“वाह रे काली बवाली!फ़ोन की घंटी से डरकर जो अलमारी में सिमट गए,न आका के रहे, न पप्पू से बच पाए!”

Share your love

संवाददाता: करन सहगल

व्यंग चाचा बतौला और भतीजा

आज़ पेश है एक और काल्पनिक कहानी इसका किसी और कहानी से कोई दूर दूर तक वास्ता नहीं है लेखक भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने दर्शकों/पाठको के लिए व्यंग्यात्मक और काल्पनिक घटनाओं से भरी कहानियाँ पेश करते रहेंगे। इसे सच्ची घटनाओं से बिल्कुल भी ना जोड़ें 😝😝😝😝😝

*काली बवाली के फ़ोन पर ‘हॉरिबल’ घंटी की इनसाइड स्टोरी*

*(विशेष व्यंग्य कथा — असली जैसा पार्ट-2)*

“वाह रे काली बवाली!फ़ोन की घंटी से डरकर जो अलमारी में सिमट गए,न आका के रहे, न पप्पू से बच पाए!”

इश्क़ और जंग में तो सब जायज़ था ही, पर अलमारी के पीछे छुपे हाकिम का फ़ोन उठाना… सरासर आत्मघात था!**देर रात सन्नाटे को चीरती हुई चाचा के मोबाइल की घंटी बजी। स्क्रीन पर चमकता नंबर कुछ जाना-पहचाना सा था। चाचा ने नींद में आंखें मलते हुए घड़ी देखी—रात का डेढ़ बज रहा था।

अरे राम! इतनी रात गए कौन अपनी शामत को दावत दे रहा है?” चाचा बड़बड़ाए।तभी उनके दिमाग की बत्ती जली। उन्हें याद आया कि उनका परम वफादार जासूस ‘मार्केल टाइगर’ इन दिनों पहाड़ों की ठंडी वादियों में अज्ञातवास काटते हुए चाचा के लिए जासूसी की ‘हॉट कुकिंग’ कर रहा है। इससे पहले कि चाचा फोन उठाते, घंटी कट गई।

अब नियम तो यह कहता है कि स्पाइ (जासूस) को कॉल बैक करना ‘मिशन इम्पॉसिबल’ जैसा जोखिम भरा काम है। पर चाचा ठहरे पुराने खिलाड़ी ! उन्होंने अपनी जेब से खास ‘हॉटलाइन’ निकाली और दे मारा नंबर!

दूसरी तरफ से गहरी, रहस्यमयी आवाज़ गूंजी—

“तेरा मार्केल टाइगर अभी ज़िंदा है चाचा! आज दिन में तेरी ‘सुतान’ वाली खबर पढ़ी तो रहा न गया। सोचा, तुझे उस खबर के पेट में छिपी ‘खबर की भी खबर’ सुना दूं, इसलिए इतनी देर रात तुझे ज़हमत दी है ! “चाचा ने हुक्के की नली बगल में सरकाई और मूंछों पर ताव देते हुए गरज पड़े, “अबे मार्केल! तू अभी तक ज़िंदा है बे? मुझे लगा पप्पू के लौंडों ने तुहें भी अलमारी का भूगोल समझा दिया होगा!

“उधर से ठहाका गूंजा, “चाचा राम-राम! तेरा मार्केल टाइगर न केवल ज़िंदा है, बल्कि आज भी पूरे परगने की ‘इनसाइड स्टोरी’ सबसे पहले, पुख्ता सबूतों के साथ अपनी जेब में रखता है… हम्म!

“चाचा ने बात को हवा में उड़ाते हुए कहा, “अबे जा-जा! प्रकाशे (भतीजे) से ज़्यादा पक्की खबर तेरे पास हो ही नहीं सकती। वो आलू का जिगरी यार है, तू जानता नहीं अभी मेरे भतीजे प्रकाशे की पहुंच!”

मार्केल ने उधर से खींसे निपोरते हुए कहा, “अरे चाचा! खूब जानूं तेरे भतीजे प्रकाशे को और उसके जिगरी यार आलू को! पर जो खबर आज मैं तुझे बताने वाला हूं ना, वो पूरे ज़िले में किसी के बाप के पास नहीं है !

“चाचा का सब्र का बांध टूटने लगा, उत्तेजित होकर बोले, “अबे ओ मार्केल! भूमिका मत बांध, सीधे मुद्दे पर आ ! फालतू की राड़ न कर, खबर बता!”

“चच्चा… ज़रा ठंडे दिमाग से सोचकर सच-सच बताना,” मार्केल ने रहस्यमयी लहजे में पूछा, “जब पप्पू के लौंडे दफ़्तर में गदर काट रहे थे, उस वक्त काली बवाली के फोन पर सैकड़ों कॉल आ रहे थे। यहां तक कि काली का ‘बड़े वाला आका’ भी दनादन रिंग मिला रहा था… तो हुज़ूर ने फोन उठाया क्यों नहीं? आज असली खुलासा इसी ‘हॉरिबल घंटी’ पर होगा!

“चाचा ने कहा, “अबे सुन, वो चालबाज़ तो पूरे शहर में ढिंढोरा पीट रहा है कि चाचा की खबर झूठी है!

कह रहा है—’मैं तो उस दिन छुट्टी पर था, पहाड़ों में बर्फ देखने गया था, दफ़्तर में तो था ही नहीं!’

“मार्केल ने सीना ठोककर कहा, “अरे चाचा! वो मुफ़्तखोर वहीं अलमारी के पीछे दुबका हुआ था! अगर पप्पू के लौंडों के हाथ चढ़ जाता तो उसकी ऐसी ‘बक्कल’ उधेड़ते कि हफ्ते भर बैठ न पाता! उसके छिपते हुए की पूरी रील्स मौजूद है, कहो तो अभी चला दूं?”चाचा ने सीना चौड़ा किया, “अबे साले! सोलह दूनी आठ हूं मैं! तू चलाएगा क्या, मैं खुद पूरे शहर में ब्रॉडकास्ट कर दूं! लेकिन तू यह बता, फोन न उठाने के पीछे का रॉकेट साइंस क्या है?

“चाचा कुछ पल के लिए खामोश हुए। फिर अचानक उनके माथे पर बल पड़े और वे चिल्लाए, “ओह तेरी की! यह तो खबर के अंदर से निकला हुआ एटम बम है! अब समझ आया इस महा-चालबाज़ का असली खेल!

“चाचा ने बात का धागा पकड़ते हुए चटकारा लिया, “ईब तू सुन मार्केल! अगर उस वक्त काली बवाली गलती से भी फोन उठा लेता… तो उधर से बजती हॉरिबल घंटी और इधर से गूंजती उसकी चीखें! फोन उठाते ही पिटते कान, उधड़ती चमड़ी और लाल होते पिछवाड़े की लाइव ऑडियो सीधे ‘बड़े वाले’ तक पहुंच जाती! तो सुन बेटा… जब वो अलमारी के पीछे पेट दबाए, सांस रोके, पिछवाड़ा भींचकर बैठा था, उसने सबसे पहले कांपते हाथों से फोन की घंटी साइलेंट की!

अब तू आंख बंद करके सोच—जब दफ़्तर में पप्पू के लौंडे हाथ में बेंत और लाठी लेकर तेरी खाल खींचने ढूंढ रहे हों, और फोन बजे, तो क्या तू हेलो बोलने की गुस्ताखी करेगा ?

“मार्केल थोड़ा भावुक होकर उत्तेजित हो गया, “हां चाचा! मैं तो शेर हूं, मैं तो फोन उठाता! न मैं पप्पू के लौंडों से डरता और न अलमारी के पीछे जासूस होकर दुबकता!

“चाचा ने हुक्के की घूंट खींची और अत्यंत गंभीरता से डांटते हुए बोले, “अबे मूर्ख! अगर वो अलमारी के पीछे से ‘हेलो’ बोल देता, तो क्या होता?”

मार्केल की हंसी छूट गई, “अरे चाचा! यही तो मैं भी समझा रहा था! अगर वो ‘हेलो’ बोलता, तो मुंह से निकली आवाज़ सीधे पप्पू के लौंडों के कानों में मिसाइल की तरह बजती! और अगर वो सच में छुट्टी पर पहाड़ों में होता, तो कम से कम अपने ‘बड़े वाले आका’ का फोन तो उठा ही लेता! आका का फोन न उठाना ही इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि काली वादियों में नहीं, अलमारी के भूगोल में समाया हुआ था। अगर फोन उठा लेता तो लोकेशन का लाइव ट्रैकिंग वहीं ऑन हो जाता और खाल उधड़ना तय था! यही है इस हॉरिबल घंटी की असली ‘इनसाइड स्टोरी’, जो सिर्फ चाचा के गुप्त सूत्रों के पास है!

“चाचा ने ठहाका लगाया और रात के सन्नाटे में गालिब की आत्मा को प्रणाम करते हुए बोले—

वाह रे काली बवाली!फ़ोन की घंटी से डरकर जो अलमारी में सिमट गए,न आका के रहे, न पप्पू से बच पाए !”


Discover more from Lokjan Today

Subscribe to get the latest posts sent to your email.