क्या ऐसे पुनर्जीवित होंगी हमारी नदियां?

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देहरादून : प्राचीन काल से ही नदियों को  जीवनदायिनी माना गया है। विश्व की कई बड़ी और प्राचीन सभ्यताएं जैसे मेसोपोटामिया, हरप्पा आदि नदियों के किनारे ही बसी थी। और इन्हीं नदियों की बदौलत ये प्राचीन सभ्यताएं फली और फूली। इसी क्रम में अब नाले का रूप ले चुकी रिस्पना नदी को एक बार फिर से पुनर्जीवित करने की कवायद शुरू की जा रही है। इसके लिए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मिशन रिस्पना से ऋषिपर्णा परिक्रमा शुरू करेंगे। जिसका मकसद सरकार और जनसहभागिता से प्रदेश की नदियों की स्वच्छता के लिए जनजागरूकता बढ़ाना होगा।ये सभी कार्यक्रम देवभूमि विकास संस्थान के तत्वावधान में आयोजित होंगे।

देवभूमि विकास संस्थान के संरक्षक त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि रिस्पना समेत प्रदेश की सभी नदियों के पुनर्जीवन के साथ ही उन्हें प्लास्टिक कचरा मुक्त करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत टोलियों बनाकर मिशन रिस्पना टू ऋषिपर्णा परिक्रमा शुरू की जाएगी। सरकार और जनसहभागिता से प्रदेश की सभी नदियों को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए समाज में जनजागरुकता बढ़ाने के लिए भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

ऐसे कैसे पुनर्जीवित होगी नदियां ?

आपको बता दें की इससे पहले अपने कार्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रिसपना नदी को पुनर्जीवित करने के लिए रिसपना नदी के मुख्य श्रोत से लेकर जहां जहां से यह नदी बहती है और जहां तक बहती है उसके लिए नदी के किनारे वृक्षारोपण किया था जिसमे उत्तराखंड के समस्त विभागाें के अधिकारी और कर्मचारियों ने रिस्पना नदी के किनारे वृक्षारोपण किया था। लेकिन गौर करने वाली बात यह है की तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभागों के कर्मचारियों के साथ मिल कर वृक्षारोपण तो कर लिया लेकिन उसके बाद इन वृक्षों की देखभाल नहीं की गई, नतीजन आज उन वृक्षों की जगह बड़े बड़े गड्ढे है जिनमे कूड़ा व प्लास्टिक भरा हुआ है। साथ ही जब विभागो के अधिकारी और कर्मचारी किसी जगह पर पेड़ लगाने गए तो वहां भी ढेर सारा प्लास्टिक और कचरा फैला कर गए। डंपिंग जोन बन चुकी रिसपना नदी की हालत सभी ने देखी है लेकिन आज तक इसे पुनर्जीवित करने के लिए किसी विभाग तो क्या किसी मंत्री और मुख्यमंत्री ने भी ठोस कदम नहीं उठाए।

क्या ऐसे हमारी ऋषिपर्णा या रिस्पना नदी पुनर्जीवित होगी?  हमारे नेताओ, मंत्रियों, अधिकारियों के साथ साथ आम जनमानस को भी समझना होगा की इस अभियान के अंतर्गत सिर्फ पेड़ लगाने से ही काम नही चलेगा बल्कि उस लगाए गए पेड़ की जिम्मेदारी के साथ देखभाल भी करनी होगी। जिससे वो पेड़ अच्छे से बड़ा हो और फले फूले, जिससे प्रदेश में हरियाली के साथ साथ एनवायरनमेंट में इकोलॉजी भी मेंटेन रहे।  अगर इस काम की शुरुवात एक मिशन की तरह से की गई है तो इसे एक मिशन की तरह ही अंजाम तक पहुंचाना होगा, न की सिर्फ मीडिया कवरेज के लिए।

 


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