आखिर पत्रकारों को कोरोना योद्धा क्यों नहीं मानती सरकार…!

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रुद्रपुर: कोरोना का संकट हर तरफ गहराया हुआ है। संक्रमण का यह खेल आगे कब तक जारी रहेगा कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए यह दौर बहुत की कठिन और चुनौती भरा है।

आए दिन प्रदेश में 500 से अधिक मरीजों की जान जा रही है और ज्यादा मरीज संक्रमित पाए जा रहे है। संक्रमण के इस घातक वायरस ने हर किसी को अपनी चपेट में लिया है। पत्रकार भी इससे अछूते नहीं रह पाए और अब तक न सिर्फ उधम सिंह नगर के बल्कि पूरे प्रदेश के कई पत्रकारों को यह वायरस निगल चुका है। लेकिन चिंता का विषय यह है कि अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जिन पत्रकारों ने अपनी जान गवां दी। उनके बाद उनके परिजनों के लिए सरकार ने क्या व्यवस्था कर रखी है।

कोरोना की रोकथाम और मरीजों के इलाज के लिए जुटे शासकीय कर्मचारियों को जहां रावत सरकार ने कोरोना योद्धा करार दिया है। वहीं, सरकार और जनता के बीच सेतु का कार्य करने वाले निस्वार्थ पत्रकारों को यह सरकार योद्धा तक नहीं मानती और उनके मृत्यु पर श्रद्धांजलि देकर अपना पल्ला झाड़ लेती है। जबकि यह गलत है रावत सरकार को पत्रकारों के हितों की ओर से भी अब ध्यान देने की आवश्यकता है। दिन रात एक करके जो पत्रकार सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए काम करते है उसकी मृत्यु होने पर यह सरकार उसे भुला देने में पीछे नहीं हटती। आलम यह है कि तथाकथित पत्रकारों को छोड़ दें तो आज स्थिति यह है कि अगर किसी पत्रकार की कोरोना के कारण ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो जाती है तो अगले दिन से उसके बच्चे और पत्नी कैसे जीवन यापन करेंगे इसका कोई ठिकाना नहीं।

मेरा मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से विनम्र आग्रह है कि वे खुद दोनों संबंध में विचार करके जल्द से जल्द कोई निर्णय लें ताकि कोरोना के संकटकाल में कार्य कर रहे पत्रकारों का मनोबल और बढ़े। इतना ही नहीं एक विषय की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित कराना चाहूंगा कि पूरा प्रदेश बीते एक वर्ष से कोरोना के संकट से जूझ रहा है। ऐसे में प्रदेश सरकार के पास भरपूर समय था कि वो प्रदेश के हर एक जिले में ऑक्सीजन प्लांट बनवाए, वेंटिलेटर खरीदे, अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़वाए। लेकिन आदरणीय आपने कोई ध्यान ही नहीं दिया। सिर्फ पूरी सरकार प्रदेश में चुनाव एवं कुंभ मेला करवाने में जुटी रही और आज हालत यह है कि पूरा प्रदेश ऑक्सीजन के एक एक कण के लिए मोहताज बना हुआ है और दूसरे राज्यों की तरफ झांकने को मजबूर है। अगर अभी भी समय रहते नहीं चेते तो आने वाला समय इससे भयावह भी हो सकता है।


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