मुफ्त प्रचार का धर्म और खाकी की महिमा !

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लोकजन टुडे, ब्यूरो

उत्तराखंड के पवित्र भूगोल में, जहाँ भाजपा की सरकार पूर्ण निष्ठा के साथ विराजमान है, वहाँ उधम सिंह नगर और नैनीताल ज़िले की पुलिस एक अभूतपूर्व ‘लोक-कल्याणकारी’ अभियान में जुटी हुई है। हरिशंकर परसाई जी कह गए हैं कि दुनिया में कुछ लोग काम करते हैं और कुछ लोग केवल ‘काम करते हुए दिखने’ का नाट्य रचते हैं। पर उत्तराखंड पुलिस ने एक तीसरा ही दिव्य मार्ग खोज निकाला है—

“कानून-व्यवस्था का कड़ा दंड देना और साथ ही अपराधी को राजनीतिक रूप से अमर कर देना!”

सियासी गलियारों में हड़कंप है कि जो कांग्रेस नेता बर्फ़ में जमे हुए थे, जिन्हें जनता पूछ भी नहीं रही थी, पुलिस वाले अपने लाठी-डंडों और सरकारी गाड़ियों से ढो-ढोकर उन्हें जनता के दिलों के सिंहासन पर बैठा रहे हैं।

1. मोहनखेड़ा का ‘फ़िल्मी महाप्रस्थान’ और वाल्मीकि प्रकरण

उधम सिंह नगर के रुद्रपुर में जब मोहनखेड़ा और अभिषेक वाल्मीकि का प्रकरण उठा, तो पुलिस ने अपनी प्राचीन ‘कलात्मक सुध-बुध’ का परिचय दिया। पुलिस चाहती तो मोहनखेड़ा को चुपचाप, बिना किसी बाजे-गाजे के थाने बुला सकती थी। पर खाकी वर्दी में छिपे ‘फ़िल्मी निर्देशकों’ ने तय किया कि दृश्य में रोमांच होना चाहिए!

हमने तो सिर्फ़ एक आदमी को गाड़ी में बैठाया था, यह पूरा का पूरा राजनीतिक दल हमारे ही मत्थे क्यों मढ़ दिया गया?”विरोध हुआ, नारेबाज़ी हुई और कानून का पालन कराने निकली पुलिस अनजाने में ही कांग्रेस की रुद्रपुर शाखा की ‘पब्लिसिटी एजेंसी’ बनकर रह गई।

2. नैनीताल का ‘बस-रोको महायज्ञ’

नैनीताल जनपद में भी खाकी का यह ‘पब्लिसिटी-प्रेम’ कम नहीं पड़ा। मौक़ा था कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा का। कांग्रेस कार्यकर्ता बसों में भरकर रैली में जा रहे थे। पुलिस को लगा कि रैली में भीड़ शांति से पहुँच गई, तो उसमें रोमांच क्या रहेगा?तत्काल नाकाबंदी की गई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बसों को बीच रास्ते में ही रोक दिया गया।

इसके बाद जो हुआ, वह विशुद्ध ‘रामलीला का मंचन’ था। पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच ज़ोरदार नोकझोंक हुई। खाकी का सिपाही गरजा, नेता जी चिल्लाए, और पीछे खड़े कार्यकर्ता ने चुपके से पूरे घटनाक्रम का HD वीडियो बनाकर फ़ेसबुक-इंस्टाग्राम पर चिपका दिया!

कांग्रेस नेताओं ने इन वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल से यह कहते हुए साझा किया—“देखिए! यह अत्याचारी सरकार हमें खड़गे जी की रैली में जाने से रोक रही है!” जनता ने वीडियो देखा, और सहानभूति की लहर दौड़ गई। मामला इतना बढ़ा कि कांग्रेसियों का पूरा गिरोह नैनीताल के पुलिस कप्तान के दफ़्तर में जा घुसा और ज़ोरदार प्रदर्शन कर दिया।

3. अज्ञात’ निर्देशों का दिव्य रहस्य

अब ज़रा इस पूरे खेल के दार्शनिक पहलू को समझिए। जब ऊपर के बड़े अधिकारियों से पूछा जाता है कि “हुज़ूर, क्या आपने इन नेताओं को हिरासत में लेने के लिए कोई राजनीतिक निर्देश दिए थे?”

तो अधिकारी आँखें गोल-गोल घुमाकर, माथे पर तिलक लगाकर कसम खाते हैं—“अरे राम-राम! हमने तो कोई राजनीतिक आदेश नहीं दिया!”

अब सवाल यह उठता है कि जब ऊपर से कोई आदेश नहीं था, तो निचले स्तर के वे पुलिसकर्मी किस दिव्य प्रेरणा (या अदृश्य शक्ति) से चालित हो रहे थे?

क्या वे सिपाही गुप्त रूप से कांग्रेस के ‘फ़्री-पब्लिसिटी सेल’ के अवैतनिक कर्मचारी हैं? या फिर उनके भीतर का कलाकार जाग जाता है कि ‘वीडियो बन रहा है, ज़रा कड़ा री-टेक ले लें’? भाजपा की सरकार में कांग्रेस को जो ‘फ़्री पब्लिसिटी’ की लिफ़्ट मिल रही है, उसका जवाब पूरी दुनिया में कहीं नहीं है। पुलिस जिस नेता की ज़मीन तैयार करने के लिए उसे हिरासत में लेती है, वही नेता अगले दिन सोशल मीडिया पर ‘सरकार से लोहा लेता हुआ क्रांतिकारी सूरमा’ बनकर चमकता है।

4. अंतिम निर्णय और प्रशासनिक अमरता

अब समय आ गया है कि उत्तराखंड पुलिस प्रशासन अपना रुख़ साफ़ करे। जनता और हुक्मरान यह जानना चाहते हैं कि:

इन नेताओं पर कार्रवाई का असली आधार क्या था?

यह महान कार्रवाई किस अधिकारी के शुभ निर्देशों पर हुई थी?

और क्या इस पूरी नौटंकी में नियमावली का एक भी पन्ना पलटा गया था या सब ‘ऑन द स्पॉट’ फ़िल्मी पटकथा पर चल रहा था?

सवाल सिर्फ़ किसी मोहनखेड़ा या बसों को रोकने का नहीं है। सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड पुलिस अनजाने में उन कांग्रेसी नेताओं को ‘राजनीतिक ऑक्सीजन’ का सिलेंडर सप्लाई कर रही है, जो लंबे समय से जनता के बीच वेंटिलेटर पर पड़े अपनी पहचान के लिए छटपटा रहे थे ?

हालाँकि, सिक्का हमेशा दोतरफ़ा होता है। पुलिस का अपना तर्क है और नेताओं का अपना प्रपंच। इसलिए जब तक किसी निष्पक्ष जाँच का पर्चा बाहर नहीं आ जाता, तब तक किसी ‘गुप्त मिलीभगत’ का दावा करना शायद पुलिस महकमे के उन ‘मासूम कलाकारों’ के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने बिना कोई फ़ीस लिए कांग्रेस का इतना बड़ा प्रचार अभियान चला दिया!


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