पन्तनगर विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाये जाने का विरोध करना गलत: पवन दूबे

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पन्तनगर: विश्व ख्याति प्राप्त गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रोद्योगिकी, विश्वविद्यालय को क्षेत्रीय विधायक राजेश शुक्ला के अथक प्रयासों एवं कृषि मंत्री सुबोध उनियाल की दूरदर्शिता से प्रदेश सरकार केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में अग्रसर है, तो वहीं कुछ विकास विरोधी मानसिकता के कांग्रेसियों के बहकावे में आए भाजपा के लोग भी इसके विरोध में उतर आए हैं।

उनका मत है कि पन्त विश्वविद्यालय के केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनने से युवाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। इस विरोध का जवाब देते हुए प्रदेश के युवा समाज सेवी पवन दूबे ने कहा कि जो विश्वविद्यालय वर्षों पूर्व केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाया जाना चाहिए था। उसकी आज तक दुर्गति इसी ओझी मानसिकता के कारण हुई है, पूर्व में भी जब विश्वविद्यालय को‌ केन्द्रीय बनाने का प्रस्ताव था तो सभी ने सुनियोजित ढंग से इसका विरोध कर केन्द्र में नहीं जाने दिया और इसका खामियाजा आज विश्वविद्यालय एशिया में नंबर एक पर होता था वह अपने देश में मुख्य दस में भी शामिल नहीं हो पाता है।

पवन ने कहा कि क्षेत्रवाद की राजनीति और निजी लाभ के लिए विश्वविद्यालय के साथ यह भेदभाव उसके अपने लोगों ने ही किया है। जिससे आज की स्थिति यह है कि न शिक्षण कार्य सही से चल रहे हैं न हीं केन्द्रो पर कार्यरत लोगों को वेतन मिल पा रहा है। पवन ने आरक्षण वाले मुद्दे का जवाब देते हुए कहा कि विरोधी केवल विश्वविद्यालय का अहित होते देखना चाहते हैं इसलिए यह झूठ फैला रहे हैं। पन्तनगर विश्वविद्यालय को जब केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाया जाएगा तो यहाँ प्रदेश के छात्रों के लिए वर्तमान सीटों से दोगुनी सीटें आरक्षित की जाएंगी। तो युवाओं को‌ आरक्षण में कमी आएगी यह कहना सिर्फ छलावे का झूठ होगा। केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनने से हमारे देश की एक धरोहर जो सुनियोजित ढंग से बर्बाद की जाती रही है।

उसका पुन: खोया गौरव प्राप्त हो सकेगा साथ ही केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनने से सीटों का तो इजाफा होगा ही, शोध कार्य व रोजगार दोनों में वृद्धि होगी। पवन ने विरोधियों को आढ़े हाथों लेते हुए कहा कि कुछ लोग जिनका स्वयं का वजूद धूमिल है वह केवल क्षुब्ध मानसिकता लिए जी रहे हैं और विरोध की राजनीति कर स्वयं को‌ जीवन्त रखना चाह रहे हैं, ऐसे लोगों का सूर्य जल्दी अस्त होता है।


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