SUPER EXCLUSIVE: क्या ‘भदौड़ा सेटिंग’ की खुल गई इनसाइड स्टोरी? जेल पहुंचाने की खाई थी ‘सुपारी’, अब बड़े सूरमाओं पर बैठने जा रही है महा-जांच!

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संवाददाता : करन सहगल

देहरादून/ऊधमसिंह नगर: उत्तराखंड के सियासी और पुलिस महकमे में एक ऐसी ‘इनसाइड स्टोरी’ तैर रही है, जिसने बड़े-बड़े सूरमाओं की नींद उड़ा दी है। अंदरखाने से खबर है कि पिछले कई महीनों से एक कुख्यात गैंगस्टर को ठिकाने लगाने या उसे गलत तरीके से मैनेज करने की एक बहुत बड़ी पटकथा लिखी जा रही थी। चर्चाएं तो यहाँ तक हैं कि इस पूरे खेल में “चवन्नी के जाली नेता और अठन्नी की चोट” वाली कहावत चरितार्थ हो रही है, जहां एक तथाकथित रसूखदार ने इस पूरे मामले की ‘सुपारी’ तक उठा रखी थी!

अब इस पूरे नेक्सस को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या खाकी और सफेदपोशों के इस गठजोड़ का टाइम अब पूरा हो चुका है?

ITI थाने की वो कथित ‘सेटिंग’ और टेक्निकल रडार

सूत्रों के मुताबिक, पिछले कई महीनों से कुछ खास लोगों के बीच लगातार यह ताना-बाना बुना जा रहा था कि कैसे इस कुख्यात खिलाड़ी को गलत तरीके से ITI थाने में पेश कर दिया जाए और फिर वहां से सीधे कोर्ट ले जाकर अपने हिसाब से खेल खेला जाए।

लेकिन, अब खेल उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। पुलिस के उच्च अधिकारियों के स्तर पर इस पूरे मामले की टेक्निकल जांच (Technical Investigation) शुरू करने की सुगबुगाहट है।

112 की कॉल डिटेल पर नजर: क्या पिछले कुछ दिनों में आपातकालीन नंबर 112 पर किए गए कॉल्स और संदिग्धों की कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाली जा रही हैं?

सांसद का वो ‘कर्रा लेटर’ और पहलवान का गुर्गा: चर्चा यह भी है कि इस पूरे मामले में एक ‘पहलवान’ के गुर्गे की सक्रियता और एक माननीय सांसद महोदय के नाम से जारी हुआ कथित ‘कर्रा लेटर’ भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ चुका है।

पुरानी रंजिश और जेल का वो चक्रव्यूह

अगर इतिहास के पन्नों को पलटें, तो यह कोई पहला मौका नहीं है जब इस नेटवर्क को लेकर बवाल मचा हो। इससे पहले भी इस पूरे गैंग, उसके रंगदारी नेटवर्क, और पश्चिमी यूपी से लेकर उत्तराखंड तक फैले इसके इनपुट पर विस्तार से चर्चाएं होती रही हैं। जेल के भीतर से लेकर बाहर तक इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस लगातार इनपुट जुटाती रही है। लेकिन इस बार मामला अलग है, क्योंकि इस बार साजिश बाहर से बैठकर जेल तक के सफर को ‘मैनेज’ करने की थी।

CM धामी की ‘सीक्रेट रडार’ पर बेनामी संपत्तियां !

विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि सूबे के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी तक भी इस पूरे खेल की भनक पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री ने इस पूरे नेक्सस पर एक वृहद स्तर की गुप्त जांच (Secret Inquiry) बिठा दी है। इस जांच की आंच सिर्फ इस सेटिंग तक नहीं रहेगी, बल्कि इसमें शामिल उन तमाम तथाकथित नेताओं और अधिकारियों की बेनामी संपत्तियों तक पहुंचेगी, जिन्होंने इस खेल के जरिए करोड़ों का वारा-न्यारा किया है।

अब से कुछ ही देर में… लोकजन टुडे पर इस पूरी साजिश का एक-एक पन्ना खोला जाएगा। आखिर कौन है वो जो ‘जाली’ चालें चल रहा था ? कौन है वो पहलवान का गुर्गा? और क्या था उस लेटर का राज? देखते रहिए और पढ़ते रहिये, जल्द ही होगा सबसे बड़ा महा-खुलासा!

जब अपराध, रसूख और सियासत एक ही मेज पर बैठकर स्क्रिप्ट लिखने लगें, तो कानून व्यवस्था के सामने संकट खड़ा होना लाजिमी है। एक तरफ जहां अतीत में इस नेटवर्क के खिलाफ पुलिस ने बड़े ऑपरेशन चलाए हैं, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम के भीतर बैठे कुछ लोग इसे दोबारा हवा देने में जुटे थे। 112 की कॉल डिटेल्स, सांसद के कथित पत्र और मुख्यमंत्री स्तर से बैठी बेनामी संपत्ति की गुप्त जांच—ये तीन ऐसे तीर हैं जो अगर सही निशाने पर लगे, तो उत्तराखंड के इस सबसे बड़े कथित सिंडिकेट का पूरी तरह से खात्मा होना तय है। फिलहाल, धमाका होने से पहले की यह खामोशी बहुत कुछ बयां कर रही है।


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