जलता शहर धधकती आग भड़कते लोग ,जानिए हिंसा की पूरी कहानी

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कुमाऊं का प्रवेश द्वार यानी हमारी हल्द्वानी। हल्दु के बहुतायात पेड़ों के नाम से बसे हल्द्वानी शहर की फिजा बिल्कुल शांत रही है। यहां की वादियां सुकून और खुशी देती है। बाहर से आने वाले हर व्यक्ति को यह शहर गले लगा लेता है। बृहस्पतिवार को अचानक ऐसा क्या हुआ, जिससे इस शहर की शांति ही भंग हो गई। किसने शांत फिजा का सुकून और खुशी छीन ली ।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में इस हिस्सा भड़क उठी है। बीते रोज हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में मदरसे को लेकर बवाल हो गया। यहां मलिक के बगीचे में अवैध मदरसा और धर्मस्थल ढहाने गई पुलिस और प्रशासन की टीम पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया। पथराव में सिटी मजिस्ट्रेट रिचा सिंह रामनगर कोतवाल सहित 300 से अधिक पुलिसकर्मी और निगम कर्मी घायल हो गए।

बवाल इतना भड़का की दंगियों ने बनभूलपुरा थाना भी फूंक दिया। पुलिस की जीप जेसीबी दमकल की गाड़ी समेत कई दुपहिया वाहन फूंक दिए गए। आंसू गैस के गोले दागने और लाठी चार्ज के बाद भी जब हालात काबू में नहीं आए तो सबसे पहले अधिकारी जान बचाने के लिए मौके से भाग गए। पुलिस व निगम टीम जैसे तैसे वहां से निकली। प्रशासन ने उपद्रवियों को देखते ही पैर में गोली मारने के आदेश दिए।

इस हिंसा में पिता पुत्र समेत छह लोगों की गोली लगने से मौत हो गई। जिस वजह से शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया।

बता दें की पुलिस सुरक्षा नगर निगम की टीम बृहस्पतिवार शाम करीब 4:00 बजे मलिक के बगीचे में बने अवैध मदरसे व धर्म स्थल को ढहाने के लिए पहुंची थी। जेसीबी जैसे ही अवैध धर्मस्थल की ओर बड़ी आसापास के लोग भड़क गए और पथराव कर दिया। पुलिस और निगम की टीम तीनों ओर से घिर गई।

 

पथराव के बीच लोगों ने जेसीबी तोड़ दी और पुलिस की जीप समेत कई वाहनों में आग लगा दी। पथराव में 150 के करीब पुलिस कर्मी घायल हो गए। पुलिस ने लाठी चार्ज भी किया। लेकिन छतों से हो रहे पथराव के बीच पुलिस कर्मियों के लिए मुश्किल हो रही थी। पुलिस अंदर ना आ पाए इसके लिए उपद्रवियों ने गलियों के आगे टायर जलाकर रास्ता रोक दिया। पुलिस उपद्रवियों से निपट ही रही थी तभी दूसरी ओर कुछ लोगों ने बनभूलपुरा थाना फूंक दिया। अफसरों के वहां से निकलने से नेतृत्वविहीन हुई पुलिस व निगम की टीम वहां से किसी तरह बचते बचाते हुए निकली।

सवाल यह भी है की उत्तराखंड में इस तरह के हालात आखिर किस तरफ इशारा कर रहे है। क्या आने वाले समय में स्थिति और भयानक होगी या फिर सरकार इस हिंसा से निपटने के लिए के लिए कठोर रणनीति बनाएगी।


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