केदारनाथ में हेलीकॉप्टरों के लिए मॉनिटरिंग तंत्र बनाने की तैयारी

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उत्तराखंड चार धाम यात्रा में सर्वाधिक सड़क मार्ग से यात्रा करते हैं उसके बाद हवाई यात्रा से भी  श्रद्धालु चार धाम पहुंचते हैं मौजूदा समय में सबसे ज्यादा केदारनाथ में हवाई यात्रा होती है एक आंकड़े के मुताबिक 46 दिन में हेलीकॉप्टरों ने केदारनाथ में 46000 चक्कर मार दिए हैं चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टरों के तय मानक से कम ऊंचाई पर उड़ान भरने को लेकर हर बार विवाद होता है। केदारनाथ के लिए उड़ान भर रहे हेलीकॉप्टरों पर निगहबानी के लिए कोई ठोस और प्रभावी तंत्र नहीं है। इसलिए अब यूकाडा एक निगरानी तंत्र बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए  टेंडर प्रक्रिया चल रही है
2013 की आपदा के बाद पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाली केदार और मंदाकिनी घाटी में उड़नखटोलों की उड़ानों पर रियल टाइम निगहबानी के लिए एक प्रभावी तंत्र बनाने की तैयारी है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने इस दिशा में गंभीरता से प्रयास शुरू कर दिए हैं।
इस बारे में डीजीसीए से भी सहयोग मांगा गया है। साथ ही केदारघाटी में हेलीकॉप्टरों की उड़ानों और उनकी पार्किंग पर निगरानी तंत्र के लिए प्रस्तावित टेंडर में बदलाव किए जा रहे हैं। दरअसल, चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टरों के तय मानक से कम ऊंचाई पर उड़ान भरने को लेकर हर बार विवाद होता है। इससे जहां हिमालय वन्य जीव प्रभावित होते हैं वही ग्लेशियरों पर भी इसका असर होता है
ताजा विवाद केदारनाथ वन प्रभाग के दुगलबिट्टा, चोपता और तुंगनाथ सेंचुरी एरिया में एक हेलीकॉप्टर के तय मानक से कम ऊंचाई पर उड़ान से जुड़ा है। इस मामले में गोपेश्वर के डीएफओ ने अज्ञात हेली कंपनी व पायलट के खिलाफ पत्र जारी किए हैं और यूकाडा से भी शिकायत की है। लेकिन परेशानी यह है कि यूकाडा यह कैसे पता लगाए कि किस कंपनी के हेलीकॉप्टर ने मानकों की अनदेखी की।
आज तक मॉनिटरिंग के लिए कोई ठोस और प्रभावी तंत्र नहीं
इसकी मुख्य वजह यह है कि केदारनाथ के लिए उड़ान भर रहे हेलीकॉप्टरों पर मॉनिटरिंग के लिए कोई ठोस और प्रभावी तंत्र नहीं है। हालांकि यूकाडा की ओर से प्रत्येक हेली कंपनी के लिए मानकों के अनुरूप एक रोस्टर बनाया गया। लेकिन सरकार या यूकाडा सिरसी, गुप्तकाशी, मैखंडा, फाटा से उड़ान भरने वाले हेलीकॉप्टरों के बारे में सूचनाओं के लिए हेली कंपनियों पर ही निर्भर है कि उन्होंने कितने चक्कर काटे, कितनी देर हॉल्ट किया और कितनी ऊंचाई पर उड़ान भरी। अब ऐसे में हेली कंपनियां कितनी इमानदारी से यह सूचना देती है यह तो वह स्वयं जानती होंगी
यही वजह है कि अब यूकाडा एक मॉनिटरिंग तंत्र बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए एक टेंडर प्रक्रिया चल रही है। सरकार आने वाले दिनों में एक ऐसी तकनीक या तंत्र चाह रही है जिससे हेलीकॉप्टरों की उड़ानों की संख्या और पार्किंग के साथ उनकी उड़ान की ऊंचाई की रियलटाइम जानकारी भी उपलब्ध हो सके।

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