हिमाचल सरकार गिराने के नाम पर फंडिंग मैनेजरो तक हिमाचल पुलिस खोजती हुई पहुंची उत्तराखंड !

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लोकजन टुडे, ब्यूरो

रुद्रपुर के भूखण्ड सौदे की हिमाचल तक पहुंची जांच, विपिन जल्होत्रा से पूछताछ

चैतन्य शर्मा के करीबी महेश यादव के माध्यम से हिमाचल से धनराशि आने की आशंका; फर्म, बैंक खातों और वास्तविक लाभार्थी की पड़ताल

रुद्रपुर/किच्छा। हिमाचल प्रदेश के गगरेट विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा और उनके सहयोगियों से जुड़े मामलों की जांच की आंच अब उत्तराखण्ड के रुद्रपुर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। रुद्रपुर की इको पार्क कॉलोनी में एक फर्म के नाम पर खरीदे गए भूखण्ड के संबंध में हिमाचल प्रदेश पुलिस अथवा संबंधित जांच एजेंसी द्वारा स्थानीय कारोबारी विपिन जल्होत्रा से पूछताछ किए जाने और उन्हें नोटिस जारी किए जाने की सूचना है।

सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी ने विपिन जल्होत्रा से भूखण्ड के क्षेत्रफल, वास्तविक बिक्री मूल्य, भुगतान की गई धनराशि, भुगतान के माध्यम, संबंधित बैंक खातों, भूखण्ड खरीदने वाली फर्म तथा उसके वास्तविक लाभार्थी के विषय में जानकारी मांगी है। पूछताछ का प्रमुख बिंदु यह बताया जा रहा है कि संबंधित भूखण्ड के भुगतान के लिए कथित रूप से हिमाचल प्रदेश से धनराशि किस व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा भेजी गई और इस लेन-देन में किच्छा निवासी महेश यादव की क्या भूमिका थी।

कौन हैं महेश यादव और हर्षित तिवारी?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्य सचिव एवं भाजपा नेता राकेश शर्मा जब किच्छा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, उस दौरान उनके पुत्र चैतन्य शर्मा का संपर्क किच्छा निवासी महेश यादव, ग्राम तुर्कागौरी तथा हर्षित तिवारी, वार्ड संख्या-03, उत्तरांचल कॉलोनी से हुआ था।

इसके बाद दोनों की चैतन्य शर्मा से निकटता बढ़ी और वे हिमाचल प्रदेश में उनके विधानसभा चुनाव एवं अन्य राजनीतिक गतिविधियों के दौरान भी सक्रिय रहे। यही कारण है कि जांच एजेंसी अब इनके उत्तराखण्ड स्थित संपर्कों, कारोबारी गतिविधियों, फर्मों और संपत्ति संबंधी लेन-देन की कड़ियां खंगाल रही है।

इको पार्क कॉलोनी का भूखण्ड क्यों आया जांच के दायरे में?

सूत्रों का कहना है कि रुद्रपुर की इको पार्क कॉलोनी में विपिन जल्होत्रा एवं अन्य व्यक्तियों से एक भूखण्ड किसी फर्म के नाम पर खरीदा गया था। इसके भुगतान के लिए कथित रूप से महेश यादव के माध्यम से हिमाचल प्रदेश से धनराशि भेजी गई थी।

इसी संभावित वित्तीय कड़ी को समझने के लिए विपिन जल्होत्रा से विस्तृत पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि—

– भूखण्ड खरीदने वाली फर्म का वास्तविक नियंत्रण किसके पास है;

– फर्म के निदेशक, साझेदार एवं लाभार्थी कौन हैं;

– भूखण्ड की वास्तविक कीमत और अभिलेखों में दर्शाई गई कीमत में कोई अंतर तो नहीं है;

– भुगतान किस बैंक खाते से और किस उद्देश्य से किया गया;

– महेश यादव की भूमिका केवल मध्यस्थ की थी अथवा लेन-देन में उनका कोई प्रत्यक्ष हित भी था;

– धनराशि का संबंध चैतन्य शर्मा या उनके सहयोगियों के किसी अन्य वित्तीय लेन-देन से तो नहीं है।

भूखण्ड की रजिस्ट्री, खसरा विवरण, भुगतान की वास्तविक राशि और संबंधित बैंक खातों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विपिन जल्होत्रा की भूमिका केवल विक्रेता/कारोबारी संपर्क की थी अथवा उन्हें इस वित्तीय लेन-देन की पृष्ठभूमि और वास्तविक लाभार्थी की जानकारी थी

ठेका दिलाने के नाम पर आठ लाख रुपये लेने का भी आरोप

नवंबर 2024 में ऊना निवासी ठेकेदार सुरेंद्र कुमार भोला ने तत्कालीन गगरेट विधायक चैतन्य शर्मा तथा उनके सहयोगियों महेश यादव और हर्षित तिवारी के विरुद्ध धोखाधड़ी एवं आपराधिक षड्यंत्र की शिकायत दी थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार उसने लोक निर्माण विभाग में ठेका दिलाने के लिए जनवरी 2024 में चैतन्य शर्मा से संपर्क किया था। आरोप है कि उसे महेश यादव और हर्षित तिवारी से मिलने के लिए कहा गया तथा ठेका दिलाने के एवज में आठ लाख रुपये मांगे गए। इसमें छह लाख रुपये कथित रूप से एक बैंक खाते में जमा कराए गए और दो लाख रुपये नकद दिए गए। शिकायतकर्ता का आरोप था कि धनराशि देने के बावजूद न तो उसे ठेका मिला और न ही पैसे वापस किए गए।

चैतन्य शर्मा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए इन्हें राजनीतिक षड्यंत्र बताया था।

विधायक निधि से जुड़ी जांच भी चर्चा में

अगस्त 2026 में सामने आई मीडिया रिपोर्टों में चैतन्य शर्मा से जुड़े ठेका प्रकरण के साथ विधायक ऐच्छिक निधि के कथित दुरुपयोग की जांच का भी उल्लेख किया गया है। बताया जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो विभिन्न दस्तावेजों, बैंक खातों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रहा है।

हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि रुद्रपुर का भूखण्ड सौदा ठेका प्रकरण, विधायक निधि की जांच अथवा किसी अन्य वित्तीय जांच का हिस्सा है।

राकेश शर्मा के विरुद्ध अलग मुकदमा

चैतन्य शर्मा के पिता राकेश शर्मा के विरुद्ध हिमाचल प्रदेश में दर्ज अभियोग इससे अलग है। फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायकों को कथित रूप से प्रभावित करने, धन एवं संसाधनों के इस्तेमाल तथा आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में 10 मार्च 2024 को शिमला के बालूगंज थाने में राकेश शर्मा और तत्कालीन निर्दलीय विधायक आशीष शर्मा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था।

मामले में चुनाव संबंधी धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई थीं। अप्रैल 2025 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी को प्रारम्भिक स्तर पर निरस्त करने से इनकार करते हुए जांच एजेंसी को जांच पूरी करने का अवसर दिया था। आरोपी पक्ष ने मुकदमे को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था।

कई एजेंसियों की नजर होने की संभावना

रुद्रपुर के भूखण्ड सौदे में यदि हिमाचल प्रदेश से हुए वित्तीय हस्तांतरण की पुष्टि होती है तो संबंधित बैंक खाते, फर्म, धनराशि का स्रोत और वास्तविक लाभार्थी जांच के महत्वपूर्ण बिंदु बन सकते हैं। लेन-देन की प्रकृति और धनराशि के स्रोत के आधार पर अन्य सक्षम एजेंसियां भी मामले का संज्ञान ले सकती हैं।


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