, भाजपा ने फिर किया क्लीन स्वीप

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लोकजन टुडे, देहरादूनः उत्तराखंड में इस बार भाजपा ने यह मिथक तोड़ दिया जिसमें कहा जाता था कि उत्तराखंड में जिस दल की सरकार होती है लोकसभा में वह हारती है। ऐसा इस बार नहीं हुआ है। अब जानते हैं कि उत्तराखंड के लिए डबल इंजन के क्या मायने हैं, लोकसभा चुनाव के नतीजों ने जाहिर कर दिया। दो साल पहले विधानसभा चुनाव के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवभूमि के मतदाताओं से डबल इंजन मांगा था। जनता ने राज्य में लगने वाले डबल इंजन के लिए तीन चौथाई से ज्यादा मत देकर प्रधानमंत्री की मुराद पूरी कर दी। वहीं अब केंद्र में डबल इंजन की बारी आई तो इस आम चुनाव में राज्य के मतदाताओं ने पांच लोकसभा सीटें दोबारा भाजपा की झोली में डालकर मोदी को रिटर्न गिफ्ट थमा दिया।
उत्तराखंड ने अब केंद्र में लगा दिया

डबल इंजन। सत्रहवीं लोकसभा के चुनावी नतीजे डबल इंजन के दम की बखूबी बयानी कर रहे हैं। सभी पांच सीटों पर भाजपा की जीत के बड़े अंतर के पीछे भी पूरे प्रदेश में डबल इंजन के फार्मूले के व्यापक असर को ही माना जा रहा है। केंद्र में लगातार दूसरी दफा नमो यानी नरेंद्र मोदी सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। मोदी सरकार यानी उत्तराखंड के लिए डबल इंजन। केंद्र और राज्य, दोनों ही स्थानों पर एक बार फिर भाजपा सरकारों की बदौलत यह माना जा रहा है कि ऑल वेदर रोड, ;षिकेश—कर्णप्रयाग रेलवे लाइन, बागेश्वर—टनकपुर रेल लाइन के रूप में उत्तराखंड की नई लाइफलाइन बनाने की रफ्तार बदूस्तर जारी रहेगी, वहीं दूरदराज गांवों में बिजली—सड़क—पानी, गरीबों को आवास मुहैया कराने की मुहिम परवान चढ़ सकेगी। केंद्रपोषित योजनाओं में भी राज्य को ज्यादा मदद मिल सकेगी।

उत्तराखंड विशेष राज्य का दर्जा मिलने की वजह से ही केंद्रीय योजनाओं में ज्यादा हिस्सेदारी का लाभ पाने में सफल है। केंद्र की कई योजनाओं में राज्य को 90ः10 और 80ः20 के अनुपात में लाभ मिल रहा है। केंद्रीय योजनाओं में केंद्र के अनुदान की हिस्सेदारी 80 से 90 फीसद तक है, जबकि राज्य को महज 10 फीसद ही आर्थिक बोझ सहना पड़ रहा है। इसके अलावा सीमित संसाधनों के चलते विकास में हाथ तंग होने की समस्या से जूझ रहे उत्तराखंड को केंद्र से अतिरिक्त मदद की दरकार है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डबल इंजन की जरूरत पर जोर देते हुए राज्य की जनता से समर्थन मांगा था। इसका जवाब राज्य के मतदाताओं ने तीन—चौथाई से ज्यादा सीटों के रूप में मिला। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद बीते दो वर्षों में डबल इंजन का दम भी दिखाई दिया है। खासतौर पर ऑलवेदर रोड और नई केदारपुरी के निर्माण के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ने उत्तराखंड में रफ्तार पकड़ी। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी रैलियों में डबल इंजन का हवाला देते हुए जनता के दिलों में दस्तक दी ही, साथ में पार्टी कार्यकर्ताओं में भी जोश का संचार किया।

अब लोकसभा चुनाव में भी उत्तराखंड ने पांचों सीटें भाजपा की झोली में डाल दी हैं। इससे पहले एक्जिट पोल के अनुमानों में भाजपा को बढ़त मिलने की खुशी उत्तराखंड में ही सीधे तौर पर महसूस की गई। अब मतगणना के अंतिम नतीजे घोषित होने में ज्यादा वक्त शेष नहीं है तो केंद्र में दोबारा मोदी सरकार के रूप में उत्तराखंड को डबल इंजन का लाभ मिलना भी तय माना जा रहा है। हालांकि यह संभावना पहले भी व्यक्त की जा रही थी कि राज्य के साथ ही देश और विदेश के श्रद्धालुओं को चार धामों तक पहुंचने के लिए ऑलवेदर रोड और नई केदारपुरी जैसे मोदी के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट का सियासी लाभ सिर्फ उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी भाजपा के खाते में जाएगा। नई केदारपुरी के विकास से मोदी गहरे जुड़े हैं। इसके पीछे उनकी आस्था तो है ही, साथ में इसके सियासी निहितार्थ भी तलाश किए जाते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बाबा केदारनाथ और चार धाम के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर से लेकर दक्षिण भारत श्ौव और वैष्णव मतदाताओं के बड़े वर्ग के बीच पैठ मजबूत करने में सफल रहे हैं। डबल इंजन के फार्मूले के बूते मोदी के सियासी फलक को नया आयाम मिलने में मदद मिली है।


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