धनतेरस,भाईदूज को लेकर करें कन्फ्यूजन दूर

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देहरादून : दीपावली पर्व के विषय में अभी भी बहुत कन्फ्यूजन है कि किस दिन धनतेरस, नरकचौदस या भाई दूज मनाया जाय।

मेरा विचार है कि दीपक मिनसने व यम पूजा 22 10 22 की शाम 6 बजे के बाद किया जाय और धनतेरस की खरीद 23 10 22 को दिन में 2 बजे तक करना शुभ है।

नरक चौदस 23 10 22 की शाम 6 बजे के बाद को प्रकाश, दीपक मिनसने व पूजा का कार्य किया जाय व नरक चौदस का स्नान गंगा जल व अहोई अष्टमी को रखे गए कलश के जल को डाल कर 24 की सुबह किया जाय। 24 की शाम दीपावली मनाई जाय।

26 की शाम 3 बजे के बाद भाई दूज का टीका किया जा सकता है या 27 की सुबह 12 बजे तक। जैसी सुविधा हो।

 *धनतेरस*

धनतेरस या धनत्रयोदशी से हई दीपावली का 5 दिन का महापर्व आरंभ हो जाता है। धनतेरस के दिन लोग शगुन के तौर पर सोना-चांदीके बर्तन या आभूषण खरीदते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार धनतेरस के दिन वैद्य धन्वंतरि समुद्र मंथन से हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इसे धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस के दिन श्री गणेश, धन के देवता कुबेर, औषधि के देवता धन्वंतरि तथा सुख, समृद्धि तथा वैभव की देवी महालक्ष्मी की पूजा विधि विधान से एक साथ की जाती है।

 

श्री गणेश सबके आराध्य माने जाते हैं , इसीलिए सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके बाद भगवान धन्वंतरि का पूजन आरंभ करें। भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई और पीली चीज प्रिय है। भगवान कुबेर धन के अधिपति हैं। उनकी पूजा प्रदोष काल में ही करें। भगवान कुबेर को सफेद मिठाई का भोग लगाएं।

महालक्ष्मी का पूजन भी धनतेरस के दिन प्रदोष काल में ही किया जाता है। 

 

ज्योतिष अनुसार इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, घरेलू चीजों, वाहन, घर, इलेक्ट्रॉनिक सामान इत्यादि की खरीदारी करने का विधान होता है।

ऐसे में अगर आप सोना चांदी इस दिन नहीं खरीद सकते हैं तो आप पीतल धातु के बर्तन खरीद सकते हैं पीतल को स्वास्थ्य के लिए शुभ माना गया है। इसकी खरीदारी करने से हर तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है और घर परिवार में शुभता आती है। वही इस दिन आप तांबे के बर्तन भी घर ला सकते हैं। तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल करने से सेहत पर सकारात्मक असर पड़ता है। तांबे के बर्तनों का प्रयोग पूजा पाठ के समय भी होता है। धनतेरस के दिन मिटटी के बर्तनों की खरीदारी करना भी फलदायी माना जाता है। इसलिए दीपावली के दीपक, लक्ष्मी गणेश इत्यादि की खरीदारी करें। साथ ही 5 रुपए का साबुत धनिया व 2 झाड़ू भी खरीदें।

*चीजें जो नहीं खरीदें..*

लोहे को शनिदेव का कारक माना गया है। ऐसे में धनतेरस के मौके पर लोहे से बनी चीजों को भूलकर भी नहीं खरीदना चाहिए। स्टील एक शुद्ध धातु नहीं है। मान्यताओं के अनुसार इस पर राहु का प्रभाव ज्यादा रहता है। नुकीली और धारदार चीजें जैसे चाकू, पिन, सुई जैसी नुकीली और धारदार चीजों को खरीदने से बचना चाहिए। एल्युमिनियम से बने सामानों को खरीदने से बचना चाहिए। इस धातु को दुर्भाग्य का सूचक माना जाता है।

 

धनतेरस के दिन यम के नाम से दीपदान की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है। अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति को धनतेरस के दिन पूजा करने के साथ ही विधिपूर्वक दीपदान भी करना चाहिए. इसके बाद अकाल मृत्यु का डर नहीं सताता. इस दिन यमराज के लिए आटे का चौमुख दीपक बनाकर उसे घर के मुख्य द्वारा पर रखा जाता है. घर की महिलाएं रात के समय इस दीपक में तेल डालकर चार बत्तियां जलाती हैं. इस दीपक का मुख दक्षिण दिशा की ओर होता है. दीपक जलाते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके उसे घर के द्वार से दक्षिण दिशा में रख दिया जाता है। ध्यान रखें दीप रखने के बाद मुड़ कर उसे न देखें।

अबकी बार दीवाली में……

राष्ट्रहित का गला घोंटकर,

छेद न करना थाली में…

मिट्टी वाले दीये जलाना,

अबकी बार दीवाली में…

देश के धन को देश में रखना,

नहीं बहाना नाली में..

मिट्टी वाले दीये जलाना,

अबकी बार दीवाली में…

बने जो अपनी मिट्टी से,

वो दिये बिकें बाज़ारों में…

छुपी है वैज्ञानिकता अपने,

सभी तीज़-त्यौहारों में…

चायनिज़ झालर से आकर्षित,

कीट-पतंगे आते हैं…

जबकि दीये में जलकर,

बरसाती कीड़े मर जाते हैं…

कार्तिक दीप-दान से बदले,

पितृ-दोष खुशहाली में…

मिट्टी वाले दीये जलाना…

अबकी बार दीवाली में…

मिट्टी वाले दीये जलाना…

अब की बार दिवाली मे …

कार्तिक की अमावस वाली,

रात न अबकी काली हो…

दीये बनाने वालों की भी,

खुशियों भरी दीवाली हो…

अपने देश का पैसा जाये,

अपने भाई की झोली में…

गया जो दुश्मन देश में पैसा,

लगेगा रायफ़ल गोली में…

देश की सीमा रहे सुरक्षित,

चूक न हो रखवाली में…

मिट्टी वाले दीये जलाना…

अबकी बार दीवाली में…

*मिट्टी वाले दीये जलाना..*

*अबकी बार दीवाली में…*


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