लापरवाह कंपनी के हवाले हाईवे चौड़ीकरण की जिम्मेदारी, उठे सवाल

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लोकजन टुडे, देहरादूनः निर्माण में लेटलतीफी और दुर्घटनाओं के लिए कुख्यात हरिद्वार—दून राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेजी से काम शुरू हो चुका है। इस परियोजना के एक साल में पूरे होने के आसार हैं, लेकिन तब तक ये निर्माणाधीन हाईवे और कितने लोगों की जिंदगी लीलेगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। क्योंकि जिन एजेंसियों को हाईवे के निर्माण का कार्य सौंपा गया है, उन्होंने सुरक्षा प्रबंधों के मामले में सावधानी नहीं बरती है।

दुर्घटना संभावित स्थानों पर अब भी कई सुरक्षा प्रबंध नहीं हो पाए हैं। मोहकमपुर से लेकर कुआंवाला के मध्य और भानियावाल से लालतप्पड़ के बीच और उससे आगे नेपाली फार्म—हरिद्वार के बीच कई स्थानों पर हाईवे की खतरनाक स्थिति है, लेकिन वहां सुरक्षा के उपाय नदारद हैं।
ये जानते हुए कि अब तक इस हाईवे पर 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2017 तक हाईवे पर 231 दुर्घटनाएं हो चुकी थीं, जिनमें 142 लोग मारे गए और 161 लोग घायल हुए। सबसे अधिक 54 हादसे 2013 में हुए, जिसमें 28 लोगों की मौत हुई और 48 लोग घायल हुए। 2016 में सबसे अधिक 29 लोग हाईवे पर हुई दुर्घटनाओं में मारे गए।

आधे—अधूरे हाईवे के कारण लगातार हुए सड़क हादसों ने प्रदेश सरकार और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को भी हिलाकर रख दिया। इस प्रोजेक्ट से केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी बेहद व्यथित थे और इसे मंत्रालय के लिए एक बदनुमा दाग मानते थे। लगातार हुए सड़क हादसों का मामला उच्च न्यायालय तक जा पहुंचा और न्यायालय से हाईवे के निर्माण को लेकर आदेश तक पारित हुए। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और सांसद डॉण् रमेश पोखरियाल निशंक ने मंत्रालय पर लगातार दबाव बनाने के बाद पुरानी कंपनी का करार निरस्त हुआ और दो नई एजेंसियों को हाईवे के निर्माण कार्य सौंपा गया।
एनएचएआई के आरओ सीके सिन्हा ने बता

या कि राजमार्ग का कार्य कर रही दोनों एजेंसियों को पहले से ही ये दिशा—निर्देश दिए गए हैं कि वे सुरक्षा के समुचित इंतजाम करेंगे। दुर्घटना संभावित लोकेशन पर उन्हें होर्डिंग लगाने, सुरक्षा चिन्ह व अन्य सुरक्षा के उपाय करने को कहा गया है। यदि इसमें कोई लापरवाही होगी तो उन्हें कड़ाई से दिशा—निर्देशों का अनुपालन करने को कहा जाएगा।


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