व्यंग कथा चाचा बतौला स्पेशल बुरा ना मानो दिवाली है न्योछावर की कहानी है!

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लोकजन टुडे, देहरादून

नमस्कार दर्शकों! दीवाली आने वाली है, खुशियां लाने वाली है। लेकिन उत्तराखंड में इन दिनों दो तरह के बजट चल रहे हैं — एक ऊपर, एक नीचे। ऊपर गैरसैंण में सात हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पास हो रहा है, और नीचे… चलिए, चाचा-भतीजे की बातचीत सुनिए।

चाचा: अरे भतीजे, तू कौन सा गाना गा रहा है? “दीवाली आने वाली है, खुशियां लाने वाली है, डब्बे होंगे भारी…”

भतीजा: चाचा, डब्बे तो भारी होने वाले हैं। लेकिन किसके?

चाचा: पहाड़ में तो सरकार सात हजार करोड़ का बजट पास कर रही है, जनता का भला होगा। लेकिन सुना है अलमारी वाले कालू ने अपनी बॉस मैडम को एक नया प्लान समझाया है।

भतीजा: वहीं जो अलमारी में छुप गया था!

चाचा: हां वही। उसने अपनी बॉस मैडम से कहा — “मैडम जी, दीवाली आने वाली है, खुशियां लाने वाली है। अगर हम बड़े मालदारों से सलामी का न्यौछावर ले लें तो डब्बे भारी हो जाएंगे।” मैडम को बात पसंद आ गई। अब सलामी की जिम्मेदारी कालू को दे दी, और टेंट लगाकर कुर्सियां बिछवाने और कार्ड बांटने का काम अपने कमांडरों को।

भतीजा: अरे, चाचा यह तो गंभीर मामला लग रहा है। खुलकर बताओ।चाचा: अबे जुबान खोली और उड़ा देंगे हमारी खोली।अरे चाचा सुना कहानी इनकी ऐसी कम तैसी… अभी फिर कह रहा हूं, मैं सोच लें, जबान खोलने से जेल तो नहीं हो जाएगी?

मैडम लठ लटका के घूम रही हैं। जिसने नहीं दिया, उसकी खाल खींचने की तैयारी है। कार्ड छप गए हैं, लिस्ट बन गई है, न्योते भेज दिए गए हैं। बकरे कटने की तैयारी शुरू हो गई है। जिस बकरे ने मना किया, उसका नंबर सबसे पहले आएगा।

भतीजा: घने नीच हो लिए! सुना तो यों भी है कि कालू ने मुखिया से वादा किया था बदमाशों का जीना हराम कर दूंगा, दीवाली तक रुक जाओ, लेकिन यहां तो शरीफों का नाश हो रहा है।चाचा: बड़ा मक्कार है ये। मीठी-मीठी बातें करता है। मैडम दो शेर पाल के रखे हैं, उसी से सब डरे हुए हैं। वरना होश ही न आने देवे था। अलमारी वाला कालू तो एडवांस टीडीएस काटने में जुट गया है। मुखिया के नाम पर बड़ा खाता खुल गया है,

आज से बही-खाते की सलामी शुरू हो रही है मंडी सच चुकी है।माल की घंटी बज चुकी है दीवाली आने वाली है खुशियां लाने वाली है।भतीजा: तो फिर ये क्या हो रहा है? ऊपर अनुपूरक बजट पास हो रहा है, नीचे कालू एंड कंपनी अपना बजट पास करवा रही है?

चाचा: बिल्कुल। देहरादून में बड़ी थू-थू हो रही है, लेकिन बताऊं तो कैसे बताऊं। दीवाली आने वाली है, खुशियाँ लेके आने वाली है। डब्बा होगा भारी… हम पढ़ेंगे सब पर भारी।गैरसैंण में बजट पास हो रहा है, और मैदान में सलामी की तैयारी। एक तरफ विकास की बात, दूसरी तरफ डब्बों की।बुरा ना मानो दीवाली है — थोड़ा सा मजाक, थोड़ी सी चटखारे, और बहुत सारी उम्मीद कि दीये जलें, डब्बे भी भरें, लेकिन सबकी जेबें सुरक्षित रहें।जय देवभूमि, और हैप्पी दीवाली!


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