केदारनाथ में गूगल ट्रांसलेटर की मदद ले रही पुलिस ! आप भी कहेंगे वाह क्या दिमाग लगाया इंस्पेक्टर साहब ने

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रुद्रप्रयाग/ केदारनाथ

टेक्नोलॉजी व अपने अनुभव का इस्तेमाल कर केदारनाथ यात्रा में आये श्रद्धालुओं को मिलवा रही पुलिस।

हर बार होने वाली केदारनाथ धाम यात्रा में असंख्य श्रद्धालु पहुंचते हैं, ये श्रद्धालु देश के हरेक कोने से आते हैं, यहां तक कि विदेशी श्रद्धालु भी पहुंचते हैं। जैसा कि आप जानते ही हैं भारतवर्ष विविधताओं से भरा देश है। यहां पर एक कहावत है कि “कोस कोस पर बदले पानी, दो कोस पर बदले बानी”

ऐसे में देश के दक्षिणी कोने से पहुंचने वाला श्रद्धालु वाणी यानि भाषा के मामले से तो बिल्कुल ही अलग हो जाता है। ऐसा ही वाकया  देखने को मिला जब दिनांक 06/07 मई की रात्रि में शटल पार्किंग गौरीकुण्ड में देर रात्रि करीब 12:30 बजे एक 72 वर्ष की आंध्र प्रदेश से आई वृद्ध महिला कस्तूर अम्मा केदारनाथ धाम से वापस आते समय अपने परिजनों से बिछड़ गई थी जो हिंदी या अंग्रेजी भाषा नहीं जानती थी और अपने परिजनों के सम्बन्ध में हिंदी नहीं आने के कारण स्पष्ट नहीं बता पा रही थी। जिस कारण वह काफी घबरा गई थी व रोने लगी इस दौरान शटल पार्किंग में नियुक्त उपनिरीक्षक रमेश चन्द्र बेलवाल द्वारा उक्त वृद्ध महिला को इशारों से ढाढस बंधाया गया। उनके द्वारा गूगल ट्रांसलेटर के माध्यम से महिला की भाषा को समझने का प्रयास किया गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि इनके साथ आये यात्रियों से ये बिछड़ गयी हैं और साथ वाले आगे हैं या पीछे इसका स्पष्ट तौर पर पता नहीं चल पा रहा था। तकरीबन 3 घंटे के प्रयास के बाद आंध्र प्रदेश से आए तीर्थ यात्रियों की मदद से इन महिला के सोनप्रयाग पहुंच गए परिजनों से सकुशल मिलवाया गया, महिला द्वारा उत्तराखण्ड पुलिस का आभार प्रकट किया गया।
आपको बता दें कि ऊधम सिंह नगर से केदारनाथ धाम यात्रा के संचालन की ड्यूटी हेतु आये उपनिरीक्षक रमेश चन्द्र बेलवाल भीड़ नियन्त्रण व यात्रियों के प्रति मधुर व्यवहार रखने के मामले में अलग ही पहचान रखते हैं, उनका यही अनुभव यात्रा व्यवस्थाओं के उनके संचालन में सहायक सिद्ध हो रहा है। उनके द्वारा इस वर्ष के यात्रा के शुरुआती दिन से ही अपने कर्तव्य निर्वहन के साथ ही श्रद्धालुओं की निरन्तर मदद की जा रही है, उनके सेवा भाव से श्रद्धालु गद-गद होकर न केवल उनको बल्कि सम्पूर्ण उत्तराखण्ड पुलिस परिवार को ढेर सारा आर्शीवाद देकर जा रहे हैं।

 

 


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