नवरात्र के पहले दिन जानिए माता धारी देवी के बारे में।

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आज से शारदीय नवरात्र की शुरुवात हो चुकी है। देशभर में नवरात्र के दौरान अलग अलग दिन दुर्गा माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है। देवी मां का चमत्कार से भरा एक मंदिर देवभूमि उत्तराखंड में भी है जिसे धारी देवी के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर श्रीनगर से पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर अलकनंदा नही के तट पर स्थित है। धारी देवी को काली माता का रूप माना जाता है। धारी देवी को उत्तराखंड की रक्षक देवी के रूप में भी जाना जाता है। कहा जाता है की धारी देवी दिनभर में तीन बार अपना रूप बदलती हैं। सुबह के समय में मातारानी  का बाल रूप दिखाई देता है, दोपहर के समय में कन्या और रात के समय में धारी देवी बूढ़ी मां के रूप में अपने भक्तों को दर्शन देती है।

वैसे तो उत्तराखंड यहां स्थित चारधामों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है लेकिन इन चारों धामों को धारण करने वाली देवी धारी देवी है। मान्यतानुसार जब भी कभी धारी देवी मंदिर या माता धारी देवी की मूर्ति में किसी भी प्रकार का परिवर्तन किया जाता है तो धारी देवी अक्रोशित होकर प्रलय ले आती हैं। जब 16 जून,  2013 को एक प्रोजेक्ट के तहत उत्तराखंड सरकार ने धारी देवी की मूर्ति को उनकी जगह से हटाया था तब केदारनाथ के साथ साथ पूरे उत्तराखंड  में प्रलय आया था। ऐसा कहा जाता है की यह सब माता के प्रकोप से हुआ था। लोग दूर दूर से इस मंदिर में माता के दर्शन करने आते है।


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