करवा चौथ स्पेशल

सनातन संस्कृति में पर्व और त्योहारों का विशेष महत्त्व है। इन्हीं पर्वों में से एक है करवा चौथ। करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु के लिए रखा जाता है। सुबह तड़के सास द्वारा अपनी बहु को सरगी दी जाती है जिसके बाद बहु सरगी ले कर अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत शुरू करती है और दिन भर निराहार और निर्जला व्रत का पालन कर के देर शाम में चांद को देख कर अपना व्रत पूरा करती है।

आज से कुछ वर्ष पूर्व तक इस व्रत की विधि में परिवार की ही सुहागिन महिलाएं एक दूसरे को चूड़ियां पहना कर और और एक दूसरे के हाथों में मेंहदी लगा व्रत के लिए तैयार हुआ करती थीं और शाम के समय एक साथ व्रत की कथा पढ़ा करती थी। लेकिन आज के दौर में हमारी यह संस्कृति यह संस्कार जो एक सास से उसकी बहु और बेटियों तक पहुंचती थी, जेठानी से देवरानी तक पहुंचती थी कहीं गुम होती जा रही है। वजह है की आज कल की महिलाएं अपने परिवार की महिलाओं के बजाय ब्यूटी पार्लर में जा कर अपने हाथो में मेंहदी लगा रही है। फैशन के इस दौर ने हमारी संस्कृति और संस्कारो को काफी हद तक बदल दिया है। जिससे पारिवारिक सौहाद्र और प्रेम खत्म होता जा रहा है और किसी स्पेसिफिक तबके को इसका लाभ मिलता जा रहा है। जिससे कहीं न कहीं हमारी आने वाली पीढ़ी अपने संस्कारों और संस्कृति से अनभिज्ञ है।

पंचांग के अनुसार, हर साल *करवा चौथ व्रत* कार्तिक मा​ह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखते हैं और उसमें भी इस बात का ध्यान रखा जाता है ​कि चतुर्थी तिथि में ही चंद्रोदय हो. करवा चौथ का व्रत बिना चंद्रमा की पूजा किए पूर्ण नहीं हो सकता है क्योंकि चंद्रमा की पूजा के बाद ही व्रती महिलाएं पारण करती हैं.

इस आधार पर देखा जाए तो इस साल कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 13 अक्टूबर को देर रात 01:59 बजे हो रहा है और चतुर्थी तिथि 14 अक्टूबर को तड़के 03:08 एएम पर समाप्त हो रही है. ऐसे में करवा चौथ व्रत के लिए उदया तिथि 13 अक्टूबर को है और इस दिन रात्रि में चतुर्थी तिथि में ही चंद्रोदय हो रहा है. इस बार करवा चौथ पर चंद्रमा और बुध उच्च राशि में होंगे। गुरु-शनि अपनी ही राशियों में और मंगल खुद के नक्षत्र में होगा। इन पांच ग्रहों की शुभ स्थिति के साथ बुधादित्य और महालक्ष्मी योग भी रहेगा। सितारों की इस स्थिति से पूजा और व्रत का शुभ फल और बढ़ जाएगा।

शुक्र अस्त होने पर मांगलिक कामों के साथ सौभाग्य पर्व यानी करवा चौथ व्रत की शुरुआत नहीं की जा सकती। इसलिए जिन महिलाओं के लिए ये पहला करवा चौथ है उन्हें अगले साल से ये व्रत शुरू करना चाहिए। इनके अलावा जो महिलाएं पहले से ये व्रत कर रही हैं उनको शुक्र अस्त का दोष नहीं लगेगा। बल्कि इस बार गुरु अपनी ही राशि में मौजूद है और गुरुवार को ही ये व्रत रहेगा। इसलिए ये संयोग इस व्रत के शुभ फल को और बढ़ा देगा।

तो आइए इस करवा चौथ के व्रत को अपने परिवार के साथ माना कर इसे विशेष बनाएं।

 


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