आधुनिक कृषि यंत्रों से बदली किसान बेनी सिंह की तकदीर, रीपर कम बाइन्डर बना अतिरिक्त आय का जरिया !

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संवाददाता : करन सहगल

उत्तराखंड के देहरादून जिले में आधुनिक कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं के तालमेल ने एक किसान की जिंदगी बदल दी है। सहसपुर विकासखंड के ग्राम कैचीवाला निवासी प्रगतिशील किसान बेनी सिंह आज क्षेत्र के अन्य काश्तकारों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। लगभग 40 बीघा भूमि पर खेती करने वाले बेनी सिंह ने कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर न केवल अपनी लागत घटाई है, बल्कि अपनी आय में भी भारी इजाफा किया है।

सरकारी अनुदान से मिली नई ताकत

बेनी सिंह की इस सफलता के पीछे कृषि विभाग की कल्याणकारी योजनाएं और आधुनिक यंत्र हैं। उन्हें विभाग द्वारा संचालित ‘सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन’ (SMAM) योजना के तहत ‘रीपर कम बाइन्डर मशीन’ पर 2.57 लाख रुपये का अनुदान (सब्सिडी) दिया गया। इसके अलावा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत वर्ष 2025-26 में उन्हें उन्नत किस्म (DBW-187 और DBW-327) का 2 क्विंटल गेहूं का बीज भी उपलब्ध कराया गया।

लागत में कमी और समय की भारी बचत​

कृषि विशेषज्ञों की देखरेख में बेनी सिंह ने वैज्ञानिक विधि से गेहूं की बुवाई की, जिससे फसल की पैदावार शानदार रही। फसल पकने पर जब रीपर कम बाइन्डर मशीन से कटाई की गई, तो समय और पैसे दोनों की बड़ी बचत हुई।

बदलाव के मुख्य बिंदु:

■ समय की बचत: जिस फसल की कटाई में पहले 6 से 7 दिन का समय लगता था, वह अब मात्र 1 दिन में पूरी हो रही है।
​■ लागत में कमी: पहले फसल कटाई पर प्रति बीघा लगभग 1,300 रुपये का खर्च आता था, जो आधुनिक मशीन के आने से बेहद कम हो गया है।
​■ स्वयं का कृषि यंत्र और नलकूप (ट्यूबवेल) होने से खेती अब पहले के मुकाबले अधिक सरल, तेज और किफायती हो गई है।

दूसरों के खेतों की कटाई कर कमाए 1.08 लाख रुपये

​बेनी सिंह ने इस आधुनिक मशीन का लाभ सिर्फ खुद तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने क्षेत्र के अन्य किसानों की लगभग 120 बीघा फसल की कटाई भी इस मशीन से की। इससे अन्य किसानों को तो सुविधा मिली ही, साथ ही बेनी सिंह को 900 रुपये प्रति बीघा की दर से 1 लाख 8 हजार रुपये की अतिरिक्त आय भी प्राप्त हुई।​

प्रेरणा स्रोत बने बेनी सिंह:

आज बेनी सिंह आधुनिक कृषि तकनीकों और यंत्रीकृत खेती को अपनाकर न सिर्फ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त हुए हैं, बल्कि वे अपने क्षेत्र के तमाम किसानों को भी पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक तौर-तरीके अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।


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