उत्तराखंड: मुख्यमंत्री ने हेली सेवाओं के सुरक्षा मानकों को लेकर दिए सख्त निर्देश!

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लोकजन टुडे:

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। हाल के वर्षों में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए, उन्होंने सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने के आदेश दिए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और हेली सेवाओं के संचालन में पारदर्शिता व विश्वसनीयता लाना है।
हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं की ऑडिट के निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने गत वर्षों में हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं की गहन जांच और ऑडिट के लिए निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि इन हादसों की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इस साल चारधाम यात्रा के दौरान चार हेलीकॉप्टर हादसे हो चुके हैं, जिनमें से एक गंभीर दुर्घटना उत्तरकाशी के गंगनानी में हुई, जिसमें पायलट समेत छह लोगों की जान चली गई। इन घटनाओं ने हेली सेवाओं के संचालन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर किया है। मुख्यमंत्री ने विमानन दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को जांच में तेजी लाने और ठोस सिफारिशें प्रस्तुत करने को कहा है।
चारधाम वैली में वैदर कैमरे अनिवार्य
हेलीकॉप्टर हादसों का एक प्रमुख कारण मौसम संबंधी अनिश्चितताएं हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा मार्गों पर सभी हेलीपैड्स और संवेदनशील क्षेत्रों में वैदर कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। ये कैमरे वास्तविक समय में मौसम की जानकारी प्रदान करेंगे, जिससे पायलटों को उड़ान के दौरान बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी। इससे न केवल हादसों की संभावना कम होगी, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी बढ़ेगी।
यूकाडा को डबल इंजन हेलीकॉप्टर नीति की जिम्मेदारी
उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूकाडा) को भविष्य में केवल डबल इंजन हेलीकॉप्टरों के संचालन के लिए एक ठोस नीति तैयार करने का निर्देश दिया गया है। डबल इंजन हेलीकॉप्टरों को सिंगल इंजन हेलीकॉप्टरों की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इंजन विफलता की स्थिति में भी ये सुरक्षित उड़ान भर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम जैसे उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में डबल इंजन हेलीकॉप्टरों का उपयोग अनिवार्य होना चाहिए। यूकाडा को इस नीति को जल्द से जल्द लागू करने के लिए कहा गया है ताकि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा सके।
अगले 10 वर्षों के लिए हेली सेवा कार्ययोजना
मुख्यमंत्री ने यूकाडा को अगले 10 वर्षों के लिए हेली सेवाओं की एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस कार्ययोजना में न केवल चारधाम यात्रा, बल्कि आदि कैलाश, ओम पर्वत और अन्य पर्यटन स्थलों के लिए हेली सेवाओं का विस्तार शामिल होगा। कार्ययोजना में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:

  • सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन: सभी हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों को DGCA के दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
  • पायलट प्रशिक्षण: उच्च ऊंचाई और जटिल मौसम परिस्थितियों में उड़ान के लिए विशेष प्रशिक्षण।
  • हेलीपैड्स का उन्नयन: चारधाम यात्रा मार्गों पर हेलीपैड्स को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना।
  • निगरानी तंत्र: हेली सेवाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए तकनीकी उपकरणों का उपयोग।
  • यात्री सुविधाएं: यात्रियों के लिए बेहतर बुकिंग प्रणाली, पारदर्शी किराया नीति और आपातकालीन सेवाएं।
    मुख्यमंत्री का जोर: “सुरक्षा सर्वोपरि”
    मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। हमारी जिम्मेदारी है कि हर यात्री सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव करे।” उन्होंने निजी हेली सेवा प्रदाताओं को भी चेतावनी दी कि सुरक्षा मानकों से समझौता करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
    हाल की घटनाओं का संदर्भ
    हाल ही में, 8 मई 2025 को उत्तरकाशी के गंगनानी में हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए थे। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी, और मुख्यमंत्री ने इसकी उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए थे। इसके अलावा, केदार घाटी में दो और बदरीनाथ के पास एक हेलीकॉप्टर अनियंत्रित होने की घटना भी सामने आई थी। इन घटनाओं ने हेली सेवा संचालन में सुधार की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इन निर्देशों से उत्तराखंड में हेली सेवाओं के संचालन में एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है। वैदर कैमरों की स्थापना, डबल इंजन हेलीकॉप्टर नीति, और दीर्घकालिक कार्ययोजना जैसे कदम न केवल चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाएंगे, बल्कि राज्य के पर्यटन और आपातकालीन सेवाओं को भी मजबूती प्रदान करेंगे। यूकाडा को इन निर्देशों को लागू करने के लिए समयबद्ध तरीके से काम करने को कहा गया है, ताकि भविष्य में हेलीकॉप्टर हादसों को रोका जा सके और तीर्थयात्रियों का विश्वास जीता जा सके।


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