अफसरों की चाँदी.. 50 विभागों वाला मुख्यमंत्री..
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अभिषेक सिन्हा, देहरादूनः मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए आने वाले दिन किसी चुनौती से कम नहीं हैं। ऐसा हम क्यों कह रहे है आपको बताते है…उत्तराखंड के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा मुखिया रहा हो जिसके पास अकेले 50 विभागों की जिम्मेदारी हो खैर ये तो क्षमताओं पर भी निर्भर करता है लेकिन यंहा हमारा उद्देश्य किसी की भी क्षमताओं पर सवाल खड़ा करना मकसद बिलकुल नहीं है लेकिन ग्राउंड रियलिटी पर अगर चीजों को देखा और आँका जाये तो निश्चित कमी तो महसूस दे रही है ऐसे में हमारे मुखिया भी प्रदेश की जनता के साथ- साथ अपने परिवार को भी पूरा समय भी नहीं दे पा रहे है ऐसे में
खेल भी बड़े हो रहे है इसकी वजह भी इतने सारे विभागों के भार का होना है जिसकी वजह से मुखिया किसी भी एक विभाग पर ध्यान केंद्रित ही नहीं कर पा रहे है ऐसे में तो चर्चा ये भी है कि चालाक अफसर के साथ मुखिया के इर्द गिर्द घूमने वाले बड़ा खेल करने में जुटे है तभी तो जीरो टॉलरेंस की विपक्ष खिल्ली उड़ा रहा है जबकि मुखिया की छवि बेदाग़ है लेकिन आरोप लगना स्वाभाविक है ऐसे में पहले से ही उनके पास क्षमता से अधिक विभाग हैं और वर्तमान में वित्त व संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत के आकस्मिक निधन से उनके पास पचास से अधिक विभागों का बोझ आ गया है। उनके लिए प्रत्येक विभाग की समीक्षा करना तक संभव नहीं है। यानि पचास विभागों की समीक्षा एक एक दिन भी करेंगे तो करीब दो माह बाद ही फिर विभाग का कार्य देख सकेंगे। इन्ही सब का फायदा कुछ चालाक अफ़सर ले रहे है या यु कहे उनकी चांदी कट रही है दोनों हाथो से माल बटोरने तैयारी जारी है लेकिन बेचारे मुखिया को अपने इतने सारे विभागों से फुर्सत मिले तभी तो कुछ पता चले चलिए अबबात करते है खाली पड़े रिक्त पदों की जो पहले से ही कैबिनेट में पद रिक्त चल रहे थे।

ऐसे में प्रकाश पंत का जाना जो सदन के भीतर सरकार के लिए सबसे मजबूत स्तंभ थे। अकेले दम पर विपक्ष की बोलती बंद करा देते थे। ऐसे में सीएम के सामने न केवल उनका विकल्प बल्कि खुद के लिए बोझ कम करना भी बड़ी चुनौती होगी। विधानसभा में ट्रेजरी बेंच की ढाल माने जाने वाले प्रकाश पंत का स्थान भर पाना त्रिवेंद्र सरकार के लिए आसान नहीं होगा। पंत सरीखा संसदीय मामलों की गहरी समझ और अनुभव वाला भाजपा में कोई नेता नहीं है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र खुद भी पंत की शोक सभा में यह स्वीकारते दिखे। सीएम बोले कि ट्टसंसदीय प्रणाली में उनकी जिम्मेदारी कौन संभालेगा?’ इस सवाल का जवाब अगले विधानसभा सत्र से पहले मुख्यमंत्री को खुद ही तलाशना होगा।
पंत के असामयिक देहावसान की खबर के बाद सियासी हलकों में ये सवाल तैरने लगा है कि आखिर उनका खालीपन कौन भर पाएगा? सियासी जानकारों का मानना है कि अपने संसदीय और विधायी ज्ञान की पंत ऐसी लंबी रेखा खींच गए हैं, जिसके बराबर या उससे लंबी रेखा खींचने वाला फिलहाल त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल में मौजूद नहीं है। यह चिंता खुद मुख्यमंत्री की भी है। उन्होंने इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने में कोई संकोच भी नहीं किया। प्रदेश पार्टी कार्यालय में आयोजित शोक सभा के दौरान उन्होंने कहा, ट्टनिश्चित रूप से मैं यह सोच रहा हूं कि विधानसभा में और संसदीय प्रणाली में उनकी जिम्मेदारी कौन संभालेगा?’
त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल में वर्तमान में जो मंत्री हैं, उनमें एक नाम कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक का सामने आता है। सदन में जब भाजपा विपक्ष में थी, तब उन्हें उपनेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। संसदीय मामलों की वे भी ठीकठाक समझ रखते हैं। लेकिन यदि मुख्यमंत्री को संसदीय ज्ञान के साथ एक आक्रामक और तेज तर्रार विकल्प की आवश्यकता होगी तो वो नाम उन्हें अपने विधायकों में तलाशना होगा।
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