गली गली में शोर है, जाली छुटभैया चोर है…

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चचा बतोला


व्यंग चाचा बतौला और भतीजा

आज़ पेश है एक और काल्पनिक कहानी इसका किसी और कहानी से कोई दूर दूर तक वास्ता नहीं है लेखक भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने दर्शकों/पाठको के लिए व्यंग्यात्मक और काल्पनिक घटनाओं से भरी कहानियाँ पेश करते रहेंगे। इसे सच्ची घटनाओं से बिल्कुल भी ना जोड़ें 😝😝😝😝😝

*गली गली में शोर है*, *जाली छुटभैया चोर है*..
अबे भतीजे यों क्या कह रहा है ये कौन है जाली और क्यों है यो चोर…चच्चा यो वही चोर है जिसने अभी-अभी 75 का गुल्ला मारा है पता है लोगों को डरावे है मुखिया के नाम से…और अपनी जेब भर लेवे है इसी चक्कर में आकर अभी हाल ही में अपने इनामी पार्टनर से पहले काम करवाया जो उसने लूट से लाभ कमाया उसी में से 75 का गुल्ला खुद भी खा लिया। पता है क्यों, क्योंकि उसकी जान के लाले पड़ गए थे, कुछ खतरनाक रक्षक उसे ढूंढ रहे थे, वो बाबा के लोग थे। उनसे दुबककर भगदड़ ने अपने पार्टनर जाली के यहाँ शरण ली थी।

इसकी एवज में जाली ने 75 लाख का गुल्ला खुद खाया 30 का गुल्ला इसके चेल्ले बंदर ने खाया और 30 का गुल्ला इसके नौकर अपने आप को चुलबुल समझने वाले ने खाया। जैसे इस बात की खबर बाबा को लगी तो उन्होंने जांच कराकर यूं पता कर लिया है कि आखिर यू मास्टरमाइंड जाली है? जब इस बात का पता लगाया गया कि ये दो कौड़ी का नेता कौन है जो फूल को गंदा करने में जुट गया है। इसकी शिकायत बाबा ने अपने छोटे भाई जो इसका मुखिया है से भी कर दी। चच्चा खबर तो यह भी है कि मुखिया ने इसे बहुत धमकाया है और अपने घर से भगा दिया। जब इसकी सूचना चुलबुल के बड़े बॉस को लगी तो उसने छोटे बॉस की क्लास लगा दी।

मुखिया खासा नाराज है। खुफिया जांच भी चला रखी हैl इसके बाद जाली की जल गई है, चोरी पकड़ी गई है। कहां तो बड़े बड़े ख्वाब देख रहा था अब मुखिया की नजरों में दो कौड़ी की औकात रह गई है। ओं तेरे की.. ओहो तू इस चोर की बात कर रहा है यो चोर के साथ -साथ डकैत भी है। ये मौका पाकर चौका मारे हैं किसी का सगा नी जिसे इसने ठगा नहीं, कई ठेकेदारों का माल भी ऐंठ रखा है वो भी बताऊंगा तुझे उसका भी हिसाब किताब अभी होना बाकी है। मुख्या इसकी गुप्त जाँच भी करा रहा है क्यूकी इसकी चोरी ने पड़ोसी बाबा से भी नाराजगी झेलनी पड़ी है।

लेकिन भतीजे तुझे यो भी पता होगा कि यो ₹1,35 की चोरी का माल आया कहां से….यह भगदड़ वाले ने कहां से कमा के दिया था इन्हें? ये सारे सफ़ेद कपड़े पहनने वाले चोर हैं। मुखिया के साथ फोटो खिंचवा कर फेसबुक पर डाल कर लोगो को लूटने का काम आजकल जोरो पर है। इसी डर से बड़े बड़े रक्षक भी इससे डरे हैं। तभी तो चुलबुल जैसे लोगों को नौकर बना के रखे हैं । चुलबुल के तो कई धंधे इसके साथ चल रहे हैं फिकर न करें, कागज दूँगा तुझे।

अभी तो यों सुन यों करोड़ रुपए आए कहाँ से.. काले बंदर ने रावण के ससुराल में एक बड़ी जमीन खरीदी थी जो पूरी विवादित थी, उसी जमीन को खाली कराया था भगदड़ गैंग ने, यह जाली के चेल्ले बन्दर ने जमीन का सौदा किया था।इसी ज़मीन को कुछ लाखों में खरीदकर भगदड़ गैंग ने खाली कराया था और जमीन को करोड़ों रुपये में बिकवाया था। भगदड़ को इसमें मोटा माल मिला था।

उसी माल में से भगदड़ ने अपनी जान बचाने के लिए अपने पार्टनर काले बंदर से जिक्र किया था । इस बात को सुनकर जाली और बंदर ने मिलकर भगदड़ से उसकी जान की कीमत में मोटी रकम वसूल की थी। इसी के बाद भगदड़ ने ₹1.35 यहां भिजवाए थे, जिसमें बंदर ने अपने गुरु जाली का हिस्सा ₹75 का गुल्ला, 30 का गुल्ला चुलबुल को और 30 का गुल्ला खुद बंदर ने चोरी से छुपा लिया था । यह वही बंदर है जिसने पूरे खेल में रकम से लेकर चुलबुल के कमरे में काला बैग पहुंचाया था।

इस खेल को खेलने के लिए एक महीने पहले रात की दावत में जब जाली समेत चार अकड़म विकडम समेत बंदर मौजूद था खेल का षड्यंत्र रचा गया था।

चर्चा तो यो भी है बेटा…इसी जाली फर्जी ने अपना रूआब दिखाते हुए चिलबुल के बॉस को चुलबुल को अपने पास रुकवाने के लिए आंखें दिखाई थी। डरे सहमे बॉस ने ना हां किया था ना किया था, लेकिन दुबककर अपने घर बैठ गया था। नौकरी भी तो करनी है। चोरों से भी डरना है क्यूंकि माल भी चोर कमा के देंगे। तभी तो मामला खुलने के बाद 3 घंटे में चुलबुल को वहां से रुखसत कर दिया था और पहाड़ में भगा दिया था। चचा तुम्हारी कहानी में तो बहुत दम है। क्यों न आपकी कागज भी छाप दे? मुझे मजा बड़ा आवेगा। वैसे तो बाबा की टीम भी लगी हुई है, जल्दी मजा देखने को सबको मिलेगा। रुका रह बेटा सारा हिसाब यहीं होगा।

जय बाबा की, कावड़ की बधाई।

व्यंग कथा

ये लेखक की काल्पनिक कथा है कृपया इसे सच्ची कहानी ना समझे…


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