उत्तराखंड पुलिस का ‘रील्स स्टार’ या अपराधियों का यार? भदौड़ा कांड के बाद खुली कोतवाल विक्रम राठौर की ‘काली खतौनी !’

Share your love

संवाददाता: करन सहगल

हल्द्वानी/देहरादून।

उत्तराखंड पुलिस महकमे में इन दिनों एक ही नाम की सबसे ज्यादा ‘थू-थू’ हो रही है—

नाम है निरीक्षक विक्रम राठौर। जी हां, वही वर्दीधारी जो जनता की सुरक्षा करने के बजाय सोशल मीडिया पर फिल्मी गानों पर कमर मटकाने, रसूखदार डायलॉग मारने और लाखों फॉलोअर्स बटोरकर खुद को ‘सिंघम’ साबित करने में चौबीसों घंटे व्यस्त रहते हैं। लेकिन अब इस रील स्टार का रीयल (असली) चेहरा बेनकाब हो चुका है। काशीपुर के आईटीआई थाने से जुड़े वेस्ट यूपी और उत्तराखंड के कुख्यात माफिया योगेश भदौड़ा प्रकरण में जैसे ही विक्रम राठौर का नाम मुख्य आरोपी और मददगार के रूप में सामने आया, महकमे से लेकर देहरादून के सियासी गलियारों तक भूचाल आ गया है।

लेकिन रुकिए ! खाकी को दागदार करने का यह कारनामा साहब ने पहली बार नहीं किया है। रक्षक के भक्षक बनने और अपराधियों की गोदी में बैठने का यह खेल बहुत पुराना है। आइए आपको ले चलते हैं साल 2019 के उस सनसनीखेज कांड में, जिसकी स्क्रिप्ट भी इसी तथाकथित सिंघम ने लिखी थी।

फ्लैशबैक 2019

जब हल्द्वानी के सिंधी चौक पर बही थी खून की नदी याद करिए 15 दिसंबर 2019 का वह खौफनाक दिन। हल्द्वानी का सबसे व्यस्त इलाका सिंधी चौक (मंगल पड़ाव) और वक्त दोपहर का। सरेराह व्यापारी भूपेंद्र पांडेय को गोलियों से भून दिया गया। (Case Crime No. 486/2019, IPC 302, 394 व आर्म्स एक्ट)।

हालांकि, इस मामले में कोर्ट ने नवंबर 2023 को मुख्य आरोपी सौरभ गुप्ता और गौरव गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाकर जेल भेज दिया। लेकिन इस खूनी खेल के पीछे असली शह किसकी थी ? मृतक भूपेंद्र पांडेय के परिजनों ने चिल्ला-चिल्लाकर आरोप लगाया था कि हत्यारे गुप्ता बंधुओं के सिर पर तत्कालीन हल्द्वानी कोतवाल विक्रम राठौर का हाथ था। हत्या से पहले भूपेंद्र ने कोतवाल साहब के सामने गिड़गिड़ाते हुए अपनी जान की भीख मांगी थी, लेकिन न्याय की कुर्सी पर बैठे इस इंस्पेक्टर का दिल नहीं पसीजा। आरोप तो यहां तक हैं कि कार्रवाई करने के बजाय साहब ने ‘वलदियाखान’ के एक आलीशान होटल में हत्यारों के साथ मिलकर पीड़ित की ‘डील’ कराने की बिचौलिए वाली भूमिका निभाई। नतीजा यह हुआ कि भूपेंद्र की जान चली गई। उस वक्त हल्द्वानी की जनता सड़क पर उतरी थी, उग्र प्रदर्शन हुए थे, तब जाकर थू-थू से बचने के लिए पुलिस कप्तान ने राठौर को लाइन हाजिर कर पिएथौरागढ़ के पहाड़ों में ट्रांसफर किया था।

सफेदपोशों की मेहरबानी: क्या इस बार भी होगी लीपापोती?

हल्द्वानी की उस खूनी वारदात के बाद सिस्टम में बैठे साहब के आकाओं ने ऐसा पर्दा डाला कि इतनी बड़ी लापरवाही और संलिप्तता के बावजूद विक्रम राठौर को बड़ी सफाई से ‘क्लीन चिट’ की मलाई थमा दी गई। इसी विभागीय लीपापोती का नतीजा है कि हौसले इतने बुलंद हो गए कि साहब जैसे ही काशीपुर के आईटीआई थाने के इंचार्ज बने, इन्होंने सीधे उत्तराखंड के लिये सिरदर्द—माफिया योगेश भदौड़ा से हाथ मिला लिया।

अब उत्तराखंड की जनता पूछ रही है कि क्या हर बार खाकी और रसूख के दम पर इस दागी इतिहास को दबा दिया जाएगा? क्या इस बार भी भदौड़ा केस में साहब को बचाने के लिए फाइलें दबाने का खेल शुरू हो चुका है?

जनता त्रस्त, कोतवाल साहब रील्स में व्यस्त !

हल्द्वानी से लेकर काशीपुर तक अपराध का ग्राफ बढ़ता रहा, जनता न्याय के लिए थानों के चक्कर काटती रही, लेकिन हमारे रील्स स्टार विक्रम राठौर कैमरे के आगे तरह-तरह के पोज देकर वीडियो चमकाने में मस्त रहे। वर्दी का ऐसा व्यक्तिगत और व्यावसायिक दुरुपयोग शायद ही उत्तराखंड पुलिस के इतिहास में किसी और ने किया हो। रील में ‘ईमानदारी की मूरत’ बनने वाले इस साहब की रीयल लाइफ की कहानियां अब खाकी को शर्मसार कर रही हैं। ड्यूटी टाइम में अपराधियों पर नजर रखने के बजाय रील्स के व्यूज और लाइक्स गिनने वाले इस अधिकारी पर अब तक सख्त एक्शन क्यों नहीं हुआ?

अकूत संपत्तियां का होने वाला है महा-धमाका!

सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, अपराधियों को यह मुफ्त का संरक्षण नहीं दिया जा रहा था। इसके पीछे करोड़ों की ‘मलाई’ का खेल है। विक्रम राठौर ने अपने सेवाकाल के दौरान अपने बेहद खास गुर्गों, जिगरी यार एक जाली नेता (फर्जी) और सगे रिश्तेदारों के नाम पर उत्तराखंड के पौश इलाकों और मैदानी क्षेत्रों में बेनामी और अकूत संपत्तियां खड़ी की हैं। जाली(फर्जी) साहब के साथ मिलकर महंगी जमीनों से लेकर आलीशान मकानों तक, काले धन को सफेद करने का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया है।

अब सबसे बड़ा और तीखा सवाल:

आखिर इस रील्स स्टार की अकूत संपत्ति की विजिलेंस या ईडी (ED) जांच कब शुरू होगी? क्यों शासन-प्रशासन इस पर सांप सूंघ कर बैठा है?

खैर, हमारे पाठकों और देवभूमि की जनता को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस तथाकथित ‘सिंघम’ और उनके रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई बेनामी संपत्तियों के खसरा-खतौनी, पक्के दस्तावेज और जमीनों का पूरा ब्यौरा बहुत जल्द हमारे इसी पोर्टल पर सिलसिलेवार तरीके से, सबूतों के साथ लाइव किया जाएगा।देखते रहिए, क्योंकि अब खाकी के पीछे छुपा हर ‘सफेदपोश’ बेनकाब होगा !


Discover more from Lokjan Today

Subscribe to get the latest posts sent to your email.